बलौदा बाजार
बलौदाबाजार के 26 में से 16 जलाशयों में पानी नहीं, औसत जल भराव मात्र 9 फीसदी
सबसे बड़े छुईहा जलाशय में मात्र 48 फीसदी पानी पिछले 5 साल में सबसे कम
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 30 मार्च। गर्मी बढऩे के साथ बलौदाबाजार डिवीजन के 26 जलाशयों में से 16 पूरी तरह सूख चुके हैं। जो स्थिति आमतौर पर अप्रैल में में बनती थी वह इस बार मार्च में ही देखने को मिल रही है। भूजल स्तर 350 फीट के नीचे पहुंच चुका है। 26 जलाशयों में औसतन 9 फीसदी से भी कम पानी बचा है। जबकि पिछले साल 12 फीसदी जल भराव था, तभी भीषण गर्मी के दो महीने बाकी है। जिससे जल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। जलाशयों के तेजी से सूखने से पीने के पानी और सिंचाई पर गंभीर असर पड़ रहा सकता है। जलाशय में अप्रत्याशित गिरावट के प्रशासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है।
बलौदाबाजार डिवीजन के सबसे बड़े बांध छुईहा जलाशय में महज 48 फीसदी ही पानी बचा है, जो पिछले 5 साल में सबसे कम है। 26 जलाशयों में से यही एक जलाशय 50 फीसदी भरा है। जबकि बाकी में जलस्तर से 7 से 42 फीसदी ही रह गया है।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलाशय, तालाब, एनीकट और कुएं भूजल स्तर बनाए रखने के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। लेकिन प्रशासन ने इस और ध्यान नहीं दिया, जिससे कुओं के सूखने के बाद अब तालाब भी अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। जिससे निस्तारी जल संकट गहराने की आशंका है।
चार नदियां -दो नाले, फिर भी पानी के लिए परेशानी
बलौदाबाजार डिवीजन में महानदी, शिवनाथ, जोंक जैसी प्रमुख नदियां और बालमदेसी सहायक नदी के साथ जमुनिया व खोरसी नाला मौजूद हैं। इसके अलावा 2000 से अधिक तालाब, 1900 से ज्यादा डाबरी, 19000 कुएं-हैंडपंप, छोटे नाले, स्टाप डैम और अन्य जलस्रोत भी हैं। इसके बावजूद गर्मी के आते ही जल संकट गहरा जाता है। डिवीजन के आधे से अधिक जलाशय मुरुम भूमि वाले हैं। जिससे उनका पानी तेजी से रिस जाता है। ऊंचाई वाले जलाशयों का पानी ढलान के कारण टिक नहीं पता, जिससे जलाशय सूख जाते हैं। जल बचाने और सुरक्षित करने के प्रयासों की कमी से स्थिति बनी हुई है। यदि समय रहते जल संरक्षण और संवर्धन पर ध्यान नहीं दिया गया तो जिले में संकट और भी गंभीर हो सकती है।
अधिकतर पुराने तालाब अस्तित्व में नहीं रह गए
भूजल स्त्रोत बेहतर होने से जल स्तर में कम गिरावट आती है। गर्मी के समय शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल पानी की समस्या होती है, लेकिन इस बार तो पहले से ही इतनी समस्या शुरू हो गई है। डिवीजन के 70 गांव में से 50 गांव जलाशयों के सूखने से प्रभावित हो चुके हैं। इन जलाशयों से 6000 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होती थी, लेकिन जल स्तर गिरने से अब कृषि भी संकट में आ गई है।
अधिकांश पुराने तालाब या तो सूख गए या खत्म हो चुके हैं, जिससे निस्तारी जल की समस्या बढ़ गई है।
इन गांव में पेयजल और निस्तारी की दिक्कत
अप्रैल के पहले ही तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है अधिकतम तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंच गया है जो अप्रैल, मई में और बढ़ेगा, यही वजह है कि नदी तालाब का जलस्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है। जिले के अहिल्दा, चांगोरी, पैसर, अमलीडीह, खमरिया, बाजार भाटा, करदा, कोरिया, तिल्दा, लाटा, सिरियाडीह, डोंगरी, चिचिरदा, पंडरिया, पैजनी, जुरा, लाहौद, ढनढनी, मुंडा, लवनबंद, चौराभाटा, गिंडोला, कारी, सरवाडीह, कोसाही, जामडीह, कोहरौद, धाराशीव, बगबूढ़ा, बम्हनपुर, सीतावर, परसापाली, भालूकोना आदि शामिल हंै।
मुरूम भूमि वाले जलाशय सूख चुके -एसडीओ
सिंचाई विभाग के अनुविभागीय अधिकारी एके सिंह का कहना है कि पिछले साल की अपेक्षा जलस्तर में अधिक गिरावट आई है। मुरूम भूमि वाले जलाशय सूख चुके हैं, मिट्टी भूमि वाले जलाशयों में पानी है।


