रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 6 मार्च। सभी जानवरों के अधिकारों की रक्षा हेतु समर्पित राष्ट्रीय संस्था पेटा इंडिया और छत्तीसगढ़ के वीगन्स की महिलाओं ने आज तेलीबांधा जलाशय के पास अनोखा प्रदर्शन किया।? अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले जागरूकता अभियान के तहत मुर्गियों के समर्थन में इन महिलाओं ने खुद को छोटे छोटे पिंजरों में बंद किया।
इनका कहना है कि समर्थक, लोगों को यह याद दिलाना चाहते हैं कि उन मुर्गियों को, जो अंडों के लिए पाली जाती हैं, पूरे जीवन ऐसे पिंजड़ों में रखा जाता है जिनमें वे एक भी पंख तक नहीं फैला सकतीं।
पेटा इंडिया की सीनियर मैनेजर ऑफ वीगन और कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स, डॉ. किरण आहूजा कहती है- सभी महिलाओं को अपने शरीर पर स्वतंत्रता और नियंत्रण का अधिकार होना चाहिए। इसमें वे मुर्गियाँ भी शामिल हैं, जिन्हें हर दिन गंदे और छोटे तार के पिंजड़ों में कैद रखा जाता है, ताकि इंसान उनका शोषण कर सके, उनके अंडे ले सकें और अंत में उन्हें दर्दनाक तरीके से मार दें। पेटा इंडिया इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी से अनुरोध किया है कि वे सभी प्रजातियों की महिलाओं के प्रति दयालु रहें और वीगन भोजन चुनें।
अपेक्षा तमाने और संस्कृति बंछोर ने कहा कि मुर्गियाँ बहुत ही समझदार और भावनात्मक प्राणी है। उनकी बुद्धि बिल्ली, कुत्ते और कुछ प्राइमेट्स जितनी होती है। वे अपने बच्चों के प्रति बहुत प्यार रखती हैं और उनकी सुरक्षा करती हैं। लेकिन अंडा उद्योग में, मुर्गियों को इस तरह से इस्तेमाल किया जाता है कि वे साल में 300 अंडे दे सकें जबकि उनके जंगली पूर्वज केवल 15 अंडे ही दे पाते थे। इसके कारण उन्हें अक्सर हड्डियों की कमजोरी, संक्रमण, ओवरी का कैंसर और प्रजनन अंगों के ट्यूमर जैसी समस्याएँ हो जाती हैं। कभी-कभी अंडे उनके शरीर में ही फंस जाते हैं। अगर किसी मुर्गी को सही तरीके से रखा जाए, तो उसकी उम्र लगभग 10 साल होती है। लेकिन अंडा फार्म में, भीड़ और खराब परिस्थितियों में, उनका शरीर केवल 2 साल में ही थक जाता है, अगर वे इतनी लंबी उम्र तक जीवित रह भी जाएँ। जब उनकी अंडा देने की क्षमता कम हो जाती है, तो उन्हें बेकार मानकर ट्रक में ठूस ठूस कर भर दिया जाता है और फिर उन्हें कसाईखाने या जीवित पशु माँस मंडियों में ले जाया जाता है, जहाँ सचेत अवस्था में होने के दौरान ही उनका गला काट दिया जाता है।मुर्गियों और अन्य पशुओं को अत्यधिक पीड़ा से बचाने के अलावा, वीगन जीवनशैली जीने वाले लोग अपने कार्बन फुटप्रिंट और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को भी काफी कम कर देते हैं।


