राजनांदगांव

सरकार ने खरीदा सवा लाख किसानों से 15 सौ करोड़ का धान
31-Jan-2026 2:53 PM
सरकार ने खरीदा सवा लाख किसानों से 15 सौ करोड़ का धान

 ढाई माह चली खरीदी सीजन में 11 लाख क्विंटल अवैध धान जब्त
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 31 जनवरी।
किसानों से समर्थन मूल्य  पर धान खरीदी की सरकारी प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इस सीजन में तय लक्ष्य से धान की खरीदी कम हुई है। इसके पीछे अलग-अलग वजह बताया जा रहा है। जिसमें प्रमुख रूप से पैदावार में गिरावट और रकबा घटना शामिल है। इधर सवा लाख किसानों से सहकारी समितियों के माध्यम से सरकार ने तकरीबन 15 सौ करोड़ रुपए का धान खरीदा है। धान खरीदी के दौरान बार्डर में प्रशासन की कड़ी निगरानी रही। नतीजतन प्रशासन ने 11 लाख क्विंटल की अवैध धान की खेप भी बरामद की है। जिसकी कीमत लगभग 4 सौ करोड़ रुपए आंकी गई है। बहरहाल इस सीजन की धान खरीदी पूरी तरह से खत्म हो गई है।

मिली जानकारी के मुताबिक जिले में ढ़ाई माह तक चले धान खरीदी को प्रशासन ने महाभियान का नाम दिया था। जिसके चलते 62 लाख 53 हजार 504 क्विंटल की खरीदी की गई। इसके एवज में सरकार ने  1484.57 करोड़ रुपए किसानों के खाता में डाला।  बताया जा रहा है कि सरकार ने धान खरीदी के दौरान लिकिंग से किसानों के कर्ज की भी वसूली की है। प्रशासन ने समूचे जिले के सीमावर्ती इलाके में एक विशेष अभियान को धान खरीदी की आखिरी दिनों तक जारी रखा। इस वजह से कई बिचौलियों और कोचियों को अवैध धान बेचने के मामले में सलाखों के पीछे भी भेजा गया।

इस तरह 363 करोड़ रुपए का अवैध धान प्रशासन ने जब्त किया है। यह अब तक का सबसे बड़ी कार्रवाई है। प्रशासन की सख्ती से बिचौलियों और कोचियों को इस बार हाथ मलते रहना पड़ गया। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 15 नवंबर  2025 से 31 जनवरी 2026 तक लगभग ढ़ाई माह की एक अवधि धान खरीदी के लिए निश्चित की थी। खरीदी के दौरान इस बार अव्यवस्था की भी स्थिति रही। मसलन कई दिनों तक टोकन हासिल करने के लिए किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ा। यही कारण है कि कई किसानों ने सोसाइटियों के बजाय बिचौलियों को धान बेचना उचित समझा।
जिले में अवैध धान खपाने के मामले में 243 प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं।  अन्य राज्यों से धान खपाने की कोशिश करने वालों से  लगभग 43 हजार 900 क्विंटल धान जब्त किया गया। जिसकी कीमत लगभग 13.60 करोड़ रुपए है। वहीं 50 से ज्यादा वाहन भी जब्त किए गए हैं। कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने खरीदी के दौरान लगातार मातहतों के जरिये निगरानी रखी। इस वजह से परिणाम बेहतर आए। साथ ही 71790 किसानों ने स्वेच्छा से 55790 एकड़ रकबे का समर्पण किया। इसी के साथ ही धान की खरीदी समाप्त हो गई।


 


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