राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : खर्च में कटौती की आंच
22-May-2026 5:52 PM
राजपथ-जनपथ : खर्च में कटौती की आंच

खर्च में कटौती की आंच

केन्द्र सरकार इन दिनों सरकारी खर्च में कटौती को लेकर गंभीर नजर आ रही है। चर्चा है कि कम बजट और अधिक प्रशासनिक खर्च वाले आधा दर्जन छोटे विभागों को बंद करने या बड़े विभागों में समाहित करने पर विचार चल रहा है। इनमें आयुष, मछली पालन, पुरातत्व, लघु सिंचाई, हाथकरघा-हस्तशिल्प जैसे विभागों के नाम लिए जा रहे हैं। यदि ऐसा फैसला होता है, तो इसका असर राज्यों पर भी पड़ सकता है।

राज्य के अफसर-कर्मचारी इस संभावित फैसले पर नजर टिकाए हुए हैं। उनका मानना है कि केंद्र की तर्ज पर राज्यों में भी संबंधित विभागों के पुनर्गठन या समापन की नौबत आ सकती है। खास बात यह है कि आयुष विभाग का विस्तार मोदी सरकार के आने के बाद ही हुआ था, जिसमें आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी को एक साथ लाया गया। छत्तीसगढ़ में इसका अलग संचालनालय है और यहां गतिविधियां भी बेहतर मानी जाती हैं।

इसी तरह मछली पालन और पुरातत्व जैसे विभाग लंबे समय से अस्तित्व में हैं। हाथकरघा और हस्तशिल्प विभागों की गतिविधियां भले सीमित हों, लेकिन इसमें रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। दिक्कत यह है कि पर्याप्त बजट नहीं मिलने से योजनाएं अटकी रहती हैं। अब देखना है कि खर्च घटाने की मुहिम में केन्द्र सरकार इन विभागों को लेकर क्या रुख अपनाती है।

रजिस्टरों पर दीमक या साजिश?

महंत घासीदास संग्रहालय में दुर्लभ दस्तावेजों और एक्सेशन रजिस्टरों के नष्ट होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला तब सामने आया, जब अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ी अवलोकितेश्वर की बेशकीमती कांस्य प्रतिमा को वापस लाने के लिए संग्रहालय के रिकॉर्ड खंगाले गए। जांच में पता चला कि छह में से पांच एक्सेशन रजिस्टर नष्ट हो चुके हैं, जिनमें पुरातत्व अवशेषों का पूरा रिकॉर्ड दर्ज था। बताया गया कि रजिस्टरों को दीमक चट कर गई।

मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि एक्सेशन रजिस्टरों में संग्रहालय में सुरक्षित पुरावशेषों, कलाकृतियों और चोरी हुई वस्तुओं की पूरी जानकारी रहती है। अब जब रिकॉर्ड ही नष्ट हो गए, तो तीन दशक पहले चोरी हुई अवलोकितेश्वर की कांस्य प्रतिमा को वापस लाने की प्रक्रिया जटिल हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस प्रतिमा की कीमत करीब दो मिलियन डॉलर बताई जा रही है। फिलहाल अतिरिक्त संचालक को नोटिस जारी कर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है।

मगर यह भी चर्चा है कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश हो रही है। कहा जा रहा है कि मध्यप्रदेश में पुराने एक्सेशन रजिस्टर मौजूद हैं, जिन्हें राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ नहीं लाया गया। अब पुरातत्व संचालनालय ने मध्यप्रदेश सरकार को पत्र लिखकर रिकॉर्ड मांगा है। हालांकि राज्य गठन के बाद मिले पुरावशेषों और चोरी की घटनाओं का विवरण वहां मिलना मुश्किल माना जा रहा है। कुछ लोगों का दावा है कि रजिस्टर महज दीमक से नहीं, बल्कि जानबूझकर नष्ट किए गए हैं। यही वजह है कि मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। देखना है आगे क्या कुछ होता है।

यह तस्वीर 14 फरवरी 2010 की है। उस समय पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर देशभर में राजनीतिक विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। उसी क्रम में छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी बाकी मंत्रियों के साथ सांकेतिक रूप से सायकल चलाकर विरोध जताया था और पेट्रोल पंप पहुंचकर अलग अंदाज में प्रदर्शन किया था। (फोटो और जानकारी गोकुल सोनी) उस वक्त छत्तीसगढ़ में पेट्रोल के दाम 48-49 रुपये के बीच थे।


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