राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : विरोधी से बाद में, अपनों से पहले...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : विरोधी से बाद में, अपनों से पहले...
Date : 04-Oct-2019

विरोधी से बाद में, अपनों से पहले...
चित्रकोट उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। दोनों ही दलों के प्रत्याशियों को भीतरघात का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इससे निपटने के लिए दोनों ही दलों के रणनीतिकार मेहनत कर रहे हैं। सुनते हैं कि कांग्रेस के एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को साफ तौर पर बता दिया गया है कि यदि  किसी तरह की गड़बड़ी हुई, तो उनका पार्टी में कोई भविष्य नहीं रह जाएगा। 

चर्चा है कि उक्त नेता मौजूदा कांग्रेस प्रत्याशी के नाम पर सहमत नहीं थे। चेतावनी के बावजूद पार्टी के कुछ नेता चुनाव में भीतरघात की संभावना से इंकार नहीं कर रहे हैं। कुछ इसी तरह की आशंका भाजपा के रणनीतिकारों को भी है। दरअसल, भाजपा प्रत्याशी लच्छूराम कश्यप का स्थानीय बड़े नेताओं से मतभेद रहा है। चुनाव संचालक केदार कश्यप से भी उनके मधुर संबंध नहीं रहे हैं। बस्तर ग्रामीण के जिला अध्यक्ष बैदूराम कश्यप से तो उनका छत्तीस का आंकड़ा रहा है। दंतेवाड़ा में बुरी हार से पार्टी के कार्यकर्ता वैसे ही पस्त हैं। प्रदेश में सरकार भी नहीं है। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकारों को एकजुटता के लिए ही काफी मेहनत करनी पड़ रही है। 

टिकट त्रिपुरा से तय होगी?
भाजपा में महापौर-पार्षद टिकट के लिए दावेदार बड़े नेताओं के आगे-पीछे हो रहे हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री रमेश बैस के राज्यपाल बन जाने से भाजपा की गुटीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। बैस विशेषकर रायपुर संभाग में अपने समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए हर संभव कोशिश करते थे। बैस के राज्यपाल बनने के बाद ऐसे लोगों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। एक पार्षद ने अभी से ऐलान कर दिया है कि उनकी टिकट त्रिपुरा से तय होगी। पिछले दिनों पार्टी की बैठक में बैनर-पोस्टर में अन्य नेताओं के साथ बैसजी की तस्वीर होने पर कांग्रेस ने आपत्ति की थी। भाजपा नेताओं को इसका अंदेशा भी था, लेकिन बैसजी के ही कार्यालय के कुछ लोगों ने उनकी तस्वीर हटाने से रोक दिया। अब देखना है संवैधानिक पद पर रहते बैसजी अपने करीबियों की किस तरह मदद कर पाते हैं। 

गांधी और गोडसेजी का हफ्ता
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इस विशेष गांधी सत्र ने जाने कितने बरसों के बाद गांधी को इस तरह बहस के बीच लाकर खड़ा कर दिया। और पन्द्रह बरसों के भाजपा राज के बाद प्रदेश में आई कांग्रेस सरकार ने अपनी पहली गांधी जयंती का मौका नहीं चूका, और समय-समय पर भाजपा के लोगों के गांधी के खिलाफ कही बातों के पोस्टर बनवाए, और गोडसे की जो तारीफ सार्वजनिक रूप से की गई थी, उसके भी पोस्टर बनवाए। ऐसे में जाहिर था कि भाजपा की तरफ से राजधानी रायपुर के मेयर का चुनाव लडऩे के एक महत्वाकांक्षी भाजपा नेता संजय श्रीवास्तव इन पोस्टरों का विरोध करने पहुंचे, और कुछ पोस्टरों को फाड़कर फोटोग्राफरों को मौका भी दिया। कांग्रेस का मकसद पूरा हो गया क्योंकि उसे इन पोस्टरों को चर्चा में लाना था जो कि सच थे, लेकिन कड़वा सच थे। 

विधानसभा के भीतर एक सबसे चौकन्ना विधायक, भाजपा के लंबे समय तक मंत्री रहे अजय चंद्राकर ने जिस अंदाज में गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को गोडसेजी कहा, उससे भी कांग्रेस का मकसद पूरा हो गया। 

लेकिन कांग्रेस और भाजपा के गांधी और गोडसे को लेकर जो भी मकसद हों, उनसे अलग आम जनता यह देखकर हक्का-बक्का थी कि छत्तीसगढ़ के बड़े-बड़े भाजपा नेता इस मौके पर भी गांधी की आलोचना करने से अपने आपको नहीं रोक पाए, और गांधी से उनके वक्त के उनके साथी नेताओं की असहमति गिनाने में लगे रहे। जाहिर है कि आम लोगों के बीच भाजपा के नेताओं ने ऐसा करके अपनी साख खासी खोई, और खेलों की जुबान में गोडसेजी जैसा सेल्फ गोल कर लिया। 

लेकिन गांधी जयंती के भी बाद, और विधानसभा के गांधी सत्र के भी बाद आज  गांधी की चली राह पर चलकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई में कांग्रेस पार्टी धमतरी जिले के कंडेल से रायपुर तक की पदयात्रा कर रही है, और यह पूरा हफ्ता गांधीमय हो गया है। गांधी जिन्हें पसंद हों, और जिन्हें नापसंद हों, वे इस हफ्ते की अलग-अलग बातों को छांटकर खुश हो सकते हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए फिक्र वाली भी एक खबर है। गांधी की अस्थियों का कलश चोरी हो जाने का समाचार आया है, और जिन लोगों को फिल्म गांधी बनाने वाले रिचर्ड एटनबरो की बनाई एक दूसरी फिल्म, जुरासिक पार्क, याद हो, वे लोग सोच सकते हैं कि गांधी की अस्थियों से अगर एक गांधी खड़ा किया जा सका तो क्या होगा? खासकर सत्ता में बैठे लोगों के लिए गांधी को झेलना बड़ा मुश्किल पड़ेगा, उतनी सादगी, और उतनी किफायत से जीना हो, तो लोग मुश्किल चुनाव लड़कर सत्ता पर आने की कोशिश ही क्यों करेंगे? 
(rajpathjanpath@gmail.com)

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