बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 7 अप्रैल। जिले में एक उधारी विवाद ने शिक्षक की जिंदगी छीन ली थी। करीब डेढ़ साल पुराने इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड में आखिरकार न्याय मिला है। जिला एवं सत्र न्यायालय की विशेष अदालत ने शिक्षक की निर्मम हत्या करने वाले दो आरोपियों संजय श्रीवास और सृजन यादव को उम्र कैद की सजा सुनाते हुए 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
कब का है मामला
मामला दिसंबर 2022 का है। शिक्षक शांतिलाल पाटले, जो पेशे से सरकारी शिक्षक थे, 28 दिसंबर की शाम मछली लेने के बहाने घर से निकले थे, लेकिन फिर कभी लौटकर नहीं आए। परिवार ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, राज खुलते गए. शांतिलाल के बच्चों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपने पिता को आखिरी बार गांव के ही दो युवकों सृजन यादव और संजय श्रीवास के साथ देखा था. इसी आधार पर पुलिस ने जब दोनों से पूछताछ की तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि उधारी की रकम मांगने पर विवाद हो गया और बात गाली-गलौच तक पहुंची. गुस्से में आकर दोनों ने मिलकर डंडे से शांतिलाल पर हमला किया और फिर स्कार्फ से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी. हत्या के बाद शव को कसडोल मार्ग पर एक सुनसान इलाके में दफना दिया गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह का कहना है कि जहां पर शिक्षक शांतिलाल पाटले का शव दफनाया गया था, वह इलाका काफी सूनसान है। घटनास्थल पर मोबाइल नेटवर्क भी नहीं था. मोबाइल कंपनी वहां पर काम कर रही थी, गड्ढा भी खोदा जा रहा था. उसी गड्ढे का फायदा उठाकर आरोपियों ने हत्या के बाद शव को वहां पर डाल दिया. शव की पहचान मिटाने के लिए बाकायदा शव पर नमक भी डाले गए थे. पूछताछ में आरोपी सच बताने से कतरा रहे थे. मैंने और कांस्टेबल सुजीत तंबोली ने जब सख्ती बरती तो आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उनकी निशानदेही पर शव को निकाला गया।
पुलिसिया तफ्तीश और कोर्ट की सुनवाई
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर शिक्षक का शव बरामद किया और सबूतों के साथ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की.बलौदा बाजार के विशेष सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमिय अग्रवाल ने मजबूत पैरवी की. उन्होंने ‘अंतिम बार साथ देखे जाने’ के सिद्धांत को आधार बनाते हुए केस को अदालत में मजबूती से रखा. अदालत ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी माना और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई. साथ ही 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया. विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि यह एक जघन्य हत्या का मामला था, जिसमें एक निर्दोष शिक्षक की निर्ममता से हत्या की गई थी।
विशेष लोक अभियोजक अमिय अग्रवाल का कहना है कि जांच के दौरान यह सिद्ध हुआ कि मृतक को आखिरी बार अभियुक्तों के साथ देखा गया था और इसी अंतिम साक्ष्य के आधार पर पूरी जांच आगे बढ़ाई गई। आरोपियों ने उधारी के मामूली विवाद में शिक्षक की हत्या की और शव को छिपाने की कोशिश की। हमने सभी तथ्य, सबूत और गवाहों को अदालत में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। विशेष सत्र न्यायालय ने हमारे तर्कों को स्वीकार करते हुए. दोनों आरोपियों को धारा 302 और 34 के तहत आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है.यह फैसला समाज में कानून और न्याय पर लोगों का विश्वास और भी मजबूत करेगा।
इस फैसले ने साफ संदेश दिया है कि निजी रंजिश, गुस्सा या उधारी के विवादों को हत्या जैसे घिनौने अपराध में बदलने वालों को कानून सख्त सजा देगा.शिक्षक जैसे सम्मानित पेशे से जुड़े व्यक्ति की हत्या ने समाज को झकझोर कर रख दिया था. अब न्याय की इस लड़ाई में अदालत का फैसला पीडि़त परिवार के लिए राहत बनकर आया है।


