राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : कांग्रेस की ‘अगली पीढ़ी’
01-Mar-2026 7:52 PM
राजपथ-जनपथ : कांग्रेस की ‘अगली पीढ़ी’

कांग्रेस की ‘अगली पीढ़ी’

प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर ‘अगली पीढ़ी’ की सक्रियता चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। कई वरिष्ठ नेताओं ने सीधे या संकेतों में अपनी राजनीतिक विरासत नई पीढ़ी को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है।

सबसे पहले बात करें तो पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा चुनावी राजनीति से लगभग संन्यास ले चुके हैं और उनके पुत्र पंकज शर्मा की सक्रियता बढ़ी है। वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेन्द्र साहू भी अपने बेटों प्रवीण और यशवंत को आगे बढ़ा रहे हैं। यशवंत जिला पंचायत सदस्य बनकर औपचारिक राजनीतिक भूमिका में आ चुके हैं।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की सक्रियता भी लगातार चर्चा में है। शराब घोटाला प्रकरण में छह माह जेल में रहने के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। वे पहले भी पाटन क्षेत्र में जनसमस्याओं के समाधान को लेकर सक्रिय रहे हैं। हाल ही में उनकी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात ने अटकलों को और हवा दी है कि वे भविष्य में औपचारिक रूप से चुनावी राजनीति में उतर सकते हैं।

इसी तरह नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के बेटे सूरज महंत भी कोरबा लोकसभा और सक्ती विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय नजर आ रहे हैं। हाल ही में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के रायपुर दौरे के दौरान चैतन्य और सूरज, दोनों से अलग-अलग मुलाकात की तस्वीरें वायरल हुईं। सूरज महंत के साथ दिग्विजय सिंह की 1996-97 की एक पुरानी तस्वीर भी सामने आई, जब वे अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे और सूरज एक साल के थे। इस बार भी उनके प्रति स्नेह ने राजनीतिक गलियारों में संभावनाओं को और बल दिया है।

हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी लगभग तीन वर्ष शेष हैं, लेकिन राजनीतिक जमीन तैयार करने की कवायद अभी से शुरू होती दिख रही है। देखना है कि ये युवा चेहरे संगठनात्मक भूमिका में सीमित रहते हैं या सीधे चुनावी अखाड़े में उतरते हैं।

नए विधायक की परेड   

नई विधानसभा में पहले बजट सत्र के पहले सप्ताह परिसर में पक्ष विपक्ष के विधायकों के कृतित्व को लेकर कई बातें सुनने को मिलती रहीं। ऐसा ही एक वाक्या यह भी है -पहली बार बने विधायक को प्रदेश संगठन ने कोई काम करने का निर्देश दिया था। विधायक जी ने आदेश को नजर अंदाज कर दिया, जबकि पूरे प्रदेश में संगठन की बात या निर्देश गंभीरता से लिया जाता है। मगर इसकी गंभीरता को समझने में विधायक जी से चूक हुई या चलता है समझ लिया ये विधायक ही जानते हैं। दूसरी पार्टी से आए राजधानी जिले के ये नए  विधायक जब संगठन मुख्यालय  पहुंचे तो एक प्रमुख वरिष्ठ ने देखते ही जमकर लताड़ लगाई। विधायक की कार्यप्रणाली को जनाकांक्षाओं और संगठन के विपरीत बताने में देर न लगी। इतना ही नहीं उन्होंने जनसेवा की उम्मीद पर खरे न उतरने के वर्किंग परसेंटेज को लेकर एक रिपोर्ट के हवाले से  आईना दिखा दिया । खासकर उनकी लेन-देन की प्रवृत्ति पर। फटकार इतने हाई पिच वाली थी कि चैम्बर के बाहर खड़े लोग भी सहम गए। वहां उपस्थित कई बार के विधायक पूर्व मंत्री ने हस्तक्षेप कर गुस्सा शांत कराया तब कहीं विधायक की सांस पर सांस लौटी। लेकिन अब अगले चुनाव को लेकर चिंता बढ़ गई है।

गिनती के गौधाम और सडक़ों पर दो लाख मवेशी

छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशियों का सवाल एक बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक संकट है। विधानसभा में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने लिखित जवाब में बताया कि प्रदेश में 1,84,993 आवारा मवेशी हैं। यानि लगभग दो लाख पशु सडक़ों, खेतों और बस्तियों में खुले घूम रहे हैं।

लेकिन पशुधन विकास विभाग की गौधाम योजना के तहत सिर्फ 11 गौठानों को गौधाम के रूप में पंजीकृत किया गया है। इनकी कुल क्षमता मात्र 2,200 पशुओं की है। और हैरानी की बात यह कि इनमें से भी केवल तीन गौधाम चालू हैं, जहां अभी सिर्फ 620 पशु रखे गए हैं। यानी समस्या लाखों की और व्यवस्था गिनती के पशुओं की।

