रायपुर

पीएससी में फिर नियुक्ति का घोटाला, तीन सदस्यों की भूमिका संदिग्ध
27-Feb-2026 8:57 PM
पीएससी में फिर नियुक्ति का घोटाला, तीन सदस्यों की भूमिका संदिग्ध

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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 27 फरवरी । पीएससी में एक भर्ती में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है। बताया गया कि उद्योग विभाग में बायलर इंस्पेक्टर पर अधिक उम्र के अभ्यार्थी को नियुक्ति दे दी गई। इसकी शिकायत भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने राज्यपाल से शिकायत की है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और सडक़—दोनों जगहों पर गरमा सकता है।

भाजपा नेता  श्रीवास ने पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर कानन वर्मा नामक अभ्यर्थी की नियुक्ति की गई, जबकि वह आयु सीमा से अधिक (ओवर एज) थे।

बताया जा रहा है कि इस भर्ती के खिलाफ दूसरे अभ्यर्थी साकेत अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद साकेत अग्रवाल के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें नियुक्ति देने का आदेश जारी किया। कोर्ट के आदेश के बाद भी विभाग की ओर से अब तक स्पष्ट कार्रवाई न होने पर सवाल उठ रहे हैं।

इधर, भाजपा नेता श्रीवास ने लोक सेवा आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए उस समय नियुक्त तीनों सदस्यों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि ये सदस्य भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में नियुक्त हुए थे, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।

श्रीवास ने राज्यपाल को बताया कि पूर्व की कांग्रेस पार्टी की सरकार की समय छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में तीन सदस्यों की नियुक्ति की गई है (प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान, सरिता उइके) इनकी गतिविधियां काफी संदिग्ध है तथा कानन वर्मा सदस्य (छ.ग. लोक सेवा आयोग) प्रवीण वर्मा का रिश्तेदार बताये जा रहे है ऐसी स्थिति में जबकि छ.ग. लोक सेवा आयोग जैसी संस्था की छवि बरकरार रहे तथा प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ में किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो सारी परीक्षाएं पारदर्शी ढंग से संपादित हो ऐसी स्थिति में कांग्रेस सरकार के समय मनोनित तीनों सदस्य (प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान, सरिता उइके) को तत्काल पद से हटा कर मामले की जांच की जाएं एंव पूर्व के पीएसएसी घोटाले में भी इन तीनों सदस्य दागदार रहे है तथा इनके सामने सारे घोटाले को अजांम दिया गया है अत: मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कड़ी कार्यवाही की अपेक्षा है।


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