बलौदा बाजार
बलौदाबाजार जिले के पलारी ब्लॉक का मोहन गांव, जो धीरे-धीरे खत्म हो रहा है
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 12 अप्रैल। यह तस्वीर बलौदाबाजार जिले के पलारी ब्लॉक के मोहन गांव की है। मोहन एक ऐसा गांव है जो धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। वजह इसकी मिट्टी महानदी की धारा से कट रही है। हर साल करीब 5 मीटर की दूरी तक मिट्टी कट जाती है। हाल यह है कि गांव का कोई हिस्सा नदी से 70-80 मीटर की दूरी पर है तो कोई 25-30 मीटर की दूरी पर। मोहन गोठान की दूरी तो नदी से महज 20 मी. ही रह गई है। जिसके चलते 300 एकड़ में बसे इस गांव की करीब 35 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है।
सैकड़ो एकड़ शासकीय भूमि जो अगर रहती तो इसके काम आती, नदी लील गई। गांव की एक दूसरी तस्वीर भी है जो आसानी से न तो दिखती है न समझ में आती है। माफिया इस गांव के रेत घाट से पिछले 15 साल में लाखों टन रेत निकाल कर मालामाल हो गए और मोहन गांव कंगाल हो गया। लोगों ने गांव तो नहीं छोड़ा है लेकिन यही हाल रहा तो जल्द ही छोड़ भी देंगे। क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं है कि गांव का कुछ हो सकता हैं।
उम्मीद छोडऩे की एक बड़ी वजह यह है कि राज्य की पहली सरकार में मोहान गांव की मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए रिपेयरिंग वॉल बनने की घोषणा की गई थी। इसके लिए 4 करोड़ रुपए भी स्वीकृति भी मिली। प्रशासन ने भी डीएमएफ से इसके लिए पैसा देने की बात कही थी। लेकिन सरकार बदलते ही सब कुछ बदल गया। अब इस गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। पिछले सरकार की घोषणाओं के बारे में अधिकारी बात तक करना पसंद नहीं करते।
इस संबंध में गांव का पूर्व सरपंच फिरत राम नेताम कहते हैं कि मोहन गांव में नदी का कटाव पिछले 25 साल में अधिक हुआ, जब बाढ़ अधिक आता है तो 10 से 15 मीटर मिट्टी कट कर नदी में बह जाती है और जब सामान्य बढ़ आता है तो कम से कम 4 से 5 मीटर नदी कट कर गांव के निजी जमीन करीब 35 एकड़ नदी में समाहित हो गया है जबकि शासकीय जमीन तो बहुत हुआ है पिछले साल जब कटाव ज्यादा हुआ तो तट बंद की मांग ज्यादा हुई तो राजस्व अधिकारी आकर गांव की सीमा नाप गए, जिससे बताया कि गांव के दर्जन भर से अधिक किसानों का 35 एकड़ जमीन नदी में समाहित हो गया है।
अगले साल तक गांव की गोठान भी शायद ही बचे
आज नदी की जो धारा दिख रही है उसके उस पार तक मोहन के खेत थे। आज वहां नदी बह रही है। नदी किनारे के दर्जनों पेड़ बाढ़ में मिट्टी कटाव के कारण गिरकर बह गए। अभी भी कई पेड़ झुक गए हैं अगले साल उनका बचना मुश्किल है। अगले साल तो गोठान की शायद ही बच पाए।
गांव की समस्या को लेकर अधिकारियों ने दिए बयान
इस संबंध में जिला खनिज अधिकारी कुंदन बंजारे का कहना है कि मोहन घाट का कटाव और पिछले बार उनकी अवधि खत्म होने के बाद से घाट बंद है, उसे ठेके पर नहीं दिया गया हैं। वहीं इस संबंध में जल संसाधन विभाग के ईई ए.के.पांडे का कहना है कि कटाव रोकने करीब दो किलोमीटर तटबंध निर्माण के लिए बाढ़ प्रबंधन के तहत 13 करोड रुपए एस्टीमेट बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया हैं। जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
मोहन रेत घाट बंद, फिर भी माफियों की नजर
नदी के कटाव के कारण रेत घाट का पुन: ठेका नहीं हुआ, पर जो रेत माफियाओं ने करोड़ कमा रखे हैं उनकी नजर आज भी मोहन की रेट घाट पर है। ग्रामीण बताते हैं कि रेत माफियाओं का चक्कर गांव में लगा हुआ है।


