सूरजपुर
समय पर निगरानी होती तो सडक़ पर प्रदर्शन को मजबूर न होतीं आदिवासी छात्राएं
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता-
प्रतापपुर, 2 फरवरी। प्रतापपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास में कीड़े लगे भोजन, आधा पेट खाना और मानसिक प्रताडऩा की गंभीर शिकायतों के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छात्रावास की अधीक्षिका देवमन को तत्काल हटा दिया है। कलेक्टर सूरजपुर के निर्देश पर उनके विरुद्ध निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विशेषकर बीईओ और बीआरसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुबह सडक़ पर उतरीं छात्राएं, डेढ़ घंटे तक जाम रहा मार्ग
गत दिनों करीब 6 से 7 बजे के बीच दर्जनों आदिवासी छात्राएं जनपद पंचायत कार्यालय के सामने मुख्य सडक़ पर धरने पर बैठ गईं। छात्राओं की मांग थी कि कलेक्टर स्वयं मौके पर आकर उनकी समस्याएं सुनें। धरने के कारण प्रतापपुर का मुख्य मार्ग करीब डेढ़ घंटे तक जाम रहा, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
कीड़े लगा भोजन, पतली दाल और अधूरा खाना
धरने पर बैठी छात्राओं ने आरोप लगाया कि छात्रावास में उन्हें कीड़े लगा भोजन, अत्यधिक पतली दाल और कई बार बिना सब्जी का खाना दिया जाता था। भोजन की मात्रा इतनी कम होती थी कि कई छात्राओं को भूखे पेट सोना पड़ता था। शासन द्वारा निर्धारित मेनू का नियमित रूप से पालन नहीं किया जा रहा था।
मूलभूत सुविधाओं की भी भारी कमी
छात्राओं ने बताया कि शासन से मिलने वाली शैम्पू, साबुन, तेल, सेनेटरी पैड सहित अन्य आवश्यक सामग्री भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती थी। इन मुद्दों पर सवाल उठाने पर अधीक्षिका द्वारा डांट-फटकार और मानसिक प्रताडऩा दी जाती थी।
समय पर कार्रवाई होती तो आंदोलन नहीं होता
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यदि बीईओ और बीआरसी समय रहते छात्रावास का निरीक्षण करते, शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करते, तो छात्राओं को सडक़ पर उतरकर प्रदर्शन नहीं करना पड़ता। अधिकारियों की उदासीनता ने समस्या को आंदोलन का रूप दे दिया।
शिकायतों को किया गया नजरअंदाज
छात्राओं का आरोप है कि उन्होंने अधीक्षिका के साथ-साथ बीईओ कार्यालय और बीआरसी स्तर पर भी कई बार शिकायत की, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। लगातार अनदेखी के चलते छात्रावास की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई।
प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम ललिता भगत, तहसीलदार चंद्रशिला जायसवाल, थाना प्रभारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रारंभ में छात्राएं किसी भी अधिकारी की बात सुनने को तैयार नहीं थीं। बाद में एसडीएम द्वारा कलेक्टर सूरजपुर से फोन पर छात्राओं की बात कराई गई।
एसडीएम ललिता भगत ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर अधीक्षिका को तत्काल हटाया गया है। साथ ही एक जांच दल गठित कर जिला शिक्षा अधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है, जिन्होंने छात्राओं के बयान दर्ज किए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई
इस घटना ने प्रतापपुर क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था और छात्रावास संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि बीईओ, बीआरसी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।


