राजपथ - जनपथ
जितने मुँह उतनी बातें
भाजपा में नए प्रभारी की नियुक्ति की सुगबुगाहट है। निवर्तमान प्रभारी नितिन नबीन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं। ऐसे में पार्टी जल्द ही उनकी जगह प्रभारी की नियुक्ति करने वाली है। पार्टी के अंदरखाने में कुछ नामों पर चर्चा भी हो रही है।
सुनते हैं कि नबीन की जगह पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ले सकते हैं। महाराष्ट्र के मंत्री रहे तावड़े, वर्तमान में बिहार भाजपा के प्रभारी हैं। एक चर्चा यह भी है कि पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख संजय मयूख को प्रभारी बनाया जा सकता है। मयूख पिछले तीन-चार विधानसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ में सक्रिय रहे हैं। वो भी मूलत: बिहार के हैं, और नितिन नबीन के साथ युवा मोर्चा में काम कर चुके हैं।
पार्टी के कुछ स्थानीय नेता संबित पात्रा को छत्तीसगढ़ का प्रभार मिलने की संभावना जता रहे हैं। संबित पात्रा, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, और ओडिशा के पुरी लोकसभा सीट से सांसद हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता दिल्ली में थे, तो उनके बीच नए प्रभारी को लेकर आपस में चर्चा होती रही। तमाम अटकलों से परे कोई नया नाम आ जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
पंजाब का छत्तीसगढ़ कनेक्शन
केन्द्रीय चुनाव आयोग ने अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में मार्च-अप्रैल में चार राज्यों के विधानसभा के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए प्रशासनिक तैयारी चल रही है। इसमें पंजाब सरकार ने चुनाव आयोग की अनुशंसा पर बिलासपुर की बेटी श्रीमती आनंदिता मित्रा को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।
आईएएस की वर्ष-07 बैच की आईएएस आनंदिता मित्रा सचिव स्तर की अफसर हैं। उनके पति डॉ. एसके राजू, पंजाब सरकार में प्रमुख सचिव स्तर के अफसर हैं, और वर्तमान में राष्ट्रीय इस्पात निगम में सीईओ के पद पर पदस्थ हैं। डॉ. राजू, कांकेर, सरगुजा और रायगढ़ कलेक्टर रह चुके हैं। आनंदिता मित्रा आईएएस में बाद में सलेक्ट हुई, और फिर उन्हें पंजाब कैडर आबंटित हुआ। इसके बाद डॉ. राजू भी 2008-09 अपने पत्नी के कैडर में चले गए।
आनंदिता मित्रा बिलासपुर की रहने वाली है, और उनके पिता रेलवे में अफसर थे। खास बात ये है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, और आम आदमी पार्टी ने छत्तीसगढ़ के लोरमी के रहने वाले संदीप पाठक को राज्यसभा में भेजा है। यही नहीं, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के बड़े नेता, और पूर्व सीएम भूपेश बघेल, पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हैं। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ के लोग पंजाब चुनाव में अहम रोल निभाएंगे।
क्या एसआईआर की तारीख बढ़ेगी
छत्तीसगढ़ में एसआईआर के पहले चरण में 27.34 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए । तीन कारण बताए- करीब 6 लाख 42 हजार मतदाताओं की मौत हो जाना, 19 लाख 13 हजार मतदाताओं का अपने बताए गए ठिकाने पर नहीं मिला और करीब 1 लाख 80 हजार ऐसे जिनके नाम दो जगह की मतदाता सूची में दर्ज है। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के मुताबिक यह घर-घर सत्यापन के बाद किया गया है, जिसमें दावा है कि 30 हजार बीएलओ और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि लगे रहे। यह भी दावा किया गया है कि कोई भी नाम स्वचालित रूप से नहीं हटाया गया है। मगर फिर भी करीब 13 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए है। राज्य में कुल 2.12 करोड़ मतदाताओं में से 1.84 करोड़ (87 प्रतिशत) ने फॉर्म जमा किए। यह भी दिलचस्प है कि विशेष रूप से रायपुर, दुर्ग, कोरबा और बिलासपुर जैसे शहरी और खनन क्षेत्रों में स्थानांतरित और अनुपस्थित मतदाताओं की संख्या अधिक है, जहां मौसमी प्रवासन सामान्य है। करीब 6 लाख 40 