बलौदा बाजार

साल भर में शिक्षकों को चुनाव करवाने पड़े, अधूरा कोर्स खुद पूरा कर रहे छात्र
23-Feb-2025 3:35 PM
साल भर में शिक्षकों को चुनाव करवाने पड़े, अधूरा कोर्स खुद पूरा कर रहे छात्र

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 23 फऱवरी। बलौदाबाजार जिले के सरकारी स्कूलों में कोर्स पहले ही पिछड़ा हुआ था भौतिक संसाधनों के साथ ही शिक्षकों की कमी परेशानी का बड़ा कारण रहा है ऐसे में चुनावी वर्ष होने की वजह से शिक्षकों को एक नहीं बल्कि चार-चार चुनाव करने पड़े जिसकी वजह से शिक्षकीय कार्य काफी प्रभावित रहा। कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा एक और तीन मार्च से शुरू हो तो हो रही पर 75 फिसड्डी स्कूलों में कोर्स पूरा हुआ ही नहीं है ऐसे में स्टूडेंट्स की चिंता बढ़ गई है। वे खुद ही कोर्स पूरा करने जुटे हैं। दूसरी तरफ शिक्षकों और छात्रों पर बेहतर परिणाम देने का दबाव है।

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से मान्यता प्राप्त स्कूलों को साल भर में 220 दिन क्लास लगाना अनिवार्य है। इसके लिए हर साल शासन की ओर से निर्देश जारी किए जाते हैं लेकिन इस साल स्कूलों में सिर्फ 185 दिन ही क्लास लगाई जा सकी है बाकी के 35 दिन छात्रों की क्लास नहीं लगी है।

10वीं 12वीं के 28 हजार 407 विद्यार्थी होंगे परीक्षा

जिले के सरकारी स्कूलों में बोर्ड के छात्र-छात्राओं को चिंता इस बात की सता रही है कि जब कोर्स पूरे हुए ही नहीं तो परीक्षा कैसे दें। कक्षा दसवीं में इस बार 17 हजार 347 व 12वीं में 11 हजार 354 परीक्षार्थियों सहित कुल 28 हजार 407 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। इसके लिए जिले भर में पनगांव, जांगड़ा व अकलतरा के तीन नए केदो सहित 119 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं इन केदो में परीक्षा तो होगी पर ज्यादातर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी चिंतित इसलिए है क्योंकि कई स्कूलों में पूरे वर्ष शिक्षकों की कमी रही वहीं अधिकांश स्कूलों में कोर्स पूरा नहीं हो पाया है। यह बात शहर के स्कूलों के शिक्षकों और छात्रों के नाम न छापने के आग्रह के साथ बताई है।

220 दिन के हिसाब से ही तय किए गए हैं पाठ्यक्रम

ज्यादातर स्कूलों में सिलेबस पूरा नहीं किया जा सकता है। 1 मार्च से बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होने वाली है। कई ऐसे विषय भी होंगे जिन्हें बिना पढ़े ही छात्र परीक्षा देने पहुंचेंगे। जबकि 220 दिन के हिसाब से ही छात्रों का सिलेबस बनाया गया है। अनिवार्य रूप से स्कूल संचालित नहीं होने के पीछे यह बातें सामने निकल कर आ रही है। कि कई ऐसे त्योहार हैं जिसमें स्कूलों को छुट्टी दी जा रही है।

स्कूल बनाए गए मतदान केंद्र, पढ़ाई पर पड़ा असर

चुनाव के दौरान कई स्कूलों को मतदान केंद्र बनाया गया जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई। मतदान से एक दिन पहले ही कक्षाएं बंद कर दी गई या सिर्फ औपचारिक रूप से चली। चुनावी तैयारी के लिए स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया गया जिससे छात्रों को पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल नहीं मिला। शिक्षकों और छात्रों को असुविधा हुई जिससे पाठ्यक्रम भी प्रभावित हुआ।

कलेक्टर ने पाठ्यक्रम पूरा करवाने कहा था

कलेक्टर दीपक सोनी ने बीते दिनों जिले के सभी स्कूलों को समय पर सिलेबस पूरा करने और अन्य निर्देश दिए हैं ताकि रिजल्ट् बेहतर हो सके लेकिन कहां जा रहा है कि जब समय ही प्राप्त नहीं बचा तो कैसे टारगेट पूरा किया जाए। बच्चे अब खुद ही पढ़ाई कर रहे और ट्यूशन का सहारा लेकर अपना सिलेबस पूरा कर रहे हैं।

दिक्कतों का समाधान किया जा रहा है -डीईओ

जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती का कहना है कि चुनावी वर्ष के चलते हमने पहले ही कोर्स पूरा करने के प्रयास किए थे। जिसमें हम सफल हुए विद्यार्थियों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। जिनको किसी प्रकार की समस्या आ रही है उनका समाधान शिक्षकों द्वारा किया जा रहा है।


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