रायपुर
50 फीसदी राशि का चैक जमा किया
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 6 मार्च। रविशंकर विश्वविद्यालय उप डाकघर बचत घोटाले में राज्य उपभोक्ता फोरम के फैसले को डाक विभाग ने राष्ट्रीय फोरम में चुनौती दी है। इसके लिए याचिका संबंधी कार्यवाही के लिए रायपुर के प्रवर अधीक्षक एचके महावर और कंप्लेंट इंस्पेक्टर राजेश कुमार राठौर दिल्ली भेजे गए हैं। नियमानुसार ऐसी याचिका, राज्य फोरम के फैसले के 30 दिन के भीतर दायर की जा सकती है। राज्य फोरम के अध्यक्ष जस्टिस गौतम चौरडिय़ा ने 2 फरवरी को अपने फैसले में घोटाले के शिकार रायपुर निवासी अनिल पांडेय को 1.91 करोड़ रुपए भुगतान का आदेश दिया था। बताया गया है कि इस याचिका के साथ विभाग ने 50त्न की राशि भी जमा की है। इसका चैक दिया गया है।
इधर विभाग स्तर पर भी जांच और तत्समय के अधिकारी कर्मचारियों से पूछताछ और बयान भी जारी है। इसके हवाले से यह भी पता चला है कि इस घोटाले के उजागर होने के बाद कार्रवाई में ढिलाई और दोषियों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों के भी नाम सामने आए हैं। इनमें तीन अधिकारियों के नाम विभाग में चर्चा में हैं। इनमें से एक रायपुर डाक संभाग और दो अन्य भिलाई (दुर्ग) और नवगठित राजनांदगांव संभाग में पदस्थ हैं। ये दोनों विजिलेंस और डिपार्टमेंटल इंक्वायरी का काम देखते थे। यह भी बताया गया है कि इन अफसरों ने रविवि डाकघर में पदस्थ पोस्ट मास्टर और सेविंग बैंक ब्रांच के अन्य स्टाफ को क्लीन चिट देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन आठ साल बाद फोरम के फैसले ने विभाग के भीतर चल रहे गड़बड़ झाले को उजागर कर दिया है। विभागीय जांच प्रतिवेदन के अनुसार अब इन पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
सीबीआई ने मांगे आवश्यक दस्तावेज..?
यहां बता दें कि 2 फरवरी के फैसले के फौरन बाद सीपीएमजी डा अजय चौहान स्वयं जांच में जुट गए थे और उन्होंने संभागीय और परिमंडल कार्यालय में जि़म्मेदारों से पूछताछ की थी। उसके बाद उन्होंने मातहत से जांच रिपोर्ट मांगा है। जो सौंपने के लिए तैयार है। इसमें दो दर्जन से अधिक लोगों के बयान लिए गए हैं। इन जांच और पूछताछ, दस्तावेजों की पड़ताल में यह घोटाला 20 करोड़ से अधिक का आंका गया है। इतनी बड़ी रकम को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई भ्रष्टाचार निरोधक शाखा रायपुर को दिए जाने की भी बात सामने आई है। इसके लिए सिफारिशी पत्र भेज दिया गया है। वहीं सीबीआई ने आवश्यक डाक्यूमेंट मांगे हैं।


