राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : अफीम कांड पर सियासी पारा चढ़ा
15-Mar-2026 6:00 PM
राजपथ-जनपथ : अफीम कांड पर सियासी पारा चढ़ा

अफीम कांड पर सियासी पारा चढ़ा

प्रदेश में चर्चित अफीम कांड को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ा हुआ है। भाजपा नेता विनायक ताम्रकार की गिरफ्तारी के बाद से विपक्षी दल कांग्रेस सरकार पर हमलावर है और ताम्रकार के बड़े नेताओं से कथित संबंधों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

मामला सामने आते ही भाजपा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विनायक ताम्रकार को पार्टी से निलंबित कर दिया। अब तक की जानकारी में भाजपा के किसी बड़े नेता से उनकी घनिष्ठता जैसी बात स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है। हालांकि, चर्चा यह जरूर है कि उनकी रिश्तेदारी कांग्रेस के एक विधायक से जुड़ी बताई जा रही है।

सियासी गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि ताम्रकार के दुर्ग के एक पूर्व मंत्री से उनके मधुर संबंध रहे हैं। लेकिन अफीम कांड सामने आने के बाद से उस पूर्व मंत्री ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस के कई स्थानीय नेता आरोपी विनायक ताम्रकार के खेत तक पहुंच गए, मगर पूर्व मंत्री दूरी बनाए रहे। विधानसभा में भी इस प्रसंग का उल्लेख पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर द्वारा किया जा चुका है।

इधर, मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। कहा जा रहा है कि छापेमारी से पहले अफीम के फल-पौधों से भरे चार कंटेनर बाहर भेज दिए गए थे। हालांकि पुलिस जांच में अभी तक इस तरह की किसी बात की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस के मुताबिक दो अन्य संदिग्धों की तलाश में टीम राजस्थान गई हुई है। माना जा रहा है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले में कुछ नए खुलासे हो सकते हैं। तब तक अफीम कांड को लेकर प्रदेश की राजनीति गर्म बनी रहने के आसार हैं।

गैस की कतार और बढ़ती बेचैनी

ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के बाजारों में भी दिखने लगा है। पेट्रोलियम आपूर्ति को लेकर आशंकाओं के बीच कई शहरों में रसोई गैस को लेकर हलचल बढ़ गई है। जगह-जगह सिलेंडर लेने के लिए कतारें लग रही हैं, जिससे लोगों में संकट की आशंका और गहरी हो रही है।

हालांकि प्रदेश के खाद्य विभाग का कहना है कि प्रदेश में रसोई गैस सिलेंडरों की कोई वास्तविक कमी नहीं है। विभाग का दावा है कि आपूर्ति सामान्य है, लेकिन एहतियात के तौर पर अब उपभोक्ताओं को 25 दिन में एक ही सिलेंडर दिया जा रहा है।

दूसरी ओर होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहा है। होटल-रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले लगभग पांच दिनों से उन्हें एक भी कमर्शियल सिलेंडर जारी नहीं किया गया। ऐसे में कई होटल और रेस्टोरेंट ने मजबूरी में इंडक्शन चूल्हों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

होटल-रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष मिक्की दत्ता ने ‘छत्तीसगढ़’ से कहा कि इंडक्शन चूल्हों से काम चलाना आसान नहीं है। उनके मुताबिक इससे बिजली मीटर तेजी से चलता है, बिजली बिल बढ़ता है और लगातार उपयोग करने पर सुरक्षा का खतरा भी बना रहता है।

कहा जा रहा है कि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति फिलहाल उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर दी जा रही है, जिसके कारण होटल-रेस्टोरेंट को सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। उधर कुछ होटल संचालकों ने काम चलाने के लिए घरेलू सिलेंडर का उपयोग शुरू किया, तो उस पर प्रशासन ने कार्रवाई भी शुरू कर दी।

होटल संचालकों का कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति शुरू नहीं हुई, तो कई होटल और रेस्टोरेंट को ताला लगाने की नौबत आ सकती है। इससे न केवल कारोबार प्रभावित होगा, बल्कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ सकता है।

मास्टर प्लान की जांच का पता नहीं

रायपुर के मास्टर प्लान में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर सियासी चर्चा में है। पूर्व मंत्री राजेश मूणत इस मुद्दे पर लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और सरकार पर जांच पूरी कराने के लिए दबाव बनाए हुए हैं।

दरअसल, सरकार ने करीब दो साल पहले मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की थी, लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। इसे लेकर सियासी हलकों में चर्चा है कि मूणत समेत भाजपा के कई नेता जांच में हो रही देरी से नाराज हैं। यही वजह है कि विधानसभा के लगभग हर सत्र में किसी न किसी रूप में यह मुद्दा उठता रहा है।

सरकार की ओर से अब तक यही जवाब आता रहा है कि जांच प्रक्रियाधीन है और इसके लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि हालिया लिखित जवाब में थोड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकार ने कहा है कि जांच को शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है और जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद उसके आधार पर समुचित कार्रवाई की जाएगी।

अब नजर इस बात पर है कि जांच कब तक पूरी होती है और रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार किस तरह की कार्रवाई करती है। फिलहाल, यह मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस का विषय बना रह सकता है।


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