राजपथ - जनपथ
एक खास मुलाकात
छत्तीसगढ़ में साहू समाज एक बड़ा वोट बैंक है। इसीलिए सरकार कोई भी इस वर्ग को छत्तीसगढ़ में हमेशा प्रतिनिधित्व मिलता रहा है। कांग्रेस ने ताम्रध्वज साहू को सीएम का संभावित चेहरा बनाया था, सन् 2018 के विधानसभा चुनाव में। समाज के लोग समझ रहे थे कि वे ही मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे। दिल्ली में जब कांग्रेस हाईकमान की ओर से नाम तय किया जा रहा था तब खबर भी उड़ गई थी कि वे फाइनल कर दिए गए हैं। पटाखे फूटे। पर 2023 के चुनाव में भाजपा ने साहू समाज को सर्वाधिक टिकट दिए, सर्वाधिक जीत कर भी आए। उसके बाद 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में भी यह सिलसिला बना रहा। परिणाम यह रहा कि ताम्रध्वज महासमुंद से चुनाव हार गए। इधर, लंबे समय तक भाजपा में हाशिये पर रहे तोखन साहू ने बिलासपुर लोकसभा सीट से बंपर जीत हासिल की। केवल जीत ही नहीं, अनेक दिग्गजों को किनारे लगाते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी जगह बनाई। इस तस्वीर में ताम्रध्वज साहू, तोखन साहू के साथ नजर आ रहे हैं, जो उनसे उनके दिल्ली निवास पर मिलने गए थे।
बिना मोबाइल प्रशिक्षण

जिलों में भाजपा का प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। रायपुर जिले के पदाधिकारियों का प्रशिक्षण शिविर अग्रसेन धाम में सुबह 9 बजे से शुरू हुआ। इस शिविर में रायपुर जिले के सातों विधायक शामिल हुए। खास बात यह है कि विधायकों और पार्टी के सभी आमंत्रित नेताओं को मोबाइल बाहर रखने के लिए कह दिया गया। वो कार्यक्रम के दौरान किसी से चर्चा नहीं कर पाएंगे।
प्रशिक्षण शिविर में पार्टी के कोई राष्ट्रीय नेता तो नहींआए, लेकिन प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय प्रमुख रूप से मौजूद रहे। कुल मिलाकर ढाई सौ से अधिक पदाधिकारी व आमंत्रित नेता शिरकत कर रहे हैं। सभी को दो दिन प्रशिक्षण स्थल में ही रहना होगा। उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं है। पहले से ही जिला पदाधिकारियों की ऑनलाईन मीटिंग में तमाम बातों को लेकर विस्तार से जानकारी दे दी गई है। सरकार के ढाई साल बाकी हैं, और आने वाले दिनों में पार्टी कार्यकर्ताओं को किस तरह का काम करना चाहिए, इस पर मंथन हो रहा है। शिकवा-शिकायतें भी सुनी जाएगी। निराकरण के लिए भी यथासंभव प्रयास किए जाएंगे। कुल मिलाकर अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर प्रशिक्षण शिविर को काफी अहम माना जा रहा है। देखना है कि शिविर में क्या कुछ निकलकर बाहर आता है।
मंत्रालय में गढक़लेवा

मंत्रालय परिसर में संचालित निजी होटल के कैंटीन से अधिकारी कर्मचारियों का मन 20-22 दिन में ही भर गया है। वहां के व्यंजनों से नहीं उनकी कीमत से। जेब पर भारी कैंटीन की जगह कर्मचारी संघ की पहल पर गढक़लेवा का संचालन शुरू हो गया है। संघ के अध्यक्ष ने सभी सदस्य अधिकारी कर्मचारियों को सूचना वायरल कहा कि वे अधिक से अधिक संख्या में गढक़लेवा पहुंचकर इस पहल को सफल बनाएं। हमें अपनी माटी के स्वाद और संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। सभी से आग्रह है कि भोजन और नाश्ते के लिए हमारे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के केंद्र गढक़लेवा का उपयोग करें। गढक़लेवा से भोज्य पदार्थ अपनाकर हम न सिर्फ शुद्ध और स्वादिष्ट भोजन पाएंगे, बल्कि स्थानीय संस्कृति और रोजगार को भी संबल देंगे।
इस सामूहिक सहयोग से हम जल्द ही इस वर्तमान कैंटीन को बंद करवाकर, पुन: टेंडर की प्रक्रिया शुरू करवाएंगे, ताकि हमें बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इस पर कर्मचारियों ने ठंड में तो ठीक है लेकिन गर्मी बारिश में गढक़लेवा की दूरी पर एतराज़ जताया है। इसे
पुराने स्थान पर डी गेट के सामने ही खोलना चाहिए। इसके अलावा मंत्रालय के बाहर एक ग्रामीण महिला ने भी भोजनालय शुरू किया है। जो बड़ी भीड़ खींच रही है। उसकी पूरी थाली दाल- भात, भाजी, बरी-बिजौरी आदि छत्तीसगढ़ डिशेज़ के साथ 70 रूपए में उपलब्ध है। देखना है कि पनीर मिक्सवेज के दौर में यह कितनी सफल होते हैं।


