रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 31 मई। फेसबुक पर बनी एक महिला दोस्त ने 6 दिनों में ही महालेखाकार कार्यालय में पदस्थ अकाउंटेंट को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया । जो एक साइबर ठग निकली। अपने गिरोह के साथ मिलकर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर उनसे 16 लाख रुपए से अधिक ठग लिए।
पुरानी विधानसभा पुलिस के मुताबिक सड्डू स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी शंकर बोस महालेखाकार कार्यालय में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने शिकायत में बताया कि इसी वर्ष 5 फरवरी को फेसबुक पर काव्या चौधरी नाम की युवती की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। युवती ने खुद को क्रिप्टोकरेंसी निवेश अच्छी कमाई करने वाली बताते हुए शंकर को निवेश करने की सलाह दी।
कुछ दिनों बाद युवती ने शंकर को अपना व्हाट्सएप नंबर साझा किया और हर्षद करवा नामक व्यक्ति से संपर्क करने कहा। हर्षद ने उन्हें हृद्बठ्ठष्शद्बठ्ठ.ष्शद्व नामक प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने का प्रस्ताव दिया। काव्या ने दावा किया कि निवेश करने पर कम समय में भारी मुनाफा मिलेगा। शुरुआत में पीडि़त से कमीशन के नाम पर छोटी-छोटी रकम जमा कराई गई। 11 से 25 फरवरी के बीच अलग-अलग व्यक्तियों के खातों में 10 हजार, 33 हजार, 88 हजार, एक लाख, 69 हजार और 80 हजार रुपये ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद आरोपियों ने निवेश बढ़ाने और लाभ सुरक्षित करने का झांसा देकर लाखों रुपये जमा कराना शुरू कर दिया।
शंकर के अनुसार 2 मार्च को उनसे चार लाख रुपये और 18 मार्च को पांच लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से जमा कराए गए। आरोपियों ने इसे सिक्योरिटी वेरिफिकेशन और कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया का हिस्सा बताया। इसके बाद भी अलग-अलग खातों में 50 हजार, डेढ़ लाख, 90 हजार, 12 हजार 320 और 24 हजार 786 रुपये जमा कराए गए। जब शंकर बोस ने 26 मार्च के बाद अपने निवेश और मुनाफे की राशि निकालने की इच्छा जताई तो आरोपियों ने निकासी रोक दी। उन्हें बताया गया कि राशि प्राप्त करने के लिए और शुल्क जमा करना होगा। लगातार नई मांगें सामने आने पर उन्हें शक हुआ और उन्होंने भुगतान बंद कर दिया।
शिकायत में शंकर बोस ने बताया कि आरोपियों के झांसे में आकर उन्होंने कई भुगतान बैंक से ऋण लेकर किए थे। अब उन पर ईएमआई का बोझ है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटी हृदय संबंधी बीमारी से पीडि़त है जबकि पत्नी का इलाज न्यूरोलॉजिस्ट की देखरेख में चल रहा है। ऐसे में ठगी के कारण परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया है।


