रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 अप्रैल। राजधानी समेत प्रदेश के कई जिलों में देशी शराब की दुकानों पर ताला लग गया है। सरकार के निर्णय अनुसार प्लास्टिक की बोतलें उपलब्ध न होने से यह स्थिति 1 अप्रैल से ही बनी हुई है। इससे देशी शराब के राजस्व पर बड़ा असर पड़ा है।
देशी शराब के शौकीनों ने बताया कि बाटलिंग की समस्या 5 अप्रैल के बाद से दुकानों में देशी शराब नहीं मिल रही है। विवाद से बचने सेल्समेन देशी काउंटर बंद करने लगे थे। अब तो प्लास्टिक बोतलों में सप्लाई तक देशी की दुकान बंद की जाने लगी है। शौकीन मजबूरी में महंगी अंग्रेजी शराब से तरावट ला रहे हैं। इससे अंग्रेजी कोटे का राजस्व बढ़ रहा है।
पिछले दिनों आबकारी सचिव पी.एस. एल्मा ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में बताया कि सरकार ने 1 अप्रैल से कांच की जगह प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री का निर्णय लागू किया था, लेकिन निर्माताओं ने अतिरिक्त समय की मांग की है। इस पर अंतिम निर्णय मंत्री स्तर पर लिया जाएगा।
उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ जिलों में देशी शराब की उपलब्धता प्रभावित हुई है। हालांकि रायपुर में बॉटलिंग प्लांट शुरू हो चुका है और धीरे-धीरे आपूर्ति सामान्य हो रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्व पर इस स्थिति का कोई खास असर नहीं पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार डिस्टलरी संचालक कांच की बोतलों में ही आपूर्ति जारी रखने के पक्ष में थे, लेकिन सरकार इसके लिए सहमत नहीं हुई। देश के करीब 20 राज्यों में प्लास्टिक की बोतल में ही शराब बिक रहा है। मध्यप्रदेश में भी प्लास्टिक की बोतल में शराब बिक रही है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विदेशी शराब और बीयर प्लास्टिक बोतलों में उपलब्ध है, जबकि देशी शराब को लेकर दिक्कत बनी हुई है।
स्थिति यह है कि कई जिलों में देशी शराब दुकानों में उपलब्ध नहीं है, जिससे उपभोक्ताओं को विदेशी शराब या बीयर का विकल्प चुनना पड़ रहा है।


