विचार / लेख
-हाफीज किदवई
क्या इस फाइल में नाम आने भर से आप यौन अपराधी बन जाते हैं, नही मगर आप संदिग्ध जरूर हो जाते हैं। यह नाबालिग बच्चियों के साथ यौन अपराध ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की डील की भी कलाई खोलती हैं। कैसे बड़े बड़े राष्ट्राध्यक्ष अपने मतलब की डील व्यापारियों से करते,उसके बदले क्या लेते, क्या देते और कैसे चारा बनती कम उम्र की लड़कियां। यह फाइल हमारे दौर के सबसे घिनौने दस्तावेज में से एक है।
एपस्टीन फ़ाइल का इंतेज़ार तो सबको था। लाख के करीब तस्वीरों में से अभी सौ भी बाहर नही आई हैं कि दुनिया में हलचल मच गई थी। अब तो लाखों दस्तावेज़ ईमेल बाहर आ रहे हैं। कितने ही शराफत के पर्दे उतर रहे हैं। इसमें नाम भर आ जाना आपको घिनौनेपन के सन्दिग्ध पिंजड़े की तरफ ढकेल देगा। हो सकता है कि यह नाम गुनहगार न हों मगर धुआं तो वहीं होगा,जहां आग होगी । सब कुछ जब तक स्पष्ट नहीं हों जाता,क्लीनचिट के सर्टिफिकेट भी नही बाटे जा सकते। जेफरी एपस्टीन के साथ किया गया संवाद,कालिख़ पोतने के लिए काफी है।
जेफरी एपस्टीन एक ऐसा अपराधी जिसका होना कथित सभ्य, अमीर, अरबपति, नेता, लेखक, विचारकों के बुरे कामों पर पर्दा था। मगर यह पर्दा उतरा कैसेअगर यह जानिएगा, तो समझियेगा की पत्रकारिता क्या चीज़ होती है।
आज दुनिया को पत्रकार जूली के ब्राउन का शुक्रिया कहना चाहिए, जिन्होंने मियामी हेराल्ड में एपस्टीन के अपराध को खोजी पत्रकारिता की सिलसिलेवार सीरीज में प्रकाशित किया। जिसके सामने व्हाइट हाउस को झुकना पड़ा और दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति को हस्ताक्षर करने पड़े, जो एपस्टीन फाइल को दबाए बैठे थे।
जूली के ब्राउन ने अपने सिलसिलेवार कॉलम को किताब की शक्ल में भी सामने रखा। उनकी रिपोर्ट पर बातें हुईं,कोर्ट ने वह दरवाज़ा खोलने का आदेश दिया, जिसके पीछे अथाह स्याही पड़ी है।
जेफरी एपस्टीन वह हैवान था,जो नाबालिग उम्र की लड़कियों को फंसाकर यौन अपराध में उन्हें ढकेलता था। उसके कस्टमर थे दुनिया के रईस व्यापारी,उद्योगपति, नेता,अभिनेता वगैरह। यह बच्चियों को नोचते थे। यह इतने घिनौने हैं कि इन्हें कोई नजदीक न बैठाए मगर इनके पैसों की ताकत के सामने सब चुप रहेंगे।
एपस्टीन फाइल में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण करने वालों की तस्वीरें हैं। एक पत्रकार ने किस मुश्किल से यह काम अंजाम दिया होगा। जबकि ख़ुद जेफरी एपस्टीन जेल में ही सन 2019 में सन्दिग्ध अवस्था में मरा हुआ मिला। मगर जुली के ब्राउन ने हिम्मत नहीं हारी और न ही मियामी हेराल्ड ने, दोनों ने उनको भी बेनकाब करने की कोशिश करी, जो बच्चियों को अपने पैसे या किसी डील की एवज में मांगते थे।
एपस्टीन फाइल उन अदालतों में दर्ज दस्तावेज़ों, गवाहियों, ई-मेल, फ्लाइट लॉग्स और बयानों का सामूहिक नाम है, जो अमेरिकी अरबपति जेफ्री एपस्टीन के यौन शोषण और से क्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क से जुड़े हैं। इस पूरे मामले को दुनिया के सामने लाने में सबसे अहम भूमिका निभाई मियामी हेराल्ड और उसकी खोजी पत्रकार जूली के. ब्राउन ने.
