रायपुर

हम शारीरिक से ज्यादा मानसिक भक्ति पर ध्यान दें-बापू
13-Jan-2026 11:14 PM
हम शारीरिक से ज्यादा मानसिक भक्ति पर ध्यान दें-बापू

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 13 जनवरी।
अवधपुरी मैदान, गुढिय़ारी में जारी श्रीमद् भगवद् पुराण कथा के छठे दिन चिन्मयानंद महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की रास लीला एवं रुक्मिणी विवाह प्रसंग की कथायें  सुनाईं। महाराज श्री ने कहा कि हम शारीरिक भक्ति से ज्यादा मानसिक भक्ति पर ज्यादा ध्यान दें, शरीर को स्वस्थ रखने के लिये प्राणायाम करें। आत्मा के बारे में उन्होंने बताया कि वो अजर-अमर है अर्थात वो ना जन्म लेती है ना ही मरती है? हमें अपने कार्यों के लिये किसी अन्य से नहीं अपने ईष्ट से आशा रखनी चाहिए।
रास लीला प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराजश्री ने बताया कि वृंदावन की धरा पर शरद पूर्णिमा को चांदनी की छटा बिखरी हुई थी, मध्यम हवा के झोंकों में मुरली की धुन पर गोपियां चली आ रहीं थीं। हर गोपी को यही लग रहा था श्री कृष्ण उन्हीं के साथ नृत्य कर रहे हैं।वो आध्यात्मिक प्रेम एवं आनंद में डूबी हुई थीं। देवतागण भी स्वर्ग से इस रमणिक दृश्य को देखकर आनंदित थे। महाराजश्री, नारद मुनि से जुड़ा प्रसंग भी सुनाये कि वे कैसे माता देवकी की संतानों का वध करते हैं, श्री कृष्ण जी का जन्म होता है एवं कुछ वर्षों पश्चात वे मथुरा में बलदाऊ के साथ मामा कंस का वध करते हैं।कथा में सुदामा से भेंट, जरासंघ को 17 बार युद्ध में पराजित करने को भी विस्तार से बताए।
भगवान श्री कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर उन्होंने बताया कि रुक्मिणी विदर्भ की राजकुमारी थीं जिनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध उनके भाई रुक्मी ने शिशुपाल से तय कर दिया था। तब रुक्मिणी ने श्री कृष्ण को संदेश भेजकर विवाह की इच्छा जताई तब भगवान श्री कृष्ण ने वैवाहिक तैयारियों के मध्य उनका हरण कर लिया।दूल्हा बना शिशुपाल, भाई रुक्मी एवं राजाओं द्वारा पीछा कर श्री कृष्ण को घेरे जाने एवं युद्ध स्थल पर बलदाऊ के योद्धाओं सहित पहुंचने पर श्री कृष्ण विजयी होते हैं। इस मौके पर विवाह की जीवंत झांकी कथा स्थल में दिखाई गई।
आयोजक विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट शाखा रायपुर की ओर से जितेन्द्र अग्रवाल सारिका अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, ओमप्रकाश मिश्रा, मयंक वैद्य, चन्द्रचूड़ त्रिपाठी, रोहित मिश्रा,आशीष तिवारी, मनोज तिवारी, नितिन कुमार झा आदि आरती एवं व्यवस्था में शामिल रहे। उत्तर विधायक  पुरन्दर मिश्रा एवं पूज्य राजीवलोचन महाराज  भी कथा स्थल पहुंचे थे।


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