सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 19 अप्रैल। सरगुजा संभाग में मानव-हाथी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। हाल ही में सूरजपुर जिले के कल्याणपुर निवासी केशव भोय की हाथियों के हमले में मौत के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। वहीं घटना के 24 घंटे के भीतर ही घाघी टिकरा अखोरा क्षेत्र में एक अन्य व्यक्ति पर हाथी द्वारा प्राणघातक हमला किए जाने से ग्रामीणों में भय और असुरक्षा की भावना और बढ़ गई है।
स्थानीय ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए घटनाओं को लापरवाही का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि हाथियों की निगरानी, उनके आवागमन मार्गों की सुरक्षा तथा समय पर अलर्ट जारी करने जैसे आवश्यक उपाय प्रभावी रूप से लागू नहीं किए जा रहे हैं। फॉरेस्ट रैपिड रिस्पांस टीम और टास्क फोर्स के गठन के बावजूद घटनाओं में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है।
मृतक केशव भोय के परिजनों के लिए जन अधिकार परिषद छत्तीसगढ़ के संयोजक त्रिभुवन सिंह ने परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने, बच्चों की शिक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन द्वारा उठाने तथा कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। साथ ही वन विभाग से तत्काल 6 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान मुआवजा प्रावधान वास्तविक नुकसान की तुलना में अपर्याप्त हैं। मौत के मामलों में लगभग 6 लाख रुपये, फसल नुकसान पर 9 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा मकान क्षति पर 50 हजार रुपये की सहायता को बेहद कम बताया जा रहा है। उन्होंने फसल नुकसान का मुआवजा औसत उत्पादन मूल्य के आधार पर देने अथवा बीमा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या के समाधान के लिए केवल मुआवजा बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हाथियों की वैज्ञानिक निगरानी, कॉरिडोर की सुरक्षा तथा स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी के साथ ठोस रणनीति तैयार करना आवश्यक है। लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाने की मांग की है।


