रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 14 दिसंबर। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. आर के मंडल ने कहा कि आज के दौर का दुर्भाग्य है कि मिथकों के आधार पर एक धर्म - एक भाषा -एक संस्कृति जैसी धारणाओं को थोपा जा रहा है। इतिहास का विकृतिकरण जारी है। नेहरू -गांधी सहित स्वाधीनता आंदोलन के मुख्य नायकों को खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। संस्कृति बहुवचन होती है और उसे एकवचन में ढाला नहीं जा सकता। हमारा देश जन -गण - मन में प्रतिध्वनित होता है।
मारी स्मृतियां मिल जुलकर रहने और मोहब्बत करने की व्यापक मानवीय सरोकारों के साथ जुड़ी हुई है। इसी मानवीय सरोकारों पर सुनियोजित रूप से आक्रमण जारी है । नेहरू जी ने आध्यात्मिक अवधारणा के स्थान पर वैज्ञानिक चेतना को स्थान दिया द्य महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा व मानवीय करुणा को स्थापित किया। यही कारण है कि ये दोनों महानायक सर्वाधिक हमलों की जद में है। प्रो. मंडल रायपुर डिवीजन इंश्योरेन्स एम्पलाइज यूनियन द्वारा आयोजित एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
विविधता में एकता ही हमारी ताकत है विषय पर संपन्न यह सेमिनार बीमाकर्मियो के राष्ट्रीय संगठन आल इंडिया इंश्योरेंस एम्पलाइज एसोसिएशन के प्लेटिनम जुबली वर्ष पर देश भर में जारी कार्यक्रमों की श्रृंखला में आयोजित किया गया था।
इस सेमिनार में एसोसिएशन के महासचिव धर्मराज महापात्र ने कहा कि आज हमारी यह मिली -जुली संस्कृति ही निशाने पर है। हमारे समाज सुधारकों की महान मानवीय परंपरा खतरे में है। यह लड़ाई वैचारिक है। जो कुछ घटित हो रहा है उसका मुकाबला विचारधारात्मक रूप से ही संभव है। इस लड़ाई के माध्यम से ही देश व समाज का भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है।
सेमिनार की अध्यक्षता आर डी आई ई यू के अध्यक्ष राजेश पराते ने की द्य सेमिनार में बड़ी संख्या में बीमाकर्मियों के साथ शहर के ट्रेड यूनियन आंदोलन के कार्यकर्ता तथा प्रमुख बुद्धिजीवी उपस्थित थे। प्रश्नोत्तर के एक सत्र में हुआ। प्रतिभागियों द्वारा उठाएं गए सवालों का जवाब प्रो. मंडल ने दिए।


