रायपुर

यूरोलॉजी से संबंधित बीमारियों का उपचार यूरोलॉजिस्ट से ही कराना आवश्यक
13-Dec-2025 7:38 PM
यूरोलॉजी से संबंधित बीमारियों का उपचार यूरोलॉजिस्ट से ही कराना आवश्यक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 13 दिसंबर। शनिवार को छत्तीसगढ़ यूरोलॉजी एसोसिएशन का एकदिवसीय वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया।

यह  13 अक्टूबर को यूरोलॉजी जागरुकता दिवस के  संदर्भ में किया गया। इस, मौके पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में  डा प्रकाश भागवत और वरिष्ठ यूरोलॉजिस्टों ने आमतौर पर जागरुकता के अभाव में मरीज यूरोलॉजिस्ट के पास सही समय पर नहीं पहुंचता है। विलंब से आने पर समस्या जटिल हो जाती है।

यूरोलॉजिस्ट या यूरो सर्जन नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी पूर्व में एमसीआई ) द्वारा मान्यता प्राप्त सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर होते हैं। इसके लिए एमसीएच यूरोलॉजी एवं डीएनबी यूरोलॉजी की डिग्री अनिवार्य है। यूरोलॉजिस्ट या यूरो सर्जन महिलाओं,पुरुषों और बच्चों के किडनी,यूरेटर,पेशाब की थैली या मसना, पेशाब के रास्ते, एड्रेनल ग्रंथि,पुरुषों के प्रजनन तंत्र के अंगों जैसे प्रोस्टेट, अंडकोष, लिंग की बीमारियों का इलाज व ऑपरेशन करते हैं। इन अंगों के कैंसर,गांठ, पथरी इन्फेक्शन, रुकावट, खराबी, चोट जन्मजात बीमारियों व अन्य बीमारियों के इलाज एवं ऑपरेशन के लिए यूरोलॉजिस्ट से ही मिलना चाहिए। इन बीमारियों का अप्रशिक्षित डॉक्टर से इलाज न कराने छत्तीसगढ़ यूरोलॉजी एसोसिएशन द्वारा हमेशा जागरूक किया जाता है। मूत्र संबंधी बीमारियां लोगों के जीवन में प्रभाव डाल सकती है।

इस संबंध में जागरुकता बहुत आवश्यक है। समय-समय पर इन बीमारियों के पेशेवरों के रूप में हमारी महती जिम्मेदारी है कि हम जनता को मूत्र संबंधी विकारों के बारे में सूचित करें और मरीज को योग्य विशेषज्ञों से समय पर उपचार लेने के महत्व को समझाएं। इससे जनता को समझ में आए कि मूत्र संबंधी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए किनसे संपर्क करना है।आज जागरुकता की कमी के कारण केवल 30 प्रतिशत मरीज ही यूरोलॉजिस्ट तक पहुंच पाते हैं। 70 प्रतिशत मरीज यूरोलॉजी से सम्बंधित रोगों के लिए अन्य डॉक्टरों के पास जाकर उपचार लेते हैं।

समस्या के समाधान नहीं होने पर मरीज को फिर यूरोलॉजिस्ट के पास जाने की सलाह दी जाती है। इस सबके बीच समय और पैसों का भी नुकसान होता है। वही मरीज की समस्या भी अधिक बढ़ जाती है। आज मीडिया के माध्यम से लगातार झोला छाप डॉक्टरों के समाचार सामने आते हैं। ऐसे में बहुत आवश्यक है कि मरीजों और उनके परिजनों में जागरूकता आवश्यक है।


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