राजनांदगांव

हड़ताल से दूसरे दिन भी सरकारी कामकाज और स्कूलों की पढ़ाई रही चौपट
30-Dec-2025 6:47 PM
हड़ताल से दूसरे दिन भी सरकारी कामकाज और स्कूलों की पढ़ाई रही चौपट

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 30 दिसंबर।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर दूसरे दिन भी हड़ताल से सरकारी कामकाज और स्कूलों की पढ़ाई चौपट रही।

फेडरेशन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी लागू करने की मांग लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलनरत है। फेडरेशन का आरोप है कि सरकार सिर्फ शब्दों का जाल फेंककर अपना काम साध रही है। जबकि भाजपा सरकार ने कर्मचारियों के हितों को लेकर किसी भी तरह की टकराव की स्थिति पैदा नहीं होने का आश्वासन दिया था। स्थानीय जिला कार्यालय के सामने फ्लाई ओवर के नीचे आज दूसरे दिन भी आंदोलन करते हुए कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की। फेडरेशन ने तीन दिनी हड़ताल का ऐलान किया है।
हड़ताल के कारण कलेक्टोरेट के सभी विभागों में सन्नाटा पसरा हुआ है। साथ ही स्कूलों में शिक्षकों के हड़ताल में शामिल होने से अध्यापन चौपट हो गया है। यह हड़ताल ऐसे वक्त में बुलाई गई है, जब अगले एक माह बाद फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं प्रारंभ होगी। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को हड़ताल से पढ़ाई में काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

फेडरेशन के जिला संयोजक सतीश ब्यौहारे का आरोप है कि मोदी गारंटी लागू करने के लिए मुख्यमंत्री को जुलाई में ज्ञापन सौंपा गया था, उस पर कोई विचार नहीं किया गया। वादा खिलाफी के कारण कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा। कर्मचारियों की मांग में विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान प्रदेश के कर्मचारियों के लिए मोदी की गारंटी का घोषणा हुआ था। सरकार बनने पर प्रदेश के शासकीय सेवकों एवं पेंशनरों को केन्द्र के समान डीए/डीआर दिया जाएगा, लंबित डीए एरियर्स की राशि को कर्मचारियों के जीपीएफ खाते में समायोजित किया जाएगा, अनियमित/संविदा/दैनिक वेतनभोगी/अतिथि शिक्षक इत्यादि संवर्ग का नियमितीकरण किया जाएगा, प्रदेश के सहायक शिक्षकों का वेतन विसंगति दूर किया जाएगा, प्रदेश के लिपिकों, सहायक शिक्षकों एवं अन्य संवर्ग के लिए  वेतन विसंगति दूर करने गठित पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण, मितानिनों, रसोईया एवं सफाई कर्मचारियों के मानदेय में 50 प्रतिशत वृद्धि किया जाएगा सहित अन्य मुद्दों का वादा किया, लेकिन सरकार बनने के बाद क्रियान्वयन पर मौन धारण करना कर्मचारियों में आक्रोश का कारण बना हुआ है।
 


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