बलौदा बाजार
40 गांव में पानी की दिक्कत जिले में भूजल स्तर 350 फीट तक पहुंच चुका
जिले में हर साल 69 70 सेंटीमीटर अंडरग्राउंड वॉटर लेवल धट रहा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 6 अप्रैल। जिले में लगातार अंडरग्राउंड वॉटर लेवल का ग्राफ गिर रहा हैं। जिले के 40 ये 50 गांव डार्क जोन में है। जिसके बाद भी आ अंधाधुंध तरीके से जल दोहन किया जा रहा है। जिले के भूजल सर्वेक्षण के आंकड़ों की बात करें तो जिले में 88.70 फ़ीसदी के हिसाब से भूजल दोहन किया जा रहा है। इसके चलते 69-70 सेमी प्रतिवर्ष वाटर लेवल का ग्राफ गिर रहा हैं। जिले के कई इलाकों में तेजी से अंडरग्राउंड वॉटर लेवल में गिरावट दर्ज की गई हैं।
जिले में जो तालाब हैं उनका प्रशासन अभी तक अतिक्रमण से मुक्त नहीं कर कर पाया हैं। 90त्न सरकारी और निजी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे कि नहीं हैं जिसमें लगे हैं वह बदहाल पड़े हैं। इसके चलते जिले में जल संचयन को पलीता लग रहा हैं। गर्मी आते ही पेयजल संकट वह निस्तारी की समस्या कोई नई बात नहीं है। आप सबको पता है गर्मी में नदी तालाबों व भूजल का स्तर नीचे चला जाता है। बोरवेल कंपनी संचालक नवल अग्रवाल बताते हैं कि अप्रैल के पहले सप्ताह में ही भूजल स्तर 300 से 350 फीट तक नीचे चला गया है। पीएचई के अफसर ने भी इसकी पुष्टि की है। अप्रैल के आने वाले दिनों सहित में गर्मी बढऩे के साथ ही समस्या विकराल हो ती जाएगी
इन गांव में स्थित होती है ज्यादा खराब
जिले में सबसे अधिक खराब स्थिति ग्राम धाराशीव बागबुडा, बम्हनपुर, सीतावार, परसापाली, भालूकोना, ढाबा डीह, खैदा, अमलडीहा, पैदा, खैरा, कोतरगढ़, कुम्हारी, अहिल्दा, चांगोरी, पैसर, अमलीडीह, बाजारभाठा, करदा, कोरिया, तिल्दा, लाटा, सीरियाडीह, डोंगरी, चिचिरदा, पडरिया, पैजनी, जुरा, लाहोद, ढनढनी, मुंडा, लवनब, चौराहभाटा, गिंदोला, करी, सरवाडीह, कोसाही, जामडीह, कोहरोंद, दतरेंगी, टेहका, बुधवा, बुढ़वा कोनी, बंजर बैगुड़ा, परसवानी, धैराभाटा, पिंड्रा, बोरतरा, तरैगा, सूरजपूरा, बुचीपार, रोहरा, मनोहरा, हरिनभ_ा आदि में जल संकट हैं।
गर्मी में प्रति व्यक्ति औसतन 130 लीटर पानी की खपत
गर्मी के दिनों में औसतन प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 120-130 लीटर पानी खर्च करता हैं। इस लिहाज से अगर देखे तो रवि की फसल के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की खपत जो रोकने से बलौदाबाजार जिले के लगभग 13 लाख जनसंख्या को बड़ी आसानी से पानी मुहैया कराया जा सकता हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर प्रदीप कश्यप के मुताबिक किसान इस पानी का उपयोग सब्जी या अन्य फसलों के उत्पादन के लिए कर सकते हैं।
रवि सीजन में धान की फसल लेने से हो रही परेशानी
एक एकड़ रवि फसल धान लेने में करीब 24 लाख लीटर पानी की खपत होती हैं। इसकी अपेक्षा आमदनी बहुत कम हैं। अगर बड़े किसान फसल न लेकर पानी की इस व्यरथता को रोकते हैं तो वाटर लेवल को डाउन होने से बहुत हद तक बचाया जा सकता हैं। 20 हजार सिंचाई पंपों से खेतों में 65 करोड रुपए की बिजली खर्च करने के बाद 52 करोड़ की ग्रीष्मकालीन फसल का उत्पादन होगा
52 करोड़ की फसल की धान में 62 करोड़ का बिजली खर्च
जिले में कृषि के लिए लगभग 20 हजार पंप कनेक्शन हैं इसमें तीन एचपी के पंप के लिए 6000 यूनिट तक किसानों को बिजली मुफ्त में दी जाती है। वहीं 5 एचपी पंप कनेक्शन वाले किसानों को 7500 यूनिट फ्री दी जाती है जो एक सीजन में फसल लेने के लिए प्राप्त है। इस तरह किसान निशुल्क मिलने वाली औसतन 13 करोड़ यूनिट बिजली की खपत करते हैं। 5 यूनिट के हिसाब से 62 करोड़ खर्च हो होते हैं।


