राजपथ - जनपथ
अपनों ने ही घेरा
सरकार के एक मंत्री अपने ही दल के लोगों के आरोपों से खफा हैं। दल के नेता ही मंत्री जी पर सोशल मीडिया के जरिए भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। न सिर्फ सीनियर नेता बल्कि पार्टी के विधायक भी विधानसभा में उन्हें घेरने से पीछे नहीं रहे हैं।
मंत्री जी को अपने ही दल के लोगों के दबाव के चलते भ्रष्टाचार की शिकायतों पर एक्शन लेना पड़ा, और जांच की घोषणा भी की। बावजूद इसके पार्टी के लोग अलग-अलग स्तरों पर मंत्री जी के विभागों में भ्रष्टाचार पर उंगलियां उठा रहे हैं।
इन सबसे तंग आकर मंत्री जी ने अपने ही दल के कुछ लोगों को यह कहते सुने गए, कि घर से चावल मंगाकर खा रहा हूं, इसके बाद भी अपने लोग आरोप लगा रहे हैं। यह ठीक नहीं है। ये अलग बात है कि संगठन के प्रमुख पदाधिकारी मंत्री जी की कार्यशैली से संतुष्ट हैं। फिर भी ‘अपने’ आलोचना करेंगे, तो दिल दुखता ही है।
पुलिस ही नहीं, वन भर्ती में भी गडबडिय़ां
राजनांदगांव जिले में पुलिस आरक्षक भर्ती में गड़बड़ी उजागर होने पर भर्ती रोक दिए जाने के बाद वन विभाग में हुई वनरक्षकों की भर्ती भी संदेहों के घेरे में आ गई है। इस भर्ती को लेकर इस माह के शुरू में राजधानी समेत सभी पांच सीएफ रेंज में हुए फिजिकल टेस्ट के दौरान कई तरह की गड़बडिय़ां सामने आईं थी। इन्हें सबसे पहले छत्तीसगढ़ ने सिलसिले वार प्रकाशित किया था। कुछ रेंज में तो वन संरक्षक और डीएफओ ने अखबारनवीसों का परीक्षा स्थल पर प्रवेश पर ही रोक लगा दी थी। इसने शंका और बढ़ा दी। रायगढ़ में तो फिजिकल टेस्ट मशीनें खराब होने पर अभ्यर्थियों को दोबारा 9 दिसंबर को बुलाया गया। तो सैकड़ों अभ्यर्थी गृह जिले के टेस्ट में असफल होने के बाद दूसरे रेंज यहां तक की रायपुर में भी टेस्ट दिया।
वन रक्षक भर्ती के लिए वन विभाग ने हैदराबाद की टाइमिंग टेक्नोलॉजी कंपनी से अनुबंध किया था। इसी फर्म ने पहले वन और फिर पुलिस भर्ती के लिए डिजिटल उपकरण मुहैया कराए थे। हालांकि वन विभाग में भर्ती प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है, मगर जिस तरह की गड़बड़ी आरक्षक भर्ती में हुई है उसे देखते हुए वन विभाग में भी डाटा की जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। 1484 वनरक्षकों की भर्ती प्रक्रिया हुई और इसमें 4,32,841 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। इनमें सर्वाधिक उम्मीदवार बिलासपुर सर्किल में हुई भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए। इन उपकरणों में तकनीकी खराबी के चलते अभ्यर्थियों को जूझना पड़ा था। कोरबा जिले के कटघोरा में लॉन्ग जंप के इवेंट में पहले अटेम्प्ट में ही सफल होने के बाद भी कई अभ्यर्थियों को दोबारा कूदने को कहा गया। महिला अभ्यर्थी जमुना सारथी ने बताया कि इस गड़बड़ी के कारण वह 9वें अटेम्प्ट में अपना टेस्ट कंप्लीट कर पाई। मेरा स्टैमिना पूरी तरह से डाउन हो गया था। थक चुकी थी, इसलिए मेरे अंक कम हो गए।
एक अन्य अभ्यर्थी गोमती ने बताया कि जब मैने गोला फेंका तो इसकी दूरी के आधार पर मशीन से 20 अंक मिले। बाद में जब मुझे रिजल्ट दिया गया, तब पता चला कि 15 ही अंक मिले हैं। मुझे बताया गया कि तकनीकी खामी की वजह से ऐसा हो रहा है। दोबारा फेंकने को भी कहा गया। इससे प्रदर्शन पर असर पड़ा है। आपत्ति करने पर मौजूद अधिकारियों ने कहा कि जब रिजल्ट निकलेगा, तब आपत्ति लगा देना। इससे पहले एग्जाम सिस्टम ही बार बार बदलने की शिकायत अभ्यर्थी करते रहे हैं।
पहले कहा गया कि फिजिकल टेस्ट के बाद व्यापमं लिखित परीक्षा लेगा। फिर कहा गया कि परीक्षा नहीं होगी। बार बार सिस्टम बदल कर विभाग के अफसरों ने पूरी भर्ती को विवादास्पद बना दिया। अब इन सभी तथ्यों को लेकर कुछ अभ्यर्थी कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
अभी सिर्फ समर्थन मूल्य...
