सरगुजा

डॉक्टर-नर्स की गैरमौजूदगी में सफाई कर्मी ने कराया प्रसव!
21-Feb-2026 9:47 AM
डॉक्टर-नर्स की गैरमौजूदगी में सफाई कर्मी ने कराया प्रसव!

नवजात की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

लखनपुर, 20 फरवरी। सरगुजा जिले के कुन्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला का अस्पताल में डॉक्टर और नर्स की अनुपस्थिति में सफाईकर्मी द्वारा प्रसव कराने का प्रयास किया गया, जिसमें नवजात की मौत हो गई। घटना लखनपुर ब्लॉक क्षेत्र की बताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मैनपाट क्षेत्र के ग्राम सुपलगा निवासी गौरी यादव को परिजनों ने 16 फरवरी की रात करीब 11 बजे कुन्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। गौरी यादव पिछले कुछ दिनों से अपने मायके ग्राम जमदरा में रह रही थी। अस्पताल में भर्ती के दौरान न तो डॉक्टर मौजूद थे और न ही नर्स।

बताया जा रहा है कि 17 फरवरी की सुबह करीब 7 बजे अस्पताल के सफाईकर्मी श्यामपति द्वारा प्रसूता का प्रसव कराने का प्रयास किया गया। प्रसव के दौरान बच्चा गर्भ में ही फंस गया। इसकी सूचना मिलने पर डॉ. देव कुमार साहू और नर्स अस्पताल पहुंचे और बच्चे को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक नवजात की मौत हो चुकी थी।

परिजनों का आरोप, स्वास्थ्य विभाग का पक्ष

नवजात की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर और नर्सों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय पर डॉक्टर और नर्स मौजूद होते तो बच्चे की जान बच सकती थी। यह प्रसूता का पहला बच्चा था, जिसका शव कुन्नी में ही दफन कर दिया गया।

वहीं, सरगुजा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी  डॉ. पीएस मार्को ने लापरवाही से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में केवल एक डॉक्टर और एक स्टाफ नर्स उपलब्ध थे, जिनकी ड्यूटी पूरी हो चुकी थी। परिजनों को रात में ही लखनपुर रेफर करने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने सुबह ले जाने की बात कही।

सीएमएचओ ने यह भी कहा कि प्रसूता की गर्भावस्था के दौरान कोई नियमित जांच या सोनोग्राफी नहीं कराई गई थी और बच्चा उल्टा था, जिसकी जानकारी प्रसव के दौरान हुई। उन्होंने इसे अस्पताल स्टाफ की लापरवाही मानने से इनकार किया है।

एक डॉक्टर, एक नर्स के भरोसे अस्पताल

कुन्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक मेडिकल ऑफिसर और चार नर्सें पदस्थ हैं, लेकिन वर्तमान में तीन नर्सें अवकाश पर हैं, जिससे अस्पताल केवल एक डॉक्टर और एक नर्स के भरोसे संचालित हो रहा है।

घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और मामले की जांच की मांग की जा रही है।


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