सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 5 जनवरी। देश की पहली एमडीओ मोड में संचालित केतकी भूमिगत खदान परियोजना में सोमवार को स्थानीय ग्रामीणों के आंदोलन के कारण कोयला उत्पादन करीब नौ घंटे तक बाधित रहा। भाजपा नेता संत सिंह के नेतृत्व में स्थानीय ग्रामीणों ने रोजगार सहित अन्य मुद्दों को लेकर खदान के मुख्य द्वार पर धरना देकर खदान संचालन ठप करा दिया।
सुबह करीब साढ़े सात बजे शुरू हुए आंदोलन के बाद देर शाम लगभग चार बजे खदान प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई, जिसके पश्चात आंदोलन वापस ले लिया गया। इसके बाद शाम करीब पांच बजे मजदूरों का खदान में प्रवेश हुआ और कोयला उत्पादन पुन: शुरू हो सका।
स्थानीय रोजगार और धूल प्रदूषण प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में खदान में स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देने, कोयला उत्पादन व परिवहन के दौरान उडऩे वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित जल छिडक़ाव, तथा निजी कंपनी के अधीन पेटी ठेकेदारों की कथित मनमानी और मजदूरों से मोटी रकम लेकर काम पर रखने जैसी अनियमितताओं की जांच शामिल रही।
ग्रामीणों का कहना था कि कई स्थानीय युवक वीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, इसके बावजूद खदान प्रबंधन निजी कंपनी द्वारा दूसरे जिलों से ठेका मजदूरों को काम पर रखा जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं में रोष है। वहीं खदान के सामने और सडक़ मार्ग पर जल छिडक़ाव न होने से दिनभर धूल का गुब्बार उड़ता रहता है, जिससे आसपास के गांवों और राहगीरों को भारी परेशानी हो रही है।
प्रबंधन ने दिया जांच का आश्वासन
आंदोलन के दौरान सब एरिया मैनेजर सहित क्षेत्रीय प्रबंधन के अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों से चर्चा की गई। प्रबंधन ने सभी मांगों पर जांच कर उचित कार्रवाई और धूल नियंत्रण के लिए जल छिडक़ाव व्यवस्था दुरुस्त करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।
आरजीके सब एरिया के सह प्रबंधक प्रशांत शर्मा ने बताया कि आंदोलनकारियों से सकारात्मक चर्चा हुई है और उनकी मांगों को प्राथमिकता से हल करने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस घटना से खदान की प्रथम पाली का उत्पादन प्रभावित हुआ, हालांकि खदान अब पुन: चालू कर दी गई है।
आउटसोर्सिंग के जरिए हो रहा उत्पादन
गौरतलब है कि केतकी खदान पूरी तरह आउटसोर्सिंग माइंस है, जहां एसएमएस कंपनी द्वारा कोयला उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान में खदान से प्रतिदिन लगभग 1200 से 1500 टन कोयला उत्पादन हो रहा है।


