राजपथ - जनपथ
देवतुल्य की कविता
पार्टी ने 4 दिन पहले ही अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया। उससे पहले पार्टी के बड़े छोटे नेताओं ने मंडल बूथ स्तर तक प्रशिक्षण अभियान चलाया। इसमें सभी ने पार्टी के उदय से लेकर अब तक का इतिहास बता कार्यकर्ताओं की मेहनत संघर्ष के कसीदे पढ़े। एक वरिष्ठ ने कहा सांसद विधायक मंत्री हमें कार्यकर्ता ही बनाते हैं। इससे भी आगे पार्टी कार्यकर्ताओं को पहले से ही देवतुल्य की संज्ञा दे चुकी है। इन चार दशकों में पार्टी ने कई उतार चढ़ाव भी देखे हैं। इस दौरान देवतुल्य वरिष्ठों के लिए मार्गदर्शक मंडल बना दिया गया और दूसरे दलों के पलायन कर्ताओं को मंच पर स्थान। अब ऐसे ही लोग देवतुल्यों को पार्टी की नैतिकता पढ़ा रहे। एक प्रशिक्षण वर्ग के दौरान राजधानी जिले के एक विधायक ने मंच से माइक पर कार्यकर्ताओं को क्या कुछ नहीं कहा। उन्हें गद्दार तक कहने से नहीं चूके। बात दूर तलक गई तो मीडिया पर ही आरोप लगाकर पल्ला झाड़ लिया कि तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। लेकिन विधायक के बिगड़े बोल से आहत पार्टी के एक ‘देवतुल्य’ ने एक कविता ही लिख डाली और कहा इस कविता का अवलोकन करिए और समय का इंतजार करिए....?
ख़ासा मुश्किल बंगाल
चुनावी ड्यूटी पर प्रदेश के करीब दर्जन भर आईएएस और आईपीएस अफसर इन दिनों पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु में पर्यवेक्षक बनकर तैनात हैं। इनमें से केरल, असम और तमिलनाडु में तैनात अफसर जहां आराम से और बेहतर माहौल में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में तैनात पर्यवेक्षकों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में ड्यूटी कर रहे अफसर एक तरह के दबाव में काम कर रहे हैं। इसकी बड़ी वजह राज्य सरकार और केंद्र के साथ-साथ चुनाव आयोग के बीच चल रही तनातनी को माना जा रहा है। चुनावी हिंसा का पुराना इतिहास भी हालात को और ज्यादा संवेदनशील बना रहा है।
इस बार पहली बार अलग-अलग राज्यों से आए आईएएस अफसरों को जिले की बजाय विधानसभा-वार पर्यवेक्षक बनाया गया है। उनके साथ पुलिस और अन्य सेवाओं के अफसर भी तैनात हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर सुविधाओं की कमी और स्थानीय राजनीतिक दलों के दबाव की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
कुछ अफसरों का मानना है कि पश्चिम बंगाल जैसी परिस्थितियां उन्हें दूसरे राज्यों में कभी नहीं झेलनी पड़ीं, जबकि बाकी राज्यों में प्रशासनिक सहयोग और शांत माहौल के चलते ड्यूटी अपेक्षाकृत सुचारू ढंग से चल रही है।
दुर्घटनाओं का डरावना चेहरा
छत्तीसगढ़ में हर रोज कहीं न कहीं बस, ट्रक, कार या बाइक की टक्कर से परिवार उजड़ रहे हैं। कांकेर का उदाहरण सबसे ताजा है। नेशनल हाईवे-30 पर दो कारों की टक्कर हुई। एक ही परिवार के छह सदस्य मारे गए, तीन गंभीर घायल हुए। कुछ दिन पहले अंबिकापुर में एनएच 130 पर तेज स्कॉर्पियो ने बाजार से लौट रही तीन महिलाओं समेत चार लोगों को कुचल दिया। बालोद में 4 अप्रैल को दो अलग हादसों में दो मौतें हुईं। जशपुर में 6 मार्च को ब्रेक फेल होने से बस पलट गई, पांच लोगों की मौत हो गई। उसी दिन भाटापारा में ट्रक ने यात्री बस को टक्कर मारी, पांच मौतें हुईं।
कोरबा जिले की स्थिति तो बड़ी डरावनी है। पिछले तीन महीनों में यहां सडक़ हादसों में 110 लोगों की मौत हो चुकी है। बाइक सवारों की दुर्घटनाएं तो और अधिक हो रही हैं। 10 मार्च से लेकर अब तक रायगढ़, अंबिकापुर, बिलासपुर, कोरबा, कवर्धा और बलरामपुर-रामानुजगंज में कई हादसे हुए। एक जगह अज्ञात वाहन ने बाइक सवार को कुचला, दूसरी जगह बाइक ट्रक से टकराई। बिलासपुर में नशे में बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराई। कोरबा में ट्रक ने तीन युवकों को कुचला, तीनों की मौके पर मौत हो गई। कवर्धा में हेलमेट पहने युवक की भी सिर की चोट से मौत हो गई। बलरामपुर में बाइक पुलिया के नीचे ही गिर गई और पीछे बैठी महिला की जान चली गई।
इन हादसों के एक नहीं कई कारण है। सबसे बड़ी समस्या तेज रफ्तार है। नशे में गाड़ी चलाना, ब्रेक फेल, खराब सडक़ें, गड्ढे, बिना हेलमेट पहने चलना, एक बाइक में तीन-चार लोगों का सवार होकर रफ्तार से चलना, ये सब मिलकर मौत को निमंत्रण देते हैं। सडक़ों पर किसान, मजदूर, युवा और महिलाएं सबकी जिंदगी दांव पर है।
अस्पतालों में घायलों की तादाद बढ़ रही है। ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग का सारा जोर टोल टैक्स और जुर्माने से राजस्व बढ़ाने पर है। पर, इसका दुर्घटनाओं के कम होने से सीधा संबंध है ही नहीं। एनएच पर पैट्रोलिंग की कमी है। स्टेट हाईवे पर तो बिल्कुल ही नहीं है। सीसीटीवी, स्पीड ट्रैकिंग कैमरे बहुत कम जगह लगे हैं। वाहनों की फिटनेस को लेकर कोई सख्ती ही नहीं है। ठीक तरह से चेकिंग हो तो हर चौराहे पर ऐसे मालवाहक ड्राइवर मिलेंगे, जिनके पास लाइसेंस ही नहीं हैं या फिर वे नशे में गाड़ी चला रहे हैं। खराब सडक़ें, संकेतकों का अभाव भी बड़े कारण है।
संलग्न तस्वीर कल हुई दुर्घटना की है। दुर्ग से दल्लीराजहरा जा रही बस स्टेयरिंग फेल होने के कारण खाई में गिर गई, जिसमें 20 से अधिक लोग घायल हो गए।


