बलौदा बाजार

हर दिन हैवी ब्लास्टिंग: रवान समेत एक दर्जन से ज्यादा गांव में जल संकट
21-Mar-2025 4:36 PM
हर दिन हैवी ब्लास्टिंग: रवान समेत एक दर्जन से ज्यादा गांव में जल संकट

भूजल स्तर गिरने से जलाशयों में पानी का टोटा, पंप की धार पतली, खेतों में दरारें
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बलौदाबाजार, 21 मार्च।
जिला मुख्यालय के चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में लगभग हर दिन हैवी ब्लास्टिंग हो रही है। इससे निकलने वाले चूना पत्थर से सीमेंट बनाकर कंपनियां मालामाल है। बतौर रॉयल्टी सरकार भी अच्छी खासी कमाई कर रही हैं। इसकी वजह से रवान समेत एक दर्जन से ज्यादा गांव पर जल संकट गहराता जा रहा है। प्लांट्स में पैमाने से ज्यादा गहरी खदानें खोदी गई है। उस पर भी लगातार हैवी ब्लास्टिंग के चलते भीतरी चट्टानों में बड़ी दरारें आ गई है।

नतीजा यह कि अब खदान गहरी होने से आसपास के पूरे इलाके का भूजल चट्टानों की दरारों से रिसकर प्लांट एरिया में इक_ा हो रहा है। यहां खदानों में इतना पानी है कि कंपनियां इससे अपनी बड़ी-बड़ी मशीन ठंडी कर रही है। इसके सारे काम आसानी से चल रहे हैं।
इधर, इलाके का भूजल स्तर गिरने से आसपास के जलाशयों में जल का टोटा है। बलौदाबाजार के प्रमुख कुकुरदी और छुहिया जैसे डैम मार्च के मध्य में ही सूखने की कगार पर हंै। इसके अलावा रवान समेत आसपास के गांव के हैंडपंप और कुएं भी सूख रहे हैं। अभी पूरा अप्रैल, मई और आधा जून बाकी है।
आलम यह है कि नल जल के तहत लगे सरकारी बोर भी जवाब दे रहे हैं। तालाबों में थोड़ा बहुत जो पानी बचा है वह इस कदर मटमैला की निस्तारी लायक भी नहीं कुल मिलाकर जिला मुख्यालय के चारों ओर जहां तक प्लांट फैले हैं वहां ग्राउंड वाटर लेवल गड़बड़ है। खास तौर पर रवान में यहां अभी सीमेंट प्लांट में खदानों का विस्तार तेजी से जारी है। और ज्यादा पड़ताल करने पर यह जानकारी भी सामने आई की कुछ प्लांट्स में खदान के अंदर बोर करवाए गए हैं। मतलब आने वाले दिनों में जब इन खदानों का पानी सूखेगा तो कंपनियां बोर के जरिए जमीन के और भी भीतर तक पानी चूसने के लिए तैयार बैठी है। इधर पीने के पानी को तरस रही जनता पूछ रही है यह कैसी व्यवस्था है।

5 साल में रवि फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई
भूजल स्तर गिरने का बुरा असर खेती किसानी पर भी पड़ा हैं। पांच साल पहले जहां मुख्यालय के चारों ओर खेत  हरी फसल से लहलहा रहे होते थे वे आज बंजर पड़े हैं। किसानों ने बताया कि इलाके में जिस दु्रतगति से प्लांट्स का विस्तार हो रहा है। उसके बाद खेत रवि फसल लायक नहीं रह गया है। सिंचाई के लिए जलाशयों में वैसे ही पानी नहीं है। ऊपर से ग्राउंड वाटर लेवल सूखने से खेतों में दरारें अलग पडऩे लगी हैं। जिन किसानों के खेतों में ट्यूबवेल लगा है उन्हें भी कुछ खास फायदा नहीं हो रहा। पानी की कमी से इन ट्यूबवेल की धार भी इतनी पतली हो चुकी है जो किसानों के लिए काम कि नहीं।
जल स्तर गड़बड़ाने वाले लोगों से पानी बचाने कहते हैं...
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इस पूरे मामले में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिला मुख्यालय समेत आसपास के सभी गांव में जल संरक्षण के लिए दीवार लेखन करवाए गए हैं। बड़े-बड़े अक्षरों में एक-एक बूंद पानी सहने और संदेश देने वाले यह स्लोगन उन्हीं कंपनियों ने लिखवाया है, जिनकी खदानों ने पूरे इलाके का भूजल सोख लिया हैं।
 

पर्यावरण संरक्षण को लेकर इन कंपनियों द्वारा किए जाने वाले दावे भी इसी तरह खोखले साबित होते रहे हैं। मसलन, पेड़ बचाओ का संदेश देने वाली कंपनियों ने खुद अपने प्लेन प्लांट के आसपास ग्रीन बेल्ट नहीं बनाया हैं। यह लोगों पर किसी तरह का एहसान भी नहीं उनके अपने प्लांट से निकलने प्रदूषण को रोकने के लिए यह जरूरी हैं। नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी जिन पर है वह हाथ पैर हाथ धरे बैठे हैं।
इस संबंध में बलौदाबाजार-भाटापारा के कलेक्टर दीपक सोनी का कहना है कि आप जानकारी भिजवाएं, मैं जांच करता हूं। वहीं केके बंजारा जिला खनिज अधिकारी का कहना है कि जानकारी नहीं है, यह हमारे विभाग में नहीं आता।


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