सरगुजा
पार्षद ने कलेक्टर से की जांच की मांग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 26 अप्रैल। नगर पालिक निगम क्षेत्र में स्थित रिंग बांध जल क्षेत्र को पाटकर अवैध प्लाटिंग की तैयारी का मामला सामने आया है। इस संबंध में पार्षद आलोक दुबे ने कलेक्टर सरगुजा अजीत बसंत को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और जल क्षेत्र को यथास्थिति में बहाल करने की मांग की है।
पत्र में पार्षद ने उल्लेख किया है कि राजस्व निरीक्षक मंडल क्रमांक 04 के अंतर्गत प.ह.न. 15, खसरा नंबर 3714, रकबा 0.25 हेक्टेयर भूमि मूलत: जल क्षेत्र है, जहां वर्तमान में भी 5 से 6 फीट तक पानी भरा हुआ है। नगर निगम के मास्टर प्लान 2021 में यह क्षेत्र शहर के 19 प्रमुख तालाबों की सूची में पांचवें स्थान पर दर्ज है, जिसका कुल रकबा 6.25 एकड़ बताया गया है। पार्षद के अनुसार, रजिस्ट्री से पूर्व तत्कालीन हल्का पटवारी द्वारा तहसीलदार को दिए गए प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख था कि जलभराव के कारण भूमि का सीमांकन संभव नहीं है। इसके बावजूद बिना सीमांकन के ही जमीन की ऑनलाइन रजिस्ट्री कर दी गई, जो गंभीर जांच का विषय है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2009-10 तक यह पूरा क्षेत्र एक विशाल तालाब के रूप में उपयोग में था, जहां स्थानीय लोग निस्तारी, स्नान, पशुओं को पानी पिलाने और अंतिम संस्कार जैसे कार्य करते थे। वहीं, तहसीलदार लखनपुर द्वारा प्रस्तुत वंशावली को भी संदिग्ध बताते हुए कहा गया है कि जमीन बेचने वाले व्यक्तियों का वास्तविक मालिक परिवार से कोई संबंध नहीं है। पार्षद ने आरोप लगाया है कि आजाद इराकी द्वारा इस भूमि पर प्लाटिंग की तैयारी की जा रही है, जो सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का उल्लंघन है। उन्होंने विशेष रूप से 2019 के एक महत्वपूर्ण निर्णय और ‘हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी’ प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि जल स्रोतों के स्वरूप में किसी भी प्रकार का परिवर्तन कानूनन प्रतिबंधित है।पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2002 में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष कमला त्रिपाठी द्वारा इसी स्थल पर छठ घाट का निर्माण कराया गया था। पार्षद ने प्रशासन से मांग की है कि अतिक्रमण हटाकर जल क्षेत्र को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए, ताकि शहर में जल संकट और पर्यावरण असंतुलन की स्थिति उत्पन्न न हो।