हजार ऐसे मतदाता हैं जिनसे फॉर्म तो भरवा लिए गए और ड्रॉफ्ट सूची में नाम भी आ गया लेकिन उन्हें पहचान के अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए कहा जा रहा है। आयोग का यह दावा भी है कि ड्रॉप्ट सूची में शामिल नाम को सुनवाई के बाद ही हटाया जाएगा। ये 6.40 लाख मतदाता ऐसे हैं जिन्हें यह नहीं पता था कि बाद में फिर उन्हें बीएलओ या इस काम के लिए बनाए गए अस्थायी मतदान केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। मगर, उस समय बीएलओ टीमों पर अधिक से अधिक फॉर्म जमा करने के लिए दबाव था इसलिए आधे-अधूरे दस्तावेजों के बावजूद फॉर्म जमा कर लिए गए, अब उन्हें परेशानी हो रही है।
इधर कांग्रेस ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उसने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को ज्ञापन सौंप कर कहा है कि सलवा जुड़ूम से प्रभावित विस्थापित आदिवासियों, प्रवासी मजदूरों, दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम छूट सकते हैं। सलवा जुड़ूम से प्रभावित बस्तर क्षेत्र के लाखों आदिवासी राहत शिविरों में रहते हैं या गांवों से दूर हैं, जहां बीएलओ पहुंच नहीं सके। पुरानी रिपोर्ट्स में सलवा जुड़ूम से 1 लाख से अधिक विस्थापित बताए जाते हैं। कांग्रेस ने दावा-आपत्ति अवधि बढ़ाने, विस्थापितों के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने और ‘लॉजिकल एरर’ के नाम पर नाम हटाने पर रोक की मांग की है। मगर, आयोग से ऐसी कोई अनुमति राज्य को नहीं मिला है। तय यही है कि जो लोग अपने घर पर नहीं मिलेंगे, उनको अनुपस्थित मान लिया जाएगा और वे मतदाता सूची से बाहर हो जाएंगे। यही समस्या छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा, धमतरी, सक्ती आदि जिलों से बाहर जाने वाले प्रवासी मजदूरों के सामने खड़ी है। कल 22 जनवरी दावा आपत्ति की अंतिम तिथि है। सुनवाई 14 फरवरी तक चलेगी, और अंतिम सूची 21 फरवरी को प्रकाशित होगी। इधर, छत्तीसगढ़ के सीईओ ने ईसीआई से एसआईआर की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया, क्योंकि मृतक, स्थानांतरित और अनुपस्थित मतदाताओं के पुन: सत्यापन के लिए अतिरिक्त समय चाहिए। इसका मुख्य कारण राज्य की भौगोलिक चुनौतियां, आदिवासी क्षेत्रों में पहुंच की कठिनाई और मजदूरों के बड़े पैमाने पर प्रवास हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी आयोग को राज्य-विशिष्ट चुनौतियों पर सहानुभूति के साथ विचार करने का निर्देश दिया है।
कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में बिहार, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल की तरह एसआईआर को लेकर पैनिक नहीं दिख रहा है। यदि एसआईआर के विभिन्न चरणों का समय बढ़ा दिया जाए तो निश्चित रूप से मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और शुद्ध बनाया जा सकेगा। विपक्षी दलों को भी आश्वस्त किया जा सकेगा।
हिमालय पार कर रामसर पहुंचे परिंदे
रामसर साइट कोपरा जलाशय, इन दिनों प्रकृति के अद्भुत नज़ारे का गवाह है। मंगोलिया की ठंडी धरती से उड़ान भरकर ग्रे-लेग गूज प्रवासी पक्षी हिमालय की लगभग 26 हजार फीट ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं को पार करते हुए आ पहुंचे हैं। हजारों किलोमीटर की कठिन और जोखिम भरी यात्रा के बाद इन परिंदों का कोपरा में ठहराव प्रकृति प्रेमियों के लिए खास दृश्य बन गया है।
ग्रे-लेग गूज अपनी असाधारण उड़ान क्षमता के लिए जाने जाते हैं। ये पक्षी सामान्य परिस्थितियों में एक दिन में 640 से 960 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं। हिमालय पार करते समय अनुकूल हवाओं और मौसम की स्थिति मिलने पर ये 1000 किलोमीटर से अधिक की उड़ान भी एक ही दिन में भर लेते हैं। लंबी दूरी की इस यात्रा में ऊर्जा संतुलन, भोजन की उपलब्धता और सुरक्षित विश्राम स्थलों की अहम भूमिका होती है।
ऐसा सफर करके वे मंगोलिया से लगभग 5000 किलोमीटर दूर स्थित बिलासपुर आ पहुंचे हैं। (फोटो- शिरीष दामड़े)


