राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : अभी तो भृत्य है लेकिन...
01-Jan-2025 3:05 PM
राजपथ-जनपथ : अभी तो भृत्य है लेकिन...

अभी तो भृत्य है लेकिन...

एक माह पहले ही हमने वर्ष 23 यूपीएससी बैच में सफल अभ्यर्थियों के जीवन संघर्ष की खबरें पढ़ीं। देशभर के इन आठ सौ युवाओं में कोई कुली, कोई डिलीवरी ब्वाय तो कोई भृत्य रहा है। इस वर्ष यानी वर्ष 24 के बैच में भी हमारे अपने छत्तीसगढ़ से भी  एक ऐसा ही संघर्षशील युवा सफलता की चौखट पर खड़ा है। 

हाल में यूपीएससी फाइनल के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। वह इन दिनों दिल्ली में है। अब इन सफल अभ्यर्थियों के इंटरव्यू होने हैं। सफल होते ही यह भी यूपीएससी पास आउट अफसर हो जाएगा। उसकी सफलता आईएएस, आईपीएस आईएफएस या अन्य किसी सेवा में होगी यह लिस्ट बताएगी। वैसे यह युवा सीजी पीएससी पास आउट भृत्यों के पहले बैच का 
कर्मचारी है। 

अपने लक्ष्य को हासिल करने उसने चपरासी की नौकरी करना स्वीकार किया। उसे जानने वाले साथी कर्मचारी बस सफलता की कामना कर रहे हैं। इसकी एक साथी महिला भृत्य ने भी सीजी पीएससी दी थी। बस कुछ दशमलव अंकों से पिछड़ गई। पर ससुर की इच्छा पूरी करने उसने भृत्य ही सही सरकारी नौकरी को ज्वाइन किया। लेकिन वह भी अपने लक्ष्य को हासिल करने में जुटी है। वैसे एक और गुदड़ी के लाल है यह भी पीएससी में ही चपरासी रहकर अब अफसर हो चुका है।

प्रशासक-युग की तैयारी 

प्रदेश के दस नगर निगमों में इस हफ्ते के आखिरी में प्रशासक नियुक्त कर दिए जाएंगे। यानी निगम आयुक्त प्रशासक की भूमिका में होंगे। इसी तरह नगर पालिकाओं, और नगर पंचायतों में भी सीएमओ सक्षम प्राधिकारी होंगे। जिन 172 निकायों में चुनाव की तैयारी चल रही है, वहां मौजूदा निर्वाचित पदाधिकारियों का कार्यकाल छह जनवरी को खत्म हो रहा है। अब अगले एक महीने तेजी से विकास कार्य कराने की योजना बनाई गई है ताकि चुनाव में इसका फायदा मिल सके। 

प्रदेश के सभी नगर निगमों, और ज्यादातर नगर पालिका व पंचायतों में कांग्रेस का कब्जा है। निर्वाचित पदाधिकारियों के पद मुक्त होने की स्थिति में स्थानीय भाजपा सांसद, और विधायकों का निकायों में दखल बढ़ेगा। डिप्टी सीएम अरुण साव ने सभी निकायों के अधिकारियों को वार्डों में जाकर जन समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। फरवरी में निकाय चुनाव के संकेत हैं। ऐसे में प्रशासक के जरिए अपने-अपने वार्डों में काम कराने के लिए भाजपा के नेता सक्रिय दिख रहे हैं। चुनाव में इसका कितना फायदा मिलता है, यह तो आने वाले समय में पता चलेगा। 

धान खरीदी की इकोनॉमी

धान खरीदी के साथ जगह-जगह ‘अवैध धान’ भंडारण पर छापेमारी भी चल रही है। मंडी, खाद्य और राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारी व्यापारियों और किसानों के घर  से जब्ती केस बना रहे हैं। कोई धान अवैध कैसे हो जाता है? धान तो किसानों का उगाया ही है। दूसरे राज्यों से जुड़े जिलों की बात तो समझ में आती है, पर उन शहर गांवों से भी जब्त किए जा रहे हें जहां दूसरे राज्यों के धान नहीं आ सकते। आज की खबर को ही लें तो करीब 4 हजार बोरियां प्रदेश के विभिन्न कोचियों, गल्ला व्यापारियों और किसानों से जब्त की गई। सरकार समर्थन मूल्य के साथ बोनस मिलाकर करीब 3100 रुपये का भुगतान करती है। फिर उनका धान इन गल्ला व्यापारियों के पास कैसे पहुंच रहा है? वे तो 3100 रुपये नहीं देते होंगे। जरा इसकी वजह जान लें। व्यापारी 2200 रुपये से अधिक में धान नहीं खरीद रहे हैं, मगर भुगतान हाथों-हाथ कर रहे हैं। सोसायटी में धान बेचना हो तो दस तरह के लफड़े हैं। पंजीयन, आधार कार्ड, टोकन और इंतजार। भुगतान में समय भी लगेगा। छोटे किसान जिन्हें तत्काल नगदी चाहिए वे पंजीयन नहीं कराते। उनका धान बिचौलियों के पास जाता है। थोड़ा सा ही धान तो बेचना है, फिर क्यों इतनी प्रक्रियाओं से गुजरें, वे उनको बेच देते हैं जो घर आकर तौलकर पूरा पैसा हाथों-हाथ दे देते हैं। एक दूसरा विकास भी धान पर सरकारों के ध्यान के चलते हुआ है। लोग ज्यादा से ज्यादा धान उगा रहे हैं। सरकार ने अधिकतम 21 क्विंटल धान प्रति एकड़ खरीदने की मंजूरी दी है। पर बहुत से किसान 22-25 और यहां तक कि 30 क्विंटल धान प्रति एकड़ उगा रहे हैं। बचे हुए धान का वे क्या करेंगे? वे भी बिचौलियों को अपने खलिहान में बुला लेते हैं। सरकार दावा करती है किसान का एक-एक दाना खरीदेंगे, जरा किसानों से पूछें-वे क्या बोलते हैं। तकनीक के विकास ने उन्हें ज्यादा धान उगाने का रास्ता दे दिया है। मगर, खरीदी की लिमिट तय हो गई है। यही धान बिचौलियों और गल्ला व्यापारियों से जब्त किया जा रहा है। समस्या नीतिगत है।

ऐसा भी वैवाहिक निमंत्रण पत्र

आप असहमत हों तो कोई बात नहीं। मगर, शादी-ब्याह के निमंत्रण में दिए संदेशों पर जरूर गौर करें। प्रेषक ने अपनी सारी धारणाओं, विचारों की दिशा को इसके मुखड़े पर अंकित कर दिया है। कह रहे हैं- जय जवान, जय किसान, जय इंसान। पाखंड और प्रदूषण मुक्त शादी, बिना पुजारी, बिना यज्ञ-हवन। खेत हमारे मंदिर हैं, अन्न हमारा भगवान। किसान आंदोलन सदियों तक याद रखेंगे। साथ में भगत सिंह का एक कोट- दुनिया का सबसे बड़ा अंधविश्वास ईश्वर पर विश्वास रखना है। जैसा कि निमंत्रण पत्र से मालूम होता है, यह अनोखी शादी हरियाणा में हो रही है।  

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