विचार / लेख

निशिकांत दुबे से लेकर नेहरू-एडविना, और अटल-राजकुमारी कौल तक...
05-Feb-2026 10:13 PM
निशिकांत दुबे से लेकर  नेहरू-एडविना, और  अटल-राजकुमारी कौल तक...

तस्वीर में नेहरू, एडविना और पामेला।


-पुष्य मित्र का लिखा

चचेरे-ममेरे भाई बहनों के बीच प्रेम या विवाह उत्तर भारतीय हिंदू समाज की नैतिकता में भले ही फिट नहीं बैठता हो, मगर यह कोई अपराध नहीं अगर बालिग अवस्था में आपसी सहमति से किया गया हो। उसी तरह विवाहेतर प्रेम संबंध भले ही कानूनन ठीक नहीं हो, मगर इस मामले में भी हमें समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया के उस विचार तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए, जिसमें वे कहते हैं कि दो बालिग स्त्री पुरुष बंद कमरे में आपसी सहमति से जो कुछ करते हैं, उसमें कुछ अनैतिक नहीं है। इन दोनों मामलों में मूल बात आपसी सहमति और प्रेम है।

इसलिए सांसद निशिकांत दुबे के विवाह पर भी सवाल नहीं उठने चाहिए और नेहरू-एडविना प्रेम संबंधों पर भी। हमारे देश में तो अटल बिहारी वाजपेयी और मिसेज कौल के प्रेम संबंध की बेहतरीन मिसाल है। वह संबंध मुझे हमेशा अच्छा लगा।

हां, नेहरू-एडविना के प्रेम संबंधों पर सवाल तब उठ सकते हैं, जब इस संबंध का लाभ ब्रिटिश पक्ष या पाकिस्तान को हुआ हो, भारतीय हितों की बलि दी गई हो।

इन दिनों मैं न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार डीक्लान वाल्स की किताब द नाइन लाइव्स ऑफ पाकिस्तान पढ़ रहा हूं। इस किताब के हिसाब से पाकिस्तान के लोग मानते हैं कि नेहरू-एडविना प्रेम संबंध का लाभ भारत को हुआ। इसी वजह से पंजाब और बंगाल प्रांत आधा-आधा बंटा। नहीं तो वाजिबन दोनों राज्य पूरे के पूरे पाकिस्तान को मिलने चाहिए थे।

उस वक्त माउंटबेटन के प्रेस अटैची एलन कैम्पबेल और एडविना की बेटी पामेला ने जो लिखा है, उस लिहाज से सच यह है कि माउंटबेटन और नेहरू पहली ही मुलाकात से एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। इसी मुलाकात में भावुक होकर माउंटबेटन ने नेहरू से कह दिया था कि वे उन्हें आखिरी ब्रिटिश वायसराय के रूप में न देखकर नये भारत के पहले वायसराय के रूप में देखें। जवाब में नेहरू ने कहा, अब समझा लोग आपको इतना खतरनाक क्यों कहते हैं?

जबकि जिन्ना से मिलकर माउंटबेटन की राय अच्छी नहीं बनी। मिलकर उन्होंने प्रतिक्रिया दी, ‘वह तो बर्फ से भी ज्यादा ठंडे हैं, आधा वक्त तो उनको पिघलाने में गुजर जाता है।’ जिन्ना के बारे में ऐसी राय कई लोगों की थी। उनकी एक महिला मित्र तो मजाक में कहती थीं, ‘वे इतने ठंडे हैं कि मुझे उनके पास शॉल ओढक़र बैठना पड़ता है।’ आगे भी जिन्ना से माउंटबेटन की बातचीत हमेशा तनावपूर्ण माहौल में टकराव भरी ही रही। निश्चित तौर पर इस वजह से माउंटबेटन भारत के पक्षधर बने रहे और आजादी के बाद भी लंबे अरसे तक भारत में रहे। माउंटबेटन और एडविना दोनों के संबंध नेहरू से बहुत सहज और मित्रवत थे।

 

एडविना से तो नेहरू की नजदीकियां बढ़ती गईं। इतनी की माउंटबेटन ने खुद कहा था, ‘दोनों एक-दूसरे के साथ कितने अच्छे लगते हैं। ऐसा लगता है कि दोनों प्रेमी हैं।’ दरअसल इन दोनों की नजदीकियों से माउंटबेटन को किसी तरह की जलन या असहजता नहीं थी, क्योंकि माउंटबेटन और एडविना एक अरसे से ओपन रिलेशनशिप में थे। दोनों के अलग-अलग लोगों के साथ कई संबंध रहे। मगर जिस तरह की नजदीकी एडविना और नेहरू के बीच रही, उसे न सिर्फ माउंटबेटन बल्कि पामेला भी प्यार से याद करती हैं। हालांकि पामेला ने यह भी कहा कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध कभी नहीं बने, क्योंकि कभी दोनों अकेले में मिल ही नहीं पाये।

हां, इस नजदीकी का यह अर्थ कतई नहीं है कि माउंटबेटन ने इसके बदले नेहरू से ब्रिटिश हित में रियायतें हासिल कर ली हो। मई में जब ब्रिटेन से भारत की आजादी का प्रस्ताव संशोधित होकर आया तो नेहरू ने माउंटबेटन के सामने उस पर सख्त आपत्ति की। क्योंकि नेहरू चाहते थे कि भारत की पहचान एक मुल्क के तौर पर हो और पाकिस्तान अलग देश बने तो बने। यह सैद्धांतिक रूप से गलत होगा कि भारत और पाकिस्तान दो नये मुल्क बन रहे हैं। क्योंकि भारत तो हमेशा से एक मुल्क है। बाद के दिनों में ऐसे कई मौके आये। इसलिए यह कहना गलत होगा कि नेहरू अपने प्रेम संबंध की वजह से भारत के हितों की रक्षा में कमजोर पड़े। वैसे भी माउंटबेटन को अकेले नेहरू से डील नहीं करना था। उन्हें हर बात गांधी और पटेल को भी समझानी होती थी। दोनों माउंटबेटन के प्रभाव में नहीं थे। कम से कम गांधी से तो माउंटबेटन आखिर तक डरते रहे। बंटवारे के फैसले के बाद भी उन्हें लगता था कि गांधी कोई आंदोलन न छेड़ दें।

ऐसे में नेहरू-एडविना संबंध को लेकर निशिकांत दुबे को ऐसे छिछोरे बयान नहीं देने चाहिए। उसी तरह प्रदीप यादव को भी निशिकांत दुबे के व्यक्तिगत जीवन के प्रसंग नहीं उछालने चाहिए। ये सब बिल्कुल व्यक्तिगत रिश्ते हैं। हाल-हाल तक भारत की राजनीति की यह तहजीब रही कि नेता पर्सनल रिश्तों को उछालने से बचते थे। कांग्रेस ने कभी न अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्तों पर सवाल उठाया, न जार्ज फर्नांडीज के रिश्तों पर।


अन्य पोस्ट