प्रदेशभर में इस समय धान खरीदी उत्सव जोर-शोर से चल रहा है। किसानों को उनके बेचे गए धान का भुगतान भी किया जा रहा है। सरकार ने सभी कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों के खातों में जल्द से जल्द राशि पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सहकारी बैंकों को भी इस दिशा में मुस्तैद रहने के लिए कहा गया है।
मगर, भुगतान प्रक्रिया में एक पेच अभी भी बरकरार है। किसानों को फिलहाल केवल समर्थन मूल्य, यानी 2300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान हो रहा है। सरकार का वादा किसानों को कुल 3100 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ एक किश्त में देने का था। सहकारी बैंकों के अनुसार शेष राशि मार्च के अंत तक, यानी इसी वित्तीय सत्र में, वितरित की जाएगी। अब तक की जानकारी के अनुसार, लगभग 13 लाख से अधिक किसानों को 14 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। लगभग 65 लाख टन धान की खरीदी हो चुकी है, जबकि 160 लाख टन खरीदी का अनुमान है।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में धान बोनस का भुगतान चार किश्तों में किया जाता था। इसके चलते साल में चार बार समारोह आयोजित होते थे, जिससे सरकार को अपनी उपलब्धि प्रदर्शित करने का अवसर मिलता था। किसानों से चार बार वाहवाही मिलती थी। अब देखना यह है कि भाजपा सरकार बोनस का भुगतान खामोशी से निपटाएगी या इसके लिए प्रदेशभर में कांग्रेस सरकार की तरह ही समारोहों का आयोजन करेगी।
सांता क्लॉज की एआई तस्वीर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के बढ़ते प्रसार ने इंटरनेट पर अनगिनत कल्पनात्मक तस्वीरों को जन्म दिया है। अब नरेंद्र मोदी, डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया की अन्य प्रसिद्ध हस्तियों की ऐसी तस्वीरें और वीडियो तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें असली और नकली छवि का फर्क करना मुश्किल हो गया है।
हाल ही में क्रिसमस के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक वायरल तस्वीर ने इसी प्रवृत्ति को दिखाया। एक यूजर ने दावा किया कि एक बच्चे ने मूंगफली से सांता क्लॉज बनाया है। इस पर कई लोगों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी कि तस्वीर असली नहीं, बल्कि यह एआई की मदद से बनाई गई है।
शुक्र है, असली और एआई-निर्मित छवियों के बीच कुछ खास अंतर होते हैं, जिन्हें पहचानकर आप नकली तस्वीरों का पता लगा सकते हैं। एआई-निर्मित छवियों में अक्सर फिंगर, बालों की बनावट, या कपड़ों के पैटर्न जैसे छोटे विवरण गड़बड़ हो सकते हैं। वास्तविक तस्वीरों में प्रकाश और छाया का संतुलन प्राकृतिक होता है, जबकि एआई-निर्मित तस्वीरों में यह असामान्य लग सकता है। एआई छवियों में पृष्ठभूमि अक्सर असंगत या अधूरी दिखाई दे सकती है। रिवर्स इमेज सर्च और डीपफेक डिटेक्टर जैसे टूल्स वास्तविकता जांचने के लिए इंटरनेट पर मौजूद हैं। एआई की क्षमताएं अद्भुत हैं, लेकिन उनकी सीमाओं को समझना और वास्तविकता से कल्पना को अलग करना इंटरनेट यूजर्स के लिए एक जरूरी कौशल बन गया है।


