रायपुर

बजट विकसित भारत के लक्ष्य का अहम कदम- किरण, बजट शेखचिल्ली का शोरबा-भूपेश बघेल
01-Feb-2026 5:55 PM
बजट विकसित भारत के लक्ष्य का अहम कदम- किरण, बजट शेखचिल्ली का शोरबा-भूपेश बघेल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 1 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी  के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने संसद में रविवार को प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्ताव को विकास को आगे बढ़ाने और मध्यम वर्ग की क्षमता बढ़ाने के लिए समर्पित बताया है। श्री देव ने कहा कि यह बजट विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम है जिसमें समावेशी विकास पर विशेष जोर दिया गया है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री देव ने बजट प्रस्ताव के प्रावधानों की चर्चा करते हुए कहा कि इस बजट में सरकार ने मुख्य रूप से कर सुधारों, विनिर्माण  और तकनीक पर जोर दिया है। मध्यम वर्ग के लिए व्यक्तिगत आयकर स्लैब में बदलाव कर नई आयकर व्यवस्था को और अधिक आकर्षिक बनाने पर जोर दिया गया है। 12 लाख रूपए तक की सालाना आमदनी पर अब कोई कर नहीं लगेगा। वेतनभोगी कर्मचारियों की मानक कटौती की सीमा बढ़ाकर 75 हजार रूपए करने का प्रस्ताव भी स्वागतेय है। उसी प्रकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर कटौती की सीमा दुगुनी कर 1 लाख रूपए कर दी गई है।

 छत्तीसगढ़ के लिए बजट में किए गए प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 में छत्तीसग? के विकास के लिए कई रणनीतिक प्रावधान किए गए हैं। चूँकि छत्तीसग? एक खनिज संपन्न और जनजातीय बहुल राज्य है, इसलिए केंद्र सरकार का ध्यान यहाँ की कनेक्टिविटी, जनजातीय कल्याण और औद्योगिक विकास पर केंद्रित है।

 बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि यह बजट शेखचिल्ली का शोरबा है.शेखी बघारते रहे कि विश्व में फलां नंबर की अर्थव्यवस्था हो गई, विश्व गुरु हो गए, पर बजट ने कलई खोल कर रख दी.पिछले साल यानी वर्ष 2025-26 में न राजस्व बढ़ा पाए, न टैक्स वसूली मज़बूत हो सकी. इस बार भी निर्मला सीतारमण जी के धुंआधार बजट में धुंआ बहुत है और धार बहुत पतली है.

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि शेयर बाजार बैठ गया है, निवेशक बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। बाजार लगातार गिर रहा है, मोदी सरकार के आर्थिक नीतियों पर से जनता का भरोसा टूट चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि मोदी सरकार के इस बजट में युवाओं के रोजगार के लिए कुछ भी नहीं है। निवेशक नए निवेश से घबरा रहे हैं, पूर्व में संचालित उद्योग, व्यापार चलाना मुश्किल हो रहा है और यह सरकार केवल मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखा रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि महिलाओं के लिए बजट में कुछ नहीं। मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में जनकल्याणकारी योजनाएं नहीं है, खाद सब्सिडी, खाद्य सब्सिडी, मनरेगा, एमएसपी की गारंटी, स्वामीनाथन कमेटी के अनुसार एमएसपी और सामाजिक सुरक्षा के मद में कोई विशेष प्रावधान नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि न बढ़ती महंगाई का कोई उपाय, न बढ़ती बेरोजग़ारी को रोकने का कोई प्रयास.न विदेशी हलचल से बाज़ार पर होने वाले असर को रोकने का कोई संकल्प.यह कटौती का बजट है. मोदी जी अब काटने में लग गए हैं. बांट तो वो पहले ही रहे थे।

युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर विशेष जोर-बृजमोहन

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बजट में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। एआई और आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, पशुपालन एवं डेयरी उद्योग को प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है।

