सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
प्रतापपुर, 19 जनवरी। मनरेगा योजना को कमजोर किए जाने के विरोध और ग्रामीणों के रोजगार अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़ीपा एवं मसगा में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का आयोजन किया गया। इस जनआंदोलन में बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूरों, ग्रामीणों एवं कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के माध्यम से केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए योजना को पूरी मजबूती से लागू करने की मांग की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह कोराम ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के जीवन की रीढ़ है। यदि इस योजना को कमजोर किया गया तो गांवों में बेरोजगारी, पलायन और भुखमरी जैसी समस्याएं बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मजदूरों और ग्रामीणों के हक की लड़ाई में हमेशा उनके साथ खड़ी है और आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता ने कहा कि मनरेगा के तहत समय पर काम और मजदूरी मिलना मजदूरों का संवैधानिक अधिकार है। सरकार को राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री नवीन जायसवाल ने कहा कि मनरेगा मजदूरों की मेहनत का सम्मान तभी संभव है, जब उन्हें 100 दिनों का रोजगार और समय पर मजदूरी मिले। उन्होंने योजना की राशि में कटौती का आरोप लगाते हुए इसे ग्रामीणों के साथ अन्याय बताया।
ब्लॉक किसान कांग्रेस अध्यक्ष जगत लाल आयाम ने कहा कि मनरेगा से गांवों में जल संरक्षण, सडक़, तालाब सहित अनेक विकास कार्य हुए हैं। योजना कमजोर होने से गांवों का विकास ठप हो जाएगा। जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम ने कहा कि मनरेगा मजदूर अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुके हैं और संगठित होकर संघर्ष करेंगे।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवकुमार जायसवाल ने इसे हर गरीब और मजदूर की लड़ाई बताया, वहीं एनएसयूआई नेता गोल्डी खान ने युवाओं से मनरेगा मजदूरों के समर्थन में आगे आने की अपील की। ग्राम पंचायत पड़ीपा के सरपंच राम प्रताप सहित अन्य वक्ताओं ने भी मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि अब मजदूर अपने रोजगार के हक की लड़ाई खुद लड़ेंगे और किसी भी सूरत में मनरेगा को कमजोर नहीं होने देंगे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर और ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में मनरेगा को बचाने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया।


