सूरजपुर

आंदोलन का असर: 8 करोड़ किसानों के खातों में
12-May-2026 10:11 PM
आंदोलन का असर: 8 करोड़ किसानों के खातों में

बाकी राशि जल्द जारी करने का आश्वासन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

प्रतापपुर/सूरजपुर, 12 मई। मां महामाया शक्कर कारखाना केरता से जुड़े गन्ना किसानों एवं मजदूरों के लंबे समय से लंबित भुगतान को लेकर चल रहा आंदोलन अब असर दिखाने लगा है। किसानों की लगातार नाराजगी, धरना-प्रदर्शन और तालाबंदी की चेतावनी के बाद आखिरकार शासन हरकत में आया है। मंगलवार को किसानों की करीब 16 करोड़ रुपये की बकाया राशि में से 8 करोड़ रुपये किसानों के खातों में जमा करा दिए गए हैं, जबकि शेष राशि भी शीघ्र जारी किए जाने की बात कही गई है। इसकी जानकारी जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र क्रमांक 11 सुरेश कुमार आयाम ने मीडिया को दी।

गौरतलब है कि विगत 8 अप्रैल को जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम एवं गन्ना किसानों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई थी कि 15 दिनों के भीतर गन्ना किसानों एवं मजदूरों की लंबित राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कारखाने में किसानों का अध्यक्ष निर्वाचित कराने की मांग भी उठाई गई थी।

ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यदि समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं हुआ तो किसान आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बावजूद इसके जब शासन और प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई, तब पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 27 अप्रैल 2026 को मां महामाया शक्कर कारखाना केरता में किसानों ने ताला बंदी कर दी और नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा शक्कर उठाव पर भी रोक लगा दी गई।

इस आंदोलन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में गन्ना किसान, मजदूर और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। आंदोलन के दौरान किसानों ने साफ कहा था कि कई महीनों से भुगतान नहीं होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था, वहीं किसान कर्ज और खेती के खर्च को लेकर परेशान थे।

आंदोलन को जिला कांग्रेस कमेटी सूरजपुर का भी खुला समर्थन मिला। इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह, किसान कांग्रेस अध्यक्ष विमलेश दत्त तिवारी, जिला उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता, कारखाना के पूर्व अध्यक्ष विद्यासागर सिंह आयाम, ओबीसी प्रदेश महामंत्री नवीन जायसवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं किसान मौजूद रहे।

जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम ने कहा कि किसानों और मजदूरों की एकजुटता तथा आंदोलन के दबाव के कारण शासन को निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह किसानों की पहली जीत है, लेकिन जब तक पूरी राशि का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शेष राशि के भुगतान में देरी की गई तो किसान फिर से उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


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