उन्होंने ने कहा कि इस बजट में युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है। स्टार्टअप, एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा। विदेश यात्रा और विदेशों में पढ़ाई भी पहले की तुलना में सस्ती होगी इसी तरह से बायोफार्मा सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे कैंसर, डायबिटीज सहित अन्य गंभीर बीमारियों की दवाइयां सस्ती होंगी। जिला अस्पतालों के उन्नयन, हर जिले में इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर की स्थापना, मानसिक स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के साथ-साथ मेडिकल टूरिज्म के लिए राज्यों में पांच रीजनल हब स्थापित किए जाएंगे। इससे छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर बेहतर होगा और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

5 लाख आबादी वाले शहरों को 12 लाख करोड़ की सौगात-सोनी

रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी ने केन्द्रीय बजट को आत्मनिर्भर भारत का आत्मनिर्भर बजट बताते हुए बजट को सर्वस्पर्षी बताया। उन्होंने कहा कि आम बजट भारत की विकास गति को और अधिक उंचाई देने वाला है, जिसमें विकसित भारत के लक्ष्य को केन्द्रित करते हुए सभी सेक्टर का समावेष किया गया है। 5 लाख आबादी वाले शहरों को विकास के लिए 12 लाख करोड़ रूपये की ऐतिहासिक सौगात दी गई है, जिससे देषभर के इन शहरों को तेजी से विकास होगा। युवा, किसान, महिलाओं सहित गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को ध्यान में रखते हुए बजट प्रस्तुत किया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मेडिकल टूरिज्म, षिक्षा, कृषि व स्मार्ट खेती, नई बुलेट ट्रेन रूट, रेल कोरिडोर, संस्कृति सहित रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया गया है। निष्चित ही आने वाले एक वर्ष में भारत विष्व स्तर पर अर्थव्यवस्था के नए आयाम गढ़ेगा।

उद्योग और अर्थव्यवस्था पुनर्निर्माण का बजट

कालेज के प्राचार्य डॉ तपेश चन्द्र गुप्ता ने कहा कि बज़ट विनिर्माण, आर्थिक विकास परिकल्पनाओं के साथ रोजगार अवसर विस्तार का है । प्रशिक्षण, नवाचार, पूँजीगत उत्पाद विस्तार, खेल सामग्री निर्माण, वस्त्र उद्योग परिसीमा का निर्माण जैसे प्रमुख कार्य का विशेष प्रावधान कर विकसित अर्थव्यवस्था का बजट पेश किया गया है। वित्तीय व्यवस्था को सुनिश्चित करने हेतु विशेष प्रयास करने का आश्वासन दिया गया, विदेशी व्यापार के संतुलन बनाये रखने के लिए बॉण्ड एक सौ करोड़ अमृत बॉण्ड का लाभ मिलेगा।

रेल्वे कोरिडोर भी बनाया जा रहा है। कृत्रिम बौद्धमिकता को प्रोत्साहन की भी व्यवस्था की गई है। पम्परागत उद्योग, हथकरघा को प्रोत्साहन की योजना, आंतरिक जल मार्ग का विकास, योगा को महत्व देते हुए भारत को गतिशीलता प्रदान की गई है। चिकित्सा क्षेत्र में प्रयोगशाला, चिकित्सा, अनुसन्धान, दवा, औषधि, उपकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

बायो सेक्टर का विस्तार किया जायेगा और वरिष्ठ नागरिकों के लिए चिकित्सा सुविधा व्यवस्थित की जायेगी। पशुचिकित्सा का भी विस्तार कर सुविधा विकसित किया जायेगा। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार, छात्राओं के लिए छात्रावास का निर्माण किया जायेगा। खेलो इंडिया प्रोजेक्ट का विस्तार किया जायेगा जिसमें प्रशिक्षण और प्रतियोगिता भी सम्मिलित होगी , खेल उपकरण का निर्माण किया जायेगा ।

 

