सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 11 जनवरी। रोजगार की गारंटी देने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे बदलावों और योजना की मूल भावना को समाप्त किए जाने के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा ने शनिवार को गांधी चौक में एकदिवसीय उपवास एवं धरना प्रदर्शन किया। यह कार्यक्रम कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव एवं छत्तीसगढ़ की सहप्रभारी जरिता लैतफलांग के नेतृत्व में आयोजित किया गया।
कांग्रेस द्वारा घोषित 45 दिवसीय ‘मनरेगा बचाओ संघर्ष’ आंदोलन के तहत देशभर के जिला मुख्यालयों में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम के अंतर्गत अंबिकापुर में भी सुबह 9 बजे गांधी चौक स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उनके चित्र एवं गांधीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। यह उपवास शाम 4 बजे तक चला, जिसका समापन गुड़-चूड़ा ग्रहण कर किया गया।
धरना को संबोधित करते हुए कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव जरिता लैतफलांग ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार मनरेगा को कमजोर कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि देश के लगभग 12 करोड़ पंजीकृत मनरेगा मजदूरों को साल में 50 दिन का भी रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जबकि नई योजना के नाम पर 125 दिन रोजगार का भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन ग्रामीण इलाकों में न नेटवर्क की सुविधा है और न ही पर्याप्त शिक्षा, वहां रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे दावे महज जुमले साबित होंगे।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम से चल रही मनरेगा योजना से उनका नाम हटाने की कोशिश न केवल गांधीजी बल्कि प्रभु राम का भी अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई योजना के जरिए रोजगार की गारंटी को अव्यवहारिक बना दिया गया है और रोजगार की प्रक्रिया से ग्राम पंचायतों को अलग कर पंचायत व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है।
गांधी चौक पर करीब सात घंटे तक चले इस उपवास एवं धरना कार्यक्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमसाय सिंह, अमरजीत भगत सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर उपस्थित रहे। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक मनरेगा की मूल भावना बहाल नहीं की जाती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।


