बलौदा बाजार

क्षय रोग पर जागरूकता कार्यक्रम
27-Mar-2025 4:04 PM
क्षय रोग पर जागरूकता कार्यक्रम

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

भाटापारा, 7 मार्च। चिराग सोशल वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित लक्ष्यगत हस्तक्षेप परियोजना भाटापारा  के  परियोजना निदेशक मंगल पाण्डेय के मार्गदर्शन एवं परियोजना प्रबंधक दाशोदी सिंह के नेतृत्व में महासती वार्ड  भाटापारा में समुदाय की महिलाओं को विश्व क्षय रोग दिवस के  अवसर पर क्षयरोग के संबंध में जागरूक करने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

 परामर्शदाता सुलोचना देवांगन ने कहा कि  24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस  मनाया जाता है। विश्व क्षय दिवस को मनाने का  मुख्य उद्देश्य टीबी रोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है । साथ ही क्षय रोग (टीबी) के नियंत्रण की दिशा में की गई उपलब्धियों को याद दिलाना है। टीबी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो हर साल लाखों लोगों की जान लेने का कारण बनती है। हालांकि अच्छी बात यह है कि सही समय पर इस रोग की पहचान करके इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।  टीबी क्या है? टीबी  के प्रकार ,टीबी के लक्षण तथा उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दिया गया।  टीबी मरीज के साथ सामाजिक भेदभाव नहीं करना चाहिए।

छत्तीसगढ़ को टीबी मुक्त राज्य बनाने में सरकार की ही नहीं वल्कि मीडिया, स्वैच्छिक संगठनों, सामाजिक संगठनों, सिविल सोसायटी, युवाओं, महिलाओं एवं समुदाय की भी नैतिक जिम्मेदारी है।

आउटरीच बिन्देश्वरी टंडन ने कहा कि वल्र्ड टीबी डे 2025 का थीम ‘हां! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं: प्रतिबद्ध, निवेश, परिणाम है’ टीबी को अभी भी दुनिया में एक बड़ी बीमारी के रुप में देखा जाता है। विश्व टीबी दिवस साल 1982 से हर साल 24 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत वल्र्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्लूएचओ) द्वारा की गई थी। जिसका उद्देश्य डॉ. कोच द्वारा खोजे गए बैक्टीरिया (माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस) की वर्षगांठ को याद करना है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक कर सके। टीबी मरीजों को एचआईवी/ एड्स होने की भी सम्भावना होती है। अत: टीबी की बिमारी होने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाने वाली डाट्स पद्धति की दवायें उच्चतम गुणवत्ता की तथा मुफ्त उपलब्ध हैं। लगातार छ: से आठ माह तक अथवा डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवा लेना चाहिए।

कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के आउटरीच वर्कर प्रियंका मेश्राम, अनिता लहरे, शिक्षक साथी रेखा कोसले एवं ललिता सोनवानी का सराहनीय योगदान रहा।


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