बजट हर स्तर पर खोखला-कुलिशा

कांग्रेस के रिसर्च विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक सुश्री कुलिशा देवी ने केन्द्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में बजट को खोखला करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट आय बढ़ाने का नहीं, बल्कि कर्ज बढ़ाने का बजट है। राष्ट्रीय समन्वयक ने कहा कि जब बजट के आँकड़े पीछे छूट जाते हैं, घिसे-पिटे जुमले दोहरा दिए जाते हैं और चुनावी नारों को चतुराई से भाषण में पिरो दिया जाता है, तब असली सवाल यह होता है—क्या यह केंद्रीय बजट आम लोगों की जि़ंदगी में कोई सकारात्मक बदलाव लाने वाला है? सरकार के अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए इसका जवाब साफ़ और बेझिझक है: नहीं। बिल्कुल नहीं।

कुलिशा ने आगे कहा कि यह बजट हर स्तर पर खोखला है। व्यापक आर्थिक आँकड़ों की चमक-दमक के पीछे एक असहज सच्चाई छुपी हुई है। सरकार दावा कर रही है कि वित्त वर्ष 2026 में अर्थव्यवस्था 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। अगर यह सच होता, तो देश में रोजग़ार की बाढ़ आ जानी चाहिए थी, निवेश उमड़ पड़ा होता। लेकिन हकीकत यह है कि 2025 के दस महीनों में से चार महीनों में शुद्ध विदेशी निवेश नकारात्मक रहा। यानी विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर भाग रहे हैं और भारतीय पूँजी विदेशों में शरण ले रही है। नतीजा सामने है—रुपया 90 के पार जा चुका है और सरकार के पास कहने को कोई ठोस जवाब नहीं।

उन्होंने आगे कहा कि घर-घर की हालत और भी बदतर है। मार्च 2025 तक 28 करोड़ से ज़्यादा लोग कजऱ्दार हैं। औसतन हर व्यक्ति पर 4.8 लाख रुपये का कजऱ् चढ़ चुका है। सिफऱ् चार साल में औसत कजऱ् 40 प्रतिशत बढ़ गया। वेतनभोगी वर्ग अब सम्मान से नहीं, कजऱ् के सहारे जि़ंदा है—क्योंकि किराया, राशन और ज़रूरी खर्च ही पूरी आमदनी निगल जा रहे हैं।

इस गंभीर संकट पर बजट पूरी तरह खामोश है। उलटे सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि अगले साल जीएसटी संग्रह 2.5 प्रतिशत कम रहेगा। सवाल यह है कि जब नाममात्र की आर्थिक वृद्धि 10 प्रतिशत बताई जा रही है, तो टैक्स संग्रह कैसे घट रहा है?  2025-26 में सरकार आयकर लक्ष्य से 1,09,000 करोड़ रुपये पीछे रह जाएगी, फिर भी अगले साल आयकर से लगभग 14 लाख करोड़ रुपये वसूलने का सपना दिखाया जा रहा है। जैसा कि वित्त मंत्री की ‘युवा शक्ति’ कहेगी—यह गणित नहीं, जुमलेबाज़ी है। कुलिशा ने कहा कि आम परिवारों के लिए यह बजट एक साफ़ संदेश देता है: कमाओ मत, कजऱ् लो।

किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाना हो या पीएम स्वनिधि जैसी योजनाएँ—सरकार के पास आय बढ़ाने का कोई रोडमैप नहीं है। वह सिफऱ् कजऱ् का रास्ता दिखा रही है। जब ग्रामीण भारत में हर चार में से तीन लोग पहले से कजऱ् में डूबे हैं, तब और कजऱ् थोपना आर्थिक नीति नहीं, सामाजिक अपराध है।

उन्होंने कहा कि किसानों के नाम पर बजट में सिफऱ् छलावा है। पीएम किसान और फसल बीमा जैसी योजनाओं का बजट महँगाई और बढ़ती किसान आबादी के बावजूद जस का तस रखा गया है। उधर यूरिया और पोषक तत्वों पर सब्सिडी घटाकर किसानों की लागत और बढ़ा दी गई है। यानी किसान से कहा जा रहा है—ज़्यादा पैदा करो, ज़्यादा खर्च करो, और घाटा खुद सहो।

