सरगुजा
246 किसानों के नाम पर जालसाजी उजागर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 12 जनवरी। सरगुजा जिले के केरजु धान खरीदी केंद्र में करोड़ों रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। समिति प्रबंधक पर बैंक प्रबंधन की मिलीभगत से 246 से अधिक किसानों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर करीब 3 करोड़ 46 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराने का आरोप लगा है। किसानों को इसकी जानकारी तब हुई, जब धान बेचने के बाद उनके खातों से अचानक रकम कटने लगी।
किसानों के अनुसार, कुल 246 से अधिक किसानों के नाम पर अलग-अलग राशि के ऋण दर्ज हैं। किसानों ने बताया कि उन्होंने न तो किसी प्रकार का ऋण आवेदन किया था और न ही इसके लिए कोई दस्तावेज जमा किए थे। बैंक स्टेटमेंट और समिति रिकॉर्ड की जांच के दौरान यह स्थिति सामने आई।
किसानों का कहना है कि ऋण की राशि 80 हजार रुपये से लेकर 7.21 लाख रुपये तक दर्ज है। इस संबंध में किसानों ने समिति और बैंक प्रबंधन से जानकारी मांगी।
समिति प्रबंधक की आत्महत्या से गहराया संदेह
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि केरजु समिति के प्रबंधक ने लगभग एक माह पूर्व फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। किसानों को आशंका है कि उसी ने 246 से अधिक किसानों के नाम पर फर्जी लोन पास कर राशि निकाल ली और पकड़े जाने के भय से आत्महत्या कर ली। हालांकि प्रबंधक की आत्महत्या के कारणों की जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई बताई जा रही है।
पैसे कटने के बाद खुलासा
किसानों ने बताया कि 14 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने के बाद जिन किसानों ने धान बेचा, उनके खातों में भुगतान आने के कुछ समय बाद कटौती शुरू हुई। दोबारा खरीदी शुरू होने पर भी कुछ किसानों के खातों से राशि कटी, जिसके बाद किसानों ने केसीसी और बैंक स्टेटमेंट की जांच कराई, जिससे फर्जी लोन का मामला सामने आया।
पढ़े-लिखे किसान और जनप्रतिनिधि भी बने शिकार
घोटाले में केवल अशिक्षित किसान ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे किसान, पटेल और पूर्व जनप्रतिनिधि भी प्रभावित हुए हैं। केरजु निवासी पटेल अजय सिंह के नाम पर पांच लाख रुपये तथा ढोढागांव निवासी पूर्व जनपद सदस्य मोती भगत के नाम पर दो लाख रुपये का फर्जी लोन दर्ज होने की बात सामने आई है।
कलेक्टोरेट पहुंचे सैकड़ों किसान
इस मामले को लेकर सात गांवों के लगभग 360 से अधिक किसान पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और फूलसाय लकरा के साथ कलेक्टोरेट पहुंचे। किसानों ने बिना ऋण लिए खातों से काटी गई राशि वापस दिलाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
कलेक्टर द्वारा किसानों को प्रकरण की जांच कराए जाने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया जारी बताए जाने की बात कही जा रही है।