2018 में जूली के. ब्राउन की जाँच रिपोर्ट ‘क्कद्गह्म्1द्गह्म्ह्यद्बशठ्ठ शद्घ छ्वह्वह्यह्लद्बष्द्ग’ ने यह उजागर किया कि कैसे एपस्टीन को 2008 में बेहद हल्की सज़ा दी गई थी और कैसे अभियोजन एजेंसियों ने पीडि़त लड़कियों को अनदेखा किया। इसी रिपोर्ट के बाद अमेरिकी न्याय व्यवस्था पर दबाव बढ़ा और मामला दोबारा खुला। यही वह मोड़ था, जहाँ से एपस्टीन फ़ाइलें सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनीं।
दरअसल, सालों तक एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज अदालतों में सीलबंद रखे गए थे। मियामी हेराल्ड और पीडि़तों के वकीलों ने अदालत में याचिकाएँ दायर कर यह सवाल उठाया कि न्याय के नाम पर सच्चाई को क्यों छिपाया जा रहा है। इसी दबाव के चलते 2023-24 में अमेरिकी अदालतों ने कई दस्तावेज सार्वजनिक करने का आदेश दिया। इन्हीं को आज ‘एप्सटीन फाइल’ कहा जाता है।
इन फाइलों में राजनेताओं, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों और प्रभावशाली हस्तियों के नाम सामने आए। हालांकि, जैसा कि मियामी हेराल्ड ने बार-बार जोर देकर लिखा किसी फ़ाइल में नाम आना, अपराध साबित होना नहीं है। लेकिन यह ज़रूर दिखाता है कि सत्ता और पैसे के गलियारों में एपस्टीन की पहुँच कितनी गहरी थी।
एपस्टीन फाइल, जैसा कि जूली के. ब्राउन लिखती हैं, सिर्फ एक अपराधी की कहानी नहीं है यह उस व्यवस्था का आईना है, जहाँ ताकतवर लोग अक्सर जवाबदेही से बच निकलते हैं।
जो पत्रकारिता इन्होंने करी और जिस तरह व्हाइट हाउस की कॉंग्रेस में इस फाइल को जनता के सामने खोलने की मंजूरी दी। वह क़ाबिल ए तारीफ है । केवल एक वोट विपक्ष में पड़ा वरना दोनों ही दलों, डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन ने मिलकर इसे सार्वजनिक करने के लिए वोट किया, तभी यह फाइल पब्लिक में है ।
अभी बहुत तस्वीरें बाकी हैं, बहुत से नकाब उतरने हैं । पैसे पॉवर की डील में लड़कियों के इस्तेमाल की दास्ताने खुलनी हैं। बेचारी बच्चियों को इस घिनौने खेल में घुसेडऩे के लिए जितना जेफरी दोषी था, उतने ही यह लोग भी, इसलिए इन सबकी जगह आजीवन कैद ही है।
फिलहाल मियामी हेराल्ड और जूली के ब्राउन जैसी पत्रकार और पत्रकारिता की तारीफ करने का वक़्त है। यह समझने का भी दुनिया की बड़ी बड़ी डील किन घिनौने रास्ते से होकर गुजऱती हैं। यह भी जानने का है कि जेफरी एप्सटीन जैसे लोगों को सिस्टम कैसे पैदा करता है और कैसे मार देता है । यहाँ मौजूद हर व्यक्ति किसी न किसी मकसद से एप्सटीन से जुड़ा था और चारा थी कमउम्र बच्चियां।
तस्वीरों में शामिल होने से यौन अपराध भले न साबित हो मगर यह तो साबित ही होता है कि कोई डील तो चल रही थी ।।वह डील किसी देश का खनिज हो सकता है, ठेका हो सकता है, प्रोजेक्ट हो सकता है मगर जो भी हो,एक पक्ष बड़ा घिनौना है, इसलिए एप्सटीन फाइल पर नजऱ रखिये और देखिए कि इसमे शामिल लोगों ने मुँह पर डॉलर चिपका कर कितने घिनौने काम अंजाम दिए।(तर्कशील सोसाइटी)


