रायपुर
27 लाख से अधिक नाम कटे, लोकतंत्र से खिलवाड़
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 6 जनवरी। आम आदमी पार्टी ने छत्तीसगढ़ में हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण को प्रशासनिक विफलता, और लोकतंत्र से खिलवाड़ कहा है। पार्टी ने आज एक पत्रकारवार्ता में एसआईआर प्रक्रिया में दावा आपत्ति सुनवाई, और वेरीफिकेशन की समय-सीमा 6 माह बढ़ाने की मांग की है।
आम आदमी पार्टी स्पष्ट आरोप है कि हार के दौरान हजारों पात्र, जीवित और स्थायी नागरिकों के नाम बिना कारण, बिना सूचना और बिना सुनवाई के मतदाता सूची से हटाए गए हैं। राज्य के 27 लाख 34 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर आम आदमी पार्टी कड़ा ऐतराज जताती है।
प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय कुमार झा में बड़ा कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं. उन्हें इलेेक्शन कमीशन की तरफ से नोटिस देकर अपने नाम दोबारा जुड़वाने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया है। और दावे और आपतियां 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2020 तक ही रखी गयी है। वहीं सुनवाई और वेरिफिकेशन 23 दिसंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक होंगे। अंतिम बोटर लिस्ट 21 फरवरी 2026 को पमिल्स की जाएगी। इसके लिए भी कम समय दिया गया हैंडसे 6 महीने बढ़ाया जाये।
प्रदेश सचिव संतोष कुशवाहा ने कहा कि जारी लिस्ट में में बहुत खानियों और गड़बडिय़ों है। बिना कारण नाम हटाए जाना सबसे गंभीर अपराध है। प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ ने बताया कि डिजिटल प्रक्रिया से गरीब बुजुर्ग और ग्रामीण बाहर ओटीपी, ऑनलाइन फॉर्म, पेप आधारित सिस्टम, डिजिटल संसाधनों से वंचित नागरिक पूरी तरह प्रभावित रहे। आधार को लेकर भ्रम और दबाव जबकि आधार अनिवार्य नहीं है। फिर भी कई जगह आधार न होने पर नाम करने का भय। मतदाताओं में हर और असमंजस का माहौल बना रहा। बाहरी राज्यों के नाम जुडऩे की शिकायते भी आयी। ऐसे माम हे गए जिनका छत्तीसगढ़ से वास्तविक निवास संबंध संदिग्ध था स्थानीय नागरिकी के नाम हटाए गए। वहीं हुप्सीकेट जांच के लिए पारदर्शी तकनीकी दूका अभाव रहा। जवाबदेही और पारदर्शिता शून्य रही। किस अधिकारी ने नाम हटाने का निर्णय लिया स्पष्ट नहीं बताया गया। मतदाताको कारण बताने की कोई व्यवस्था नहीं रही।


