विचार / लेख
-कनुप्रिया
2019 के चुनाव के बाद मोदी जी ने कहा था कि हमारे पिछले 5 साल तो 70 साल के गड्ढे भरने में ही निकल गए। असल काम तो हम अब करेंगे। उसके बाद क्या असल काम किया वो हमें मालूम ही है।
ये 70 साल का रोना पिछले 7 साल में बहुत सुना है, 70 में इतना खराब हुआ, 70 साल की व्यवस्था है अकेले मोदी क्या करेंगे, 70 साल में देश बर्बाद हुआ, तब सोचती हूँ जो मोदी नेहरू से इतनी हसद रखते हैं कि उनकी भौंडी नकल करते हैं, जिन्हें नेहरू से बड़ा कद करने की इतनी हसरत है कि ख़ुद को बहुत से मायनों में पहला प्रधानमंत्री कहते हैं, जो अपनी हर नाकामी का ठीकरा नेहरू पर फोड़ते हैं, जिन्होंने नेहरू की कमियाँ गिनाने में ही 7 साल खर्च कर दिए, उनसे कोई पूछे कि नेहरू से तुलना ही करनी है तो बताइए कि नेहरू को कैसा भारत मिला था।
बकौल खुद संघियों के नेहरू को मिला था 1000 की ग़ुलामी से निकला भारत, 200 साल अंग्रेजों द्वारा बुरी तरह लूटा गया, भयानक अकालों से गुजऱा भारत। वो भारत तो विघटन के जख्म सहला रहा था, एकता के सूत्र ढूँढ रहा था, बना रहा था, जो इतिहास के सबसे बुरे दंगे झेलकर निकला था, साम्प्ररदायिकता और अविश्वास के चरम पर था, संविधान बन रहा था, खजाना खाली था, गरीबी और अशिक्षा फैली हुई थी। चर्चिल ने तो पहले ही संदेह जता दिया था कि इन भारतीयों के बस का कुछ नहीं, चुनौतियाँ आज से कहीं ज़्यादा थीं और कहीं बड़ी थीं, ऐसा भारत मिला था जो नेहरू के नेतृत्व में धीरे धीरे राष्ट्रनिर्माण की ओर बढ़ा, साम्प्रदायिकता पर काबू करके अंदरूनी शांति बहाल हुई, शांति में ही विकास होता है, और इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञान, तकनीक, कला, फिल्म, साहित्य, खेल सबमे धीरे-धीरे विकास करते हुए राष्ट्रीय-अन्तराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति में पहुँचा।
नेहरू के पास कोसने को बहुत लोग थे, रोने को बहुत कुछ था, मगर न अकेले पड़े न अकेले काम किया,।उन्होंने बढिय़ा टीम बनाई, लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण किया, आलोचनाओं का मुँह बन्द नही किया, चुनौतियों का सामना किया, न जवाबदेही से मुँह मोड़ा, न बहाने बनाए न अपनी विफलताओं का ठीकरा फोड़ा। जिसे वाकई राष्ट्र निर्माण करना होता है वो 70 साल क्या 700 साल को भी नहीं रोता। ये नेहरू की पनपाई सम्पदा ही थी जिसे बेच-बेचकर मोदी अपने लिए नया घर, सेंट्रल विस्ता और 8000 करोड़ के विमानों की।
अय्याशियाँ भोग रहे हैं। हाल ये है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर दो-दो बार बदले गए और ऐसा आदमी गवर्नर बनाया गया जो अर्थशास्त्री भी नहीं है ताकि सारा रिजर्व धन अपने और अपने मालिकों के लिए निकाला जा सके। ये जाएँगे तो देश कितना उजाड़ होगा कल्पना भी नही की जा सकती।
तो मोदीजी तो पिछले क्या आगे के कई साल भी नेहरू को कोसकर निकाल सकते हैं, अपनी जाहिलियत, अक्षमताओं, गैरजिम्मेदारी और कमजोरी का ठीकरा नेहरू पर, विपक्ष पर, जनता पर, राज्यों पर फोड़ सकते हैं। मगर जिन्हें वाकई राष्ट्र निर्माण करना होता है वो वही करते हैं, हर हाल में करते हैं, सफलता का सेहरा और विफलताओं के लिए सर नहीं ढूँढते।
मोदी के पास शुक्र है कि नेहरू हैं, नेहरू के पास कोई नेहरू नहीं था।


