सरगुजा

रिंग बांध तालाब सिमटी, फर्जी दस्तावेजों से नामांतरण का आरोप
26-Apr-2026 9:25 PM
रिंग बांध तालाब सिमटी, फर्जी दस्तावेजों से नामांतरण का आरोप

एक व्यक्ति के दो मृत्यु प्रमाण पत्र, जांच व एफआईआर की मांग

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अंबिकापुर, 26 अप्रैल। नगर निगम क्षेत्र के मास्टर प्लान 2021 में दर्ज तालाबों के रकबे में लगातार हो रही कमी और जलाशयों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर नया विवाद सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने रिंग बांध तालाब सहित अन्य जलाशयों के जलभराव क्षेत्र में कथित गड़बड़ी और फर्जी नामांतरण का आरोप लगाते हुए कलेक्टर सरगुजा से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

रविवार को स्थानीय सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि करीब 6.25 एकड़ में फैला रिंग बांध तालाब अब सिमटकर लगभग 57 डिसमिल तक रह गया है। उनका आरोप है कि जनवरी 2026 में शेष भूमि की भी रजिस्ट्री कर दी गई और तालाब के बड़े हिस्से को रातों-रात पाट दिया गया। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर संदिग्ध नामांतरण निरस्त करने तथा दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

प्रेस वार्ता के दौरान मिश्रा ने दस्तावेजों के आधार पर कई अनियमितताओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार सरगुजा सेटलमेंट के रिकॉर्ड में खसरा नंबर 3714 की भूमि मूल रूप से किशुन बहादुर सिंह के नाम दर्ज थी, लेकिन वर्ष 1982-83 में यह भूमि जयलाल के नाम दर्ज हो गई, जिसकी जांच अब तक नहीं हुई है।

उन्होंने बताया कि एक प्रकरण में आवेदिका ननकी बाई द्वारा प्रस्तुत मृत्यु प्रमाण पत्र में जयलाल की मृत्यु 23 अप्रैल 1976 को होलीक्रॉस अस्पताल में दर्शाई गई है, जबकि यह प्रमाण पत्र वर्ष 2018 में नगर निगम में पंजीकृत हुआ। इसी मामले के दौरान आवेदिका की मृत्यु हो जाने के कारण प्रकरण समाप्त कर दिया गया।

दूसरे प्रकरण में आवेदक चंद्रशेखर यादव द्वारा प्रस्तुत मृत्यु प्रमाण पत्र में जयलाल की मृत्यु 12 अप्रैल 1963 को लखनपुर क्षेत्र में दर्शाई गई है, जबकि यह प्रमाण पत्र 62 वर्ष बाद, 1 सितंबर 2025 को ग्राम पंचायत से जारी किया गया। मिश्रा ने कहा कि एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र सामने आना पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है।

उन्होंने पटवारी और तहसील स्तर पर भी लापरवाही और अनियमितताओं के आरोप लगाए। उनके अनुसार प्रस्तुत वंशवृक्ष में कई खामियां हैं तथा तहसीलदार कार्यालय से जारी पत्रों में तारीख और पत्र क्रमांक तक स्पष्ट नहीं है, जिससे नामांतरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मिश्रा ने मांग की है कि कथित फर्जी फौती नामांतरण को तत्काल निरस्त कर संबंधित भूमि को पुन: तालाब के मूल स्वरूप में लाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो शहर के अन्य जलाशय भी इसी तरह अतिक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने प्रशासन से जलभराव क्षेत्रों के संरक्षण के लिए सख्त कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि जलाशयों की सुरक्षा शहर के भविष्य और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।


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