सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 9 जून। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सूरजपुर ने वर्ष 2021 के चर्चित हत्या प्रकरण में मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास तथा साक्ष्य छिपाने में सहयोग करने वाले सह-आरोपी को 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
प्रकरण के अनुसार 11 सितंबर 2021 को ग्राम बलदेवनगर निवासी मनोज उरांव ने थाना प्रेमनगर में सूचना दी थी कि बांगों बांध के डुबान क्षेत्र छोटे छुरी में पानी के ऊपर किसी व्यक्ति का पैर दिखाई दे रहा है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया, जिसके गले में रस्सी बंधी हुई थी। प्रारंभिक जांच के बाद शव की पहचान सुरेन्द्र यादव निवासी हनुमानगढ़, थाना रामानुजनगर के रूप में हुई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु को हत्यात्मक पाए जाने पर थाना प्रेमनगर में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध धारा 302 एवं 201 भादवि के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक 5 सितंबर 2021 को अपने बहनोई सुखसाय उर्फ गंवटिया बरगाह के साथ विध्यांचल गया था। पूछताछ में आरोपी सुखसाय ने बताया कि विध्यांचल स्थित मकान में मृतक द्वारा उसके पिता के मेडिकल दस्तावेज फाड़ दिए जाने को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान उसने लकड़ी की पराठी से सुरेन्द्र के सिर पर हमला किया और बाद में रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपी ने अपने पिता महावीर बरगाह के साथ मिलकर शव को बोरे में भरकर साइकिल से छोटे छुरी बांध के डुबान क्षेत्र तक पहुंचाया और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव एवं साइकिल को पत्थर बांधकर पानी में फेंक दिया।
मामले की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक निर्मल राजवाड़े ने की और पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सिंह कुशवाहा ने पैरवी की। मामले की सुनवाई प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्री मानवेन्द्र सिंह की अदालत में हुई। न्यायालय ने 5 जून 2026 को सुनाए गए निर्णय में आरोपी सुखसाय उर्फ गंवटिया बरगाह को धारा 302 भारतीय दंड संहिता के तहत आजीवन कारावास तथा धारा 201/34 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 200 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं सह-आरोपी महावीर बरगाह को धारा 201/34 भारतीय दंड संहिता के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।


