बलौदा बाजार

सोनबरसा-खैरवारडीह जंगल पर सीमेंट संयंत्रों का सर्वाधिक दुष्प्रभाव, वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर संकट
13-Apr-2025 9:22 PM
सोनबरसा-खैरवारडीह जंगल पर सीमेंट संयंत्रों का सर्वाधिक दुष्प्रभाव, वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर संकट

प्रजनन पर भी  विपरीत प्रभाव 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 13 अप्रैल।  कभी छोटे वन्य प्राणियों से भरा पूरा रहने वाला जिला मुख्यालय से लगे सोनबरसा एवं खैरवारडीह जंगल पर सीमेंट संयंत्रों की स्थापना का सर्वाधिक दुष्प्रभाव पड़ है।

फिलहाल वन विभाग द्वारा चैन लिंकिंग बाउंड्रीवॉल निर्माण कर इन जंगलों को घेर दिया गया हैं जिसके चलते पूर्व में इन दोनों जंगलों में आसानी से माइग्रेट करने वाले वन्य जीवों का आवागमन भी पूर्णत: बंद हो गया है। जिसका विपरीत प्रभाव वन प्राणियों के प्रजनन पर भी पड़ रहा है।

सर्वाधिक प्रभावित जंगल खैरवारडीह है जो चारों ओर से जिला के प्रमुख सीमेंट संयंत्रों अथवा उनकी खदानों से घिरा हुआ है। जंगल के समीप ही एक नए सीमेंट प्लांट की स्थापना से खैरवारडीह जंगल एवं यहां रहने वाले वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर और अधिक संकट उत्पन्न हो गया हैं। इन जंगलों के वन्य प्राणियों के संवर्धन के अलावा जिला के सीमेंट संयंत्र द्वारा प्रभावित ग्रामों में सघन वृक्षारोपण नहीं किया गया तो भविष्य में क्षेत्र के तापमान में बेतहाशा वृद्धि से इंकार नहीं किया जा सकता।

विदित को कि बलौदाबाजार जिला मुख्यालय से महज 7-8 किलोमीटर की दूरी पर करीब 276 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत खैरवारडीह का जंगल स्थित हैं जिसके उत्तर पूर्व पश्चिम तथा उत्तर दिशा में सीमेंट संयंत्र स्थित है। इसके अलावा इस जंगल से लगा हुआ चार प्रमुख सीमेंट संयंत्रों के खदान भी हैं। जिसके चलते अब इन जंगल के वन्य प्राणी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यद्यपि संयंत्र ध्वनि प्रदूषण नहीं होने का दावा करते हैं परंतु रात्रि के दौरान इन संयंत्रों की बड़ी मशीनों के संचालन से उत्पन्न तीव्र वाइब्रेशन एवं खदानों में प्रतिदिन किया जा रहे विस्फोटक से इन जंगलों में निवासरत संवेदनशील प्राणी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

वहीं जंगल के किनारे से गुजरने वाले बलौदा बाजार सिमगा मार्ग तथा ग्राम कुकुरदी, खैरवारडीह होकर सिमगा मार्ग से जुडऩे वाले कच्ची सडक़ पर भारी वाहनों के आवागमन व शोर का प्रभाव भी इन पर पड़ रहा हैं। यही स्थिति ग्राम लटुवा से लगे सोनबरसा जंगल की है। इसके समीप ही एक सीमेंट संयंत्र स्थापित हैं। इसके अलावा ग्राम खजुरी में इस इस्पात संयंत्र भी निर्माण की प्रक्रिया में है। जिसका दुष्प्रभाव वन एवं वनया जीवन पर पढ़ रहा है।

बढ़ते औद्योगीकरण के साथ सघन वृक्षारोपण की आवश्यकता

जिला मुख्यालय से 25-30 किलोमीटर की परिधि में 6 बड़े सीमेंट संयंत्रों के अलावा दर्जनों छोटे औद्योगिक इकाइयां स्थित है। जबकि खैरवारडीह के समीप ग्राम सेमराडीह में अल्ट्राटेक का नया सीमेंट संयंत्र स्थापित हो चुका है। इन संयंत्रों की मशीनों भारी वाहनों के आवागमन खदानों में विस्फोटक का असर प्रभावित ग्रामों में तापमान वृद्धि के रूप में भी सामने आ रहा हैं।

 वर्तमान में छोटे क्षेत्र में विस्तृत यह जंगल ही क्षेत्रवासियों के लिए प्राकृतिक कॉलिंग का कार्य कर रहे हैं। भविष्य में संयंत्र व खदानों के विस्तारण से तापमान में और अधिक वृद्धि संभावित है अत: प्रभावित क्षेत्र के अलावा नवनिर्मित सडक़ों के किनारे सघन वृक्षारोपण आगामी पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक प्रतीत होता हैं।

जानवरों का एक जगह से दूसरी जगह जाने पर भी लगा विराम

बलौदाबाजार-भाटापारा मार्ग तथा बलौदाबाजार सिमगा मार्ग पर सीमेंट संयंत्रों के बड़े खदानों के अस्तित्व में आने के बाद से खैरवारडीह से सोनबरसा परस्पर माइग्रेट करने वाले जानवरों का आवागमन पूरी तरह बंद हो चुका है।  वहीं वन्य प्राणियों के सुरक्षा की दृष्टि से वन विभाग द्वारा दोनों ही जंगलों को चारों ओर चेन लिंकिंग व बाउंड्रीवाल निर्मित कर दिए जाने से वन्य प्राणियों वन्य प्राणी केवल अपने ही क्षेत्र में विचरण करने बाध्य हैं। उनकी सुरक्षा के लिहाज से उठाए गए कदम से वन प्राणियों के लिए मुसीबत खड़ीकर दी हैं। पिछले और 10 वर्षों से यहां वन्य प्राणियों की संख्या सतत कम होती जा रही है। अब यहां इन वन्य जीवों के वंश वृद्धि का उपाय तलाशना आवश्यक हो गया है।


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