सरकारी विभागों के जवाब भी सवाल खड़े करते हैं। गृह विभाग का कहना है कि आवारा मवेशियों से सडक़ हादसों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। कृषि विभाग ने भी फसल नुकसान का कोई मामला सामने न आने की बात कही। जबकि गांवों में किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं और शहरों में सडक़ पर अचानक सामने आ जाने वाले मवेशियों से दुर्घटनाएं आम हैं। कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद ने सदन में इन जवाबों पर असंतोष जताया। उनका कहना था कि जब जमीन पर हालात इतने खराब हैं तो सरकारी आंकड़े इतनी सफाई क्यों दे रहे हैं? मगर, पिछली कांग्रेस सरकार ने गौठान योजना बड़े जोर-शोर से शुरू की थी। उद्देश्य अच्छा था, लेकिन आरोप लगे कि कई जगह गौठान सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए। बजट खर्च हुआ, मगर रखरखाव नहीं हुआ। नतीजा यह हुआ कि पशु फिर सडक़ों पर लौट आए।

दिसंबर 2023 में सत्ता में आई भाजपा सरकार ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर नई दिशा देने का दावा किया। गौठान योजना को नए नाम से गौ अभयारण्य योजना के रूप में पेश किया गया, लेकिन फरवरी 2026 तक उसकी ठोस प्रगति नजर नहीं आती। 

इस बीच किसान अपनी फसल बचाने में परेशान हैं। सडक़ दुर्घटनाओं में लोग हताहत हो रहे हैं। और सबसे दुखद यह कि जिन पशुओं के संरक्षण की बात होती है, वही भूखे-प्यासे इधर-उधर भटक रहे हैं।

सेक्स सीडी कांड: नई कानूनी स्थिति

रायपुर की सीबीआई की विशेष अदालत में चर्चित सेक्स सीडी प्रकरण की सुनवाई जारी है। पहले निचली अदालत ने भूपेश बघेल को आरोपों से मुक्त कर दिया था, लेकिन सेशन कोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें भी अन्य आरोपियों की तरह ट्रायल का सामना करने का आदेश दिया।

23 फरवरी को पूर्व सीएम और अन्य आरोपियों की पेशी निर्धारित थी। सह-आरोपी कैलाश मुरारका अदालत में उपस्थित हुए, जबकि विधानसभा सत्र के कारण पूर्व सीएम उपस्थित नहीं हो सके। अब अगली सुनवाई 12 मार्च को तय की गई है। पूर्व सीएम की ओर से सेशन कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही गई है।

जब तक उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलती, यह मामला उनके लिए राजनीतिक और कानूनी—दोनों मोर्चों पर दबाव बनाए रख सकता है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं दोनों पर नजर रहेगी।

केंद्र में सचिव, यहां से एक भी नहीं

मोदी मंत्रिमंडल की नियुक्ति संबंधी समिति ने शनिवार रात केंद्रीय विभागों, में सचिव के लिए 28, अतिरिक्त सचिव या केंद्रीय उपक्रमों में समकक्ष पदों के लिए देशभर के 41 आईएएस अधिकारियों की इंपैनल सूची जारी कर दी है। इसमें 1990 से 2001 बैच तक के अफसरों को शामिल (कंसीडर)किया गया है। अब जैसे जैसे विभागों में रिक्तयां होंगी इन अफसरों की नियुक्ति होती जाएंगी। इसलिए इंपैनलमेंट की इतनी अहमियत होती है। आश्चर्य की बात है कि चाहे सचिव हो अतिरिक्त सचिव या समकक्ष पदों के लिए छत्तीसगढ़ के  एक भी अधिकारी शामिल नहीं हैं।

बहरहाल हमारे यहां 1994 से लेकर 2001 तक के अधिकारी हैं  जो सचिव, अतिरिक्त सचिव के लिए सभी मापदंड मानकों को पूरा करते हैं। इनमें  सबसे अहम, पूर्व में संयुक्त सचिव पद पर केंद्र में काम करने का अनुभव । इनमें 1994 बैच के दो 2000 -01 बैच के भी अफसर हैं। ये एक और दो बार केंद्र में काम कर चुके हैं। ऐसे में इंपैनल न होना लॉबी में चर्चा का मुद्दा बन गया है।

यह भी बता दें कि केंद्र में इस समय छत्तीसगढ़ से अमित अग्रवाल 93 ,निधि छिब्बर 94 बैच  सचिव के समकक्ष पद पर कार्यरत हैं और  95 बैच के मनिंदर कौर द्विवेदी, गौरव द्विवेदी भी अतिरिक्त सचिव। 97 बैच से सुबोध सिंह, निहारिका सिंह भी हैं दोनों पहले केंद्र में काम कर चुके हैं। इनसे भी वरिष्ठ रेणु पिल्ले 91, सुब्रत साहू 92 भी हैं। तो 2001 बैच से केवल एक शहला निगार हैं ये तीनों पूर्व में कभी केंद्र में पदस्थ नहीं रहे। वैसे इससे पहले, पिछले माह केंद्र में पहली प्रतिनियुक्ति वाले संयुक्त सचिव पद  के लिए भी छत्तीसगढ़ से एक भी अफसर इंपैनल नहीं किए गए थे।

आज सुबह सुबह इन सूचियों की जानकारी देने वाले एक अफसर ने ही बताया कि मोदी 2.0 के अंतिम वर्षों में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर एक संशोधन किया था कि केंद्र चाहे तो इंपैनलमेंट के इतर भी राज्यों से अफसर बुला सकता है। सो इन बैच के अफसरों के लिए सीधी एंट्री का अवसर अभी है। देखना होगा कि इस मापदंड में किस अफसर की लॉटरी लगती है।


अन्य पोस्ट