कृषि उत्पादन बढ़ाने की बातें खोखली हैं। खासकर भाजपा शासित राज्यों में सरकारें खुद अपने चुनावी झूठ में फँस चुकी हैं। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बढ़े हुए एमएसपी पर धान खरीद का वादा किया गया, लेकिन सत्ता में आते ही किसानों के लिए रास्ते बंद कर दिए गए। मंडियों में हर कदम पर मुश्किलें खड़ी की गईं। कम से कम धान खऱीद हो इसके निर्देश अधिकारियों को दिए गए। जब किसान को यह भरोसा ही नहीं कि उसकी फसल बिकेगी, तो वह क्यों ज़्यादा उत्पादन करेगा? ज़्यादा उत्पादन का मतलब है ज़्यादा नुकसान—और सरकार इसे अच्छी तरह जानती है।

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन का पाँच साल का विस्तार सरकार की नाकामी की खुली स्वीकारोक्ति है। पिछले बजट में 67,000 करोड़ रुपये रखे गए, बाद में उसे घटाकर 17,000 करोड़ कर दिया गया। सवाल सीधा है—पैसा था तो खर्च क्यों नहीं किया? योजना समय पर पूरी क्यों नहीं हुई? जवाब कोई नहीं। ज़मीन पर हकीकत यह है कि ठेकेदार पैसा लेकर चले गए, नल तो लगे लेकिन पानी नहीं आया।

कुछ घोषणाएँ सुनने में अच्छी लगती हैं—स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को वाई-फाई से जोडऩा, गिग वर्कर्स को पहचान और स्वास्थ्य सहायता देना। लेकिन ये ऊँट के मुँह में ज़ीरे के बराबर हैं। जिस पैमाने पर संकट है, उस पैमाने पर यह बजट मज़ाक बनकर रह जाता है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आवंटन अपनी आवश्यकता से बहुत नीचे है।

कुलिशा ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में 75,000 सीटें बढ़ाने की घोषणा भी एक और खोखला दावा है। बिना अच्छे अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और योग्य शिक्षकों के ये सीटें सिफऱ् आँकड़े हैं। डॉक्टर और प्रोफेसर तब उपलब्ध होंगे जब नौकरी की शर्तें सम्मानजनक हों, वेतन और कार्य-परिस्थितियाँ आकर्षक हों। इसके लिए पैसा चाहिए—और इस बजट में पैसा नहीं, सिफऱ् भाषण है।

‘मेक इन इंडिया’ का बार-बार जाप भी अब थकाने लगा है। फैक्ट्रियाँ नारों से नहीं चलतीं। निवेश भरोसे से आता है, सामाजिक स्थिरता से आता है। जब माहौल असुरक्षित और संस्थाएँ कमज़ोर हों, तब कोई भी योजना कागज़़ से बाहर नहीं निकलती। इस सच्चाई पर बजट पूरी तरह चुप है।

उन्होंने कहा कि निष्कर्ष साफ़ है यह बजट आय बढ़ाने का नहीं, कर्ज बढ़ाने का बजट है।

यह सुधारों का नहीं, टालमटोल का बजट है।

सरकार की विश्वसनीयता पहले ही सवालों के घेरे में है—और यह बजट उसे बचाने के बजाय और गहरा गड्ढा खोदता है।

बजट से देश का विकास रुकेगा, रोजगार घटेगा - कांग्रेस

मोदी सरकार की अदूरदर्शिता का प्रमाण है 2026 का केंद्रीय बजट। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, महामंत्री, कन्हैया अग्रवाल, और प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने देश के युवा तो अब रोजगार की उम्मीद भी छोड़ चुके हैं देश की कार्यशक्ति में महिलाओं की भागीदारी लगातार घटती जा रही है किसानों की आय दुगुनी करने की गारंटी दी थी लेकिन किसानों की आमदनी लगातार कम होती जा रही है और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और लगातार किसानों की आत्महत्या की खबर आ रही है भाजपा की जुमला नीति से महंगाई की मार लगातार बढ़ती जा रही है ना गैस सिलेंडर के दाम कम हुए ना खाद्य पदार्थो के दाम कम करने को लेकर कोई प्रयास इस बजट में नजर आया परिवारों की बचत खाली होती जा रही है अपना घर चलाने के लिए भी लोगो को जद्दोजहद करना पड़ रहा है।


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