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भागवत के बयान से बवाल : खफ़ा तोगड़िया ने किए सवाल ?
08-Jul-2021 10:47 PM
भागवत के बयान से बवाल : खफ़ा तोगड़िया ने किए सवाल ?

-सुसंस्कृति परिहार

विगत दिनों आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गाजियाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू-मुस्लिमों के पूर्वजों को एक बताते हुए कहा था कि हिंदू-मुस्लिमों की पूजा-पद्धति आज भले ही अलग हो गई है, लेकिन दोनों के पूर्वज एक थे, दोनों का डीएनए एक है। उनके इस बयान के बाद संघ के अनुषंगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त नाराज़गी है। अनुशासन की तलवार उनकी गर्दन पर लटकी हुई है इसलिए प्रतिरोध के स्वर उभरकर सामने नहीं आ रहे हैं बैचेनी इस हद तक है कि वे इस डी एन ए को गंवारा करने की बजाय संघ से पंगा लेने की मन:स्थिति में हैं। राजनैतिक हलकों में इसे कूट संघीय चाल माना जा रहा है जिसे अमूमन भारत के तमाम सेकुलर दल भली-भांति जानते और समझते हैं।

इस खलबली के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक के एक स्वयंसेवक के रूप में अपनी पारी शुरू कर विश्व हिंदू परिषद का 32 वर्ष नेतृत्व करने वाले प्रवीण भाई तोगड़िया ने बड़ी दिलेरी के साथ मोहन भागवत के इस बयान को हिंदू समाज को दिग्भ्रमित करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुसलमान के पूर्वज एक हैं, तो क्या महाराणा प्रताप, शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह की लड़ाई गलत थी, जिन्होंने अपनी धर्म रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दिए? मोहन भागवत के 'मॉब लिंचिंग' पर दिए बयान पर उन्होंने कहा कि आज तक भारत के किसी भी राजनीतिक दल ने गौरक्षा करने वालों को आतंकी नहीं कहा, लेकिन मोहन भागवत के बयान से यही इशारा होता है। उन्होंने कहा कि अगर गौरक्षा करने वाले आतंकी हैं तो मोहन भागवत को बताना चाहिए कि क्या आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के कैंपों में आज तक 'आतंकी' तैयार किये जा रहे थे जो गौरक्षक बनकर गायों को बचाने का काम कर रहे थे। उन्होंने गौरक्षकों को अपराधी समझने की बात का विरोध किया और कहा कि आरएसएस के सभी नेता गौरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग करते रहे हैं। आज जब केंद्र में आरएसएस समर्थित भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है, आज गौरक्षा का केंद्रीय कानून क्यों नहीं बनाया जा रहा है?

तोगड़िया ने हिंदू-मुस्लिमों के पूर्वजों को एक बताने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह, महाराजा रणजीत सिंह, महाराणा प्रताप, शिवाजी और धर्म न बदलने के कारण अपनी जान गंवाने वाली हरियाणा की बेटी निकिता तोमर जैसे लोग उनके पूर्वज हैं, लेकिन वे लोग उनके पुरखे नहीं हैं जो हिंदुओं के धर्मांतरण के अपराधी रहे हैं, जिन्होंने अपनी तलवार के दम पर निरपराध लोगों का जबरन धर्मांतरण कराया।

उन्होंने कहा कि इस तरह की बात केवल हिंदू समुदाय मानता है, अगर मुस्लिम समुदाय भी इसी तरह सबको एक समान मानता तो कश्मीर में लाखों हिंदुओं का कत्ल और पलायन नहीं होता। उन्होंने कहा कि भाईचारे की जिम्मेदारी सब धर्मों पर एक समान लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हम सभी लोगों को अपना पुरखा मानने लगेंगे, तो क्या अब हिंदुओं को औरंगजेब, मुहम्मद गौरी और गजनी का भी श्राद्ध-तर्पण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे लोगों का तर्पण होगा तो उनका गोत्र क्या बताना होगा, यह भी बताना चाहिए।

तोगड़िया ने पूछा कि अगर शिवाजी-महाराणा प्रताप मुगलों से लड़ रहे थे तो क्या वे गलत कर रहे थे? क्या उन्हें इन लोगों से लड़ना नहीं चाहिए था, बल्कि उनसे अपनी बहन-बेटियों की शादी कर देनी चाहिए थी क्योंकि (मोहन भागवत के बयान के अनुसार) वे भी एक ही वंशज के पत्र थे। उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान केवल हिंदू समाज को दिग्भ्रमित करने की कोशिश है।

 भागवत के इस बयान के बाद सियायी पारा एकदम से चढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भागवत ने अपने बयान से हिंदुत्व के दार्शनिक आधार को व्यापक रूप दिया।बसपा सुप्रीमो मायावती ने संघ प्रमुख के बयान ' को मुंह में राम, बगल में छुरी' की तरह है. उन्होंने कहा, भागवत देश की राजनीति को विभाजनकारी बताकर कोस रहे हैं, वह ठीक नहीं है. सच्चाई तो यह है कि जिस बीजेपी और उसकी सरकारों को वह आंख बंद करके समर्थन देते चले आ रहे हैं, उसी का परिणाम है कि जातिवाद, राजनीतिक द्वेष और सांप्रदायिक हिंसा का जहर सामान्य जनजीवन को त्रस्त कर रहा है.ओवैसी ने भी अपने ट्वीट में लिखा, 'आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी। इन अपराधियों को गाय और भैंस में फर्क नहीं पता होगा, लेकिन कत्ल करने के लिए जुनैद, अखलाक, पहलू, रकबर, अलीमुद्दीन के नाम ही काफी थे। ये नफरत हिंदुत्व की देन है, इन मुजरिमों को हिंदुत्ववादी सरकार की पुश्त पनाही हासिल है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भागवत के बयान पर पलटवार किया। दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर पूछा, ''मोहन भागवत यह विचार क्या आप अपने शिष्यों, प्रचारकों, विश्व हिंदू परिषद/ बजरंग दल कार्यकर्ताओं को भी देंगे? क्या यह शिक्षा आप मोदी-शाह व भाजपा मुख्यमंत्री को भी देंगे?"

महज एनसीपी ने किया भागवत के बयान का स्वागत किया है लेकिन उसमें गहरा तंज है एनसीपी नेता नवाब मलिक ने संघ प्रमुख के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''मोहन भागवत का बयान कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है। अगर भागवत जी का हृदय बदल रहा है तो हम उसका स्वागत करते हैं। वर्ण व्यवस्था में विश्वास करने वाला संगठन अगर धर्म की हदों को तोड़ना चाहता है तो ये अच्छी बात है।''
 
वस्तुत:यह अल्पसंख्यक समुदाय को रिझाने का एक सोचाा समझा शातिराना फार्मूला है लेकिन यह चलने वाला नहीं है क्योंकि संघ के अंदर सेे ही विद्रोह पनपना शुरू हो गया है।


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