रायपुर

साय ने कहा - यह प्रदेश की प्रतिभा और विरासत को राष्ट्रीय सम्मान मिलने का क्षण
31-May-2026 7:22 PM
साय ने कहा - यह प्रदेश की प्रतिभा और विरासत को राष्ट्रीय सम्मान मिलने का क्षण

मन की बात में गूंजा छत्तीसगढ़ का गौरव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 31 मई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी स्थित  निवास कार्यालय में जनप्रतिनिधियों,  के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134वीं कड़ी सुनी।  प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव ने जगदलपुर क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने बालोद में, प्रदेश महामंत्री पवन साय ने अबुझमाढ़ के इरकभट्टी में सुना। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज की कड़ी छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व, प्रेरणा और आत्मविश्वास का क्षण बन गया, क्योंकि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय मंच से प्रदेश की प्रतिभा और सांस्कृतिक धरोहर दोनों का उल्लेख कर पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान बढ़ाया है।

साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने आज जशपुर जिले के छोटे से गांव घुइटांगर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीीय स्तर पर पहचान बनाने वाले युवा धावक अनिमेष कुजूर की उपलब्धि का उल्लेख कर प्रदेश के युवाओं को यह संदेश दिया है कि सीमित संसाधन किसी प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं सकते, यदि उसके भीतर लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत का जुनून हो।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री मोदी ने अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह  से फोन पर संवाद करते हुए उल्लेख किया कि पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में महज दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा और इसे उन्होंने खेलों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का अद्भुत उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के अनिमेष कुजूर ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.15 सेकंड में पूरी कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है और राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए क्वालीफाई कर प्रदेश तथा देश का गौरव बढ़ाया है।   मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण, बेहतर खेल अधोसंरचना और अवसर उपलब्ध कराने  निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज  प्रधानमंत्री मोदी ने बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक मल्हार में ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत प्राप्त दुर्लभ ताम्र-पट्टिकाओं का उल्लेख किया जाना भी छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 1400 से 1500 वर्ष पुरानी मानी जा रही ये ताम्र-पट्टिकाएं पांडुवंशी शासनकाल, विशेष रूप से महर्षि बालार्जुन काल से जुड़ी मानी जा रही हैं, जो उस समय की शासन व्यवस्था, संस्कृति, धर्म और सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई यह धरोहर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा का सशक्त प्रमाण है।

इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन दीपक म्हस्के सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी  उपस्थित  थे।


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