राजनांदगांव
बाजा-धुमाल पर भी प्रतिबंध लगाने समाज ने सौंपा ज्ञापन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 11 जून। मोहर्रम पर्व के दौरान शेर बनकर गली-मोहल्लों में नाचने-गाने के वर्षों पुराने रिवाज पर मुस्लिम समाज ने प्रतिबंध लगाने की मांग की है। समाज के पदाधिकारियों का दावा है कि उक्त परंपरा इस्लामी शिक्षा और शरीयत का हिस्सा नहीं है। समाज की ओर से पर्व के दौरान डीजे-धुमाल बजाने पर भी रोक लगाने की मांग की है। समाज की ओर से बुधवार को पुलिस विभाग को बकायदा ज्ञापन सौंपा गया।
मिली जानकारी के मुताबिक समाज के अध्यक्ष रईस अहमद शकील और अन्य प्रमुख सामाजिक लोगों ने एएसपी कीर्तन राठौर से मिलकर एक ज्ञापन सौंपकर मोहर्रम के दौरान शेर बनकर नाचने-गाने की परंपरा को इस्लाम से विपरीत बताते हुए तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
समाज का कहना है कि इस्लाम में कहीं भी शेर बनकर नाचने का जिक्र नहीं है। समाज इसका विरोध करता है। पर्व में शेर बनकर नाचने वालों में ज्यादातर लोग हुडदंगी मिजाज के होते हैं। ऐसे में अशांति फैलने की आशंका भी होती है। साथ ही महिलाओं के साथ छेडख़ानी जैसी घटनाएं भी होती है। समाज ने कहा कि राजनांदगांव की सांसारिक माहौल में ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है। इस पर रोक लगने से कई तरह की सामाजिक कुरीतियां भी स्वमेव समाप्त हो जाएगी। ज्ञापन सौंपने वालों में अब्दुल रसीद खान, मोहम्मद हसन समेत अन्य लोग शामिल थे।


