विचार / लेख

लक्ष्मी के गाइड की मुट्ठी में बिजली
16-Nov-2020 4:09 PM
लक्ष्मी के गाइड की मुट्ठी में बिजली

-प्रकाश दुबे

पौराणिक काल में देवी-देवता पशु-पक्षी से वाहन और गाइड दोनों का काम चलाते रहे। कलयुग में रिवाज़ बदला। लक्ष्मी पुत्र और लक्ष्मी वाहन में होड़ लगी। लक्ष्मी पुत्रों की राह आसान करने की योजनाएं फुर्ती से साकार होती हैँ। बरसों से केन्द्र सरकार पूरे देश में बिजली वितरण निजी क्षेत्र को देने के लिए बेताब है। कुछ राज्यों ने लागू किया। नौकरशाह से मंत्री बने आर के सिंह के ताजा फरमान के बाद एक के बाद एक सारे केन्द्रशासित क्षेत्रों में बिजली वितरण निजी हाथों में चला जाएगा। जम्मू-कश्मीर से लेकर काला पानी कहलाने वाले अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तक कतार में हैं। 2022 के गणतंत्र दिवस पर कुछ केन्द्रशासित क्षेत्रों में निजी कंपनिया बिजली की बागडोर संभालते नजऱ आ सकती हैं। बिजली-वितरण का दायित्व संभालने वाले सुपात्र चुनिंदा हैं। दो चार बड़े नाम जगजाहिर हैं। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर आर्थिक राजधानी मुंबई तक उनका कारोबार जगमग हो रहा है। लक्ष्मी से पहचान पुरानी है।

बापू की मूरत

राष्ट्रीय स्तर पर मोठा भाई जिस तरह के काम को अंजाम देने की अमित प्रवीणता दिखा चुके हैं, वहीं काम ईशान्य भाग में केन्द्रीय गृह मंत्री हिमांत विश्व शर्मा से करवाते हैं। असम में स्वास्थ्य सहित कुछ महकमों के मंत्री हिमांत का मुख्य काम पूर्वोत्तर के राज्यों में सरकारें बनाना, बचाना, तोडक़र फिर बनाना है। परीक्षा में बार बार महारत दिखाने पर असम के मुख्यमंत्री से अधिक धाक है। अर्धांगिनी टीवी चैनलों की स्वामिनी हैं। काम, नाम, नामा सब कुछ है। हैदराबाद में जन्मी एमआइएम की रिश्ते में बहन असम में भी है। नाम है-आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट। अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल का मुंबई में इत्र का कारोबार है। अजमल असम में वह करिश्मा करने राजी नहीं हो रहे हैं, जो एमआइएम के ओवैसी ने महाराष्ट्र और बिहार के चुनाव में कर दिखाया।। इसके बावजूद अजमल ने हिमांत बाबू के बापू की याद में आलीशान अस्पताल बनाने की पेशकश की। अजमल की शर्त है कि स्वास्थ्य मंत्री असम राज्य में किसी भी जगह 150 बीघा जमीन दिला दें। मैं एक अरब यानी सौ करोड़ रुपए लागत का सर्वसुविधा युक्त अस्पताल हमांत के पिता के नाम पर बना दूंगा। इतना अहसान? अजमल मानते हैं कि असम सरकार के निकम्मेपन के लिए शर्मा जिम्मेदार हैं। इसलिए-मंत्री की कुर्सी और धर्म के आधार पर लोगों को बांटना छोडें़।

लखटकिया बखेड़ा

तेलंगाना में भाजपा के रघुनंदन राव की विधानसभा उपचुनाव में जीत मुख्यमंत्री को मुंह पर थप्पड़ जैसी लगी। जीत के बाद रघुनंदन जेल जाना नहीं भूले। राव ने जेल में आठ बंदियों से मुलाकात की। पुलिस ने 18 लाख रुपए छीनकर भागने के आरोप में उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। प्रचार के दौरान पुलिस ने राव के ससुर के घर छापा मारा। 18 लाख रुपए बरामद किए। पुलिस का आरोप है कि उम्मीदवार राव के उकसाने पर अभियुक्त धनराशि छीन कर भागे। चंद्रशेखर राव की पुलिस चाहकर रघुनंदन राव पर हाथ नहीं डाल सकी। राव के खिलाफ प्राथमिकी यानी एफआइआर दर्ज करने की पुलिस की मांग पर उच्च न्यायालय ने फैसला टाला। कहा-नवनिर्वाचित प्रतिनिधि के बारे में मुख्य न्यायाधीश सुनवाई करें। हालांकि राव तब उम्मीदवार थे, निर्वाचित बाद में हुए।

सादा जीवन उच्च विचार

बिहार में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन की जीत मायने रखती है। कर्नाटक और मध्य प्रदेश में विधायकों के पाला बदलने और राजस्थान में पाला बदलने का इरादा बदलने के बाद हालात संगीन थे। बिहार में सरकार की संभावना से नाक बची। कन्हैया कुमार समेत जेएनयू के छोकरों ने बिहार में नाक में दम ला दिया। गांव-देहात जाकर प्रचार करते कि दिल्ली पुलिस मारपीट करती है। जेल भेजती है। धुर वामपंथी कब्जे वाले जेएनयू में सरकार ने लगभग पूरा प्रशासन बदल डाला। जीत के जोश से लबालब प्रधानमंत्री ने जवाहर लाल नेहरू विवि का रुख किया। जेएनयू के अहाते में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि स्वामी सजधज और दिखावे पर ध्यान नहीं देते थे।  स्वामी के जीवन से सादगी अपनाने की सीख दी। जेएनयू के विद्यार्थी फैशन के फेर में नहीं पड़ते। उनका फलसफा और संत-सूफीयाना रहन सहन अफैशन कहा जा सकता है। महामारी के प्रकोप के कारण प्रधानमंत्री तकनीक के सहारे सीख दे रहे थे। विद्यार्थी मौजूद होते तो प्रधानमंत्री की नेक सलाह का अधिक असर होता। दिखावे से बचने की प्रधानमंत्री की सीख पर समाज के अनेक लोगों का ध्यान देना बेहतर होगा।

(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)


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