राजपथ - जनपथ
सरकारी दफ्तर बिजली बचाएंगे ?
केंद्र सरकार की रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम -आरडीएसएस के तहत देशभर में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। उद्देश्य यह बताया गया है कि बिजली वितरण कंपनियों- डिस्कॉम की तकनीकी और एटीएंडसी लॉस को 12 से 15 फीसदी तक कम किया जाए, बिलिंग अधिक दक्षता के साथ हो और बिजली कंपनियों को घाटे से बाहर लाया जाए। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के पिछले माह के अपडेट्स से पता चलता है कि देशभर में 24 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य दिसंबर माह के अंत तक रखा गया था लेकिन सिर्फ 4 करोड़ 76 लाख लग पाए हैं। छत्तीसगढ़ में करीब 59-60 लाख उपभोक्ता हैं। सिंचाई के लिए बिजली लेने वाले किसानों को छोडक़र सभी घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक और सरकारी संस्थाओं में स्मार्ट मीटर लगाया जाना है। मामला सरकार के राजस्व में वृद्धि से जुड़ा है, इसलिये देर-सबेर लक्ष्य तो पूरा कर ही लिया जाएगा। यहां 47 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।
स्मार्ट मीटर प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह से काम करेंगे। ये मीटर रियल-टाइम में खपत रिकॉर्ड करते हैं और डेटा सीधे डिस्कॉम को भेजते हैं। मैनुअल रीडिंग की जरूरत नहीं पड़ती। दावा है कि इससे गलत बिलिंग और चोरी कम हो जाएगी। प्रीपेड मोड में रिचार्ज खत्म होने पर बिजली अपने आप कट जाएगी।
अब छत्तीसगढ़ सरकार ने तय किया है कि सरकारी विभागों में प्री-पेड आधार पर बिजली सप्लाई की जाएगी। इस समय सरकारी विभागों का बिजली डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पर करीब 3000 करोड़ का बकाया है। इनमें से दो तिहाई- करीब 2000 करोड़ नगरीय निकायों का ही है, जिनकी वित्तीय स्थिति कभी अच्छी नहीं रही। प्री-पेड लागू होने के बाद विभागों को न केवल पिछला बकाया जमा करना होगा, बल्कि बिजली कटने से पहले रिचार्ज भी कराना होगा। तीन हजार करोड़ इतनी भारी भरकम राशि है कि इसके लिए संभवत: बजट में अलग से प्रावधान करना पड़े। ये बकाया दो चार महीनों का नहीं- सालों का हो सकता है। हर माह बिजली की बिलिंग होती है। तय समय पर राशि जमा नहीं करने पर सरचार्ज बढ़ाया जाता है। खपत की गई यूनिट का स्लैब भी महंगे दर में चला जाता है। पर, विभागों के प्रमुखों को इसकी परवाह नहीं होती- क्योंकि उन्हें रकम जेब से नहीं भरनी होती। यदि वास्तव में यह व्यवस्था लागू हो गई तो जिस तरह वेतन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से किया जाना होता है- स्मार्ट मीटर को रिचार्ज करने के लिए भी करना होगा। शायद बिजली की खपत में कुछ अनुशासन दिखे और साहबों के खाली चेंबर के एसी चालू न मिलें।
बच्चों का स्टार्ट-अप बिजनेस

कोरबा जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतरेंगा की ओर जाते रास्ते में रविवार को सडक़ किनारे एक छोटी-सी दुकान ने पर्यटकों का ध्यान खींच लिया। चार नन्हे बच्चे जमीन पर बोरी बिछाकर मौसंबी बेचते दिखे। मुस्कान, आत्मविश्वास और मेहनत के जज्बे के साथ।
खेल-कूद की उम्र में ये बच्चे बाजार, लागत, मुनाफा और साझेदारी को व्यवहार में उतार रहे हैं। बच्चों ने बताया कि छुट्टी का दिन है। चारों ने अपनी-अपनी जेब से थोड़े-थोड़े पैसे मिलाए- कुछ किलो मौसंबी खरीदी। अब वही फल 10-20 रुपये की चिल्हर में राहगीर, पर्यटकों को बेच रहे हैं। जो भी कमाई होगी, उसे आपस में बराबर बांट लेंगे। जब ‘स्टार्ट-अप’ शब्द बड़े शहरों और कॉर्पोरेट से जुड़ा लगे, तब ये ग्रामीण बच्चे बिना ऐप-इंटरनेट के अपने दम पर अपनी क्षमता प्रदर्शित रहे हैं।
फेसबुक ने मजबूरी में बनाए औजार

फेसबुक पर लोग अपने को नापसंद पोस्ट को सामने से हटा सकते हैं, ताकि वह दुबारा न दिखे। इससे भी अधिक जो नापसंद हो, उसे पोस्ट करने वाले व्यक्ति की किसी भी पोस्ट को 30 दिन के लिए सामने आने से रोका जा सकता है। इसके बाद भी जो लोग न सुधरें, उन्हें अनफॉलो किया जा सकता है, ताकि उनकी कोई भी पोस्ट न दिखे। और अगर इससे भी ज्यादा आपत्तिजनक पोस्ट है, तो उस पोस्ट की शिकायत फेसबुक से की जा सकती है। लेकिन अगर इसके बाद भी बात न बने, तो ऐसे किसी व्यक्ति या पेज को पूरी तरह से ब्लॉक किया जा सकता है।
फेसबुक से यह पूछा गया कि इतने तरह के नकारात्मक विकल्प उसने क्यों बनाए हैं, तो उसने कहा कि हिन्दी के लेखकों की किताब जब आती हैं, तब वे जिस अंदाज में उसके बारे में पोस्ट करते हैं, उससे बचने के लिए लोगों की मांग पर फेसबुक को ये औजार बनाने पड़े।
नई विधानसभा में सबसे पहले
1 नवंबर को उद्घाटित छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन में पहले शीतकालीन सत्र का आज विधिवत पहला दिन था। इस मेडन (पहले)अवसर पर पहली-पहली कार्यवाही को लेकर विधायक, स्पीकर ने अपने अपने तरीके से उद्धृत किया। जैसे पहला प्रश्न काल, उसमें पहला प्रश्न, उत्तर देने वाले पहले मंत्री आदि आदि। क्योंकि यह सारे तथ्य नए भवन में नया इतिहास में दर्ज होने हैं। आज का पहला प्रश्न भाजपा के वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने महिलाओं की शुचिता पर सेनेटरी नैपकिन से जुड़ा प्रश्न पूछा। पहला जवाब महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दिया। यह उल्लेख स्वयं कौशिक ने किया। इस पर स्पीकर रमन सिंह ने कहा पहला दिन पहला प्रश्न एक तरफ धर्म, दूसरी तरफ लक्ष्मी। कुछ ऐसा ही संयोग रोजगार कौशल विकास मंत्री गुरू खुशवंत के साथ भी जुड़ा। तीन माह पहले मंत्री बने खुशवंत का आज पहला प्रश्नकाल वह भी नए भवन में। स्पीकर ने कहा -गुरू खुशवंत मंत्री बनने के बाद पहली बार उत्तर देने जा रहे हैं। प्रश्न कर्ता सदस्य लखेश्वर बघेल वरिष्ठ विधायक हैं। बघेल जी अच्छा प्रश्न करिए, और अच्छे से जवाब लीजिए। इस पर भाजपा के अजय चंद्राकर ने कहा कि लखेश्वर जैसे ही प्रश्न का मैं 5 साल तक उमेश पटेल (पूर्व मंत्री) से जवाब नहीं ले पाया। उमेश जी ने बेरोजगारों को ठगा था।


