रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 7 अक्टूबर। रेलवे स्टेशन के लाइसेंसी पोर्टर (कुली) अपनी मांगों को लेकर दूसरे दिन भी सपरिवार हड़ताल पर बैठे हुए हैं। आज इनका कहना है कि आज इन्हें भगाया जा रहा है, यह कहकर कि प्लेटफार्म के अंदर धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते। ऐसे धरना प्रदर्शन बाहर जाकर कर सकते हैं। कुलियों का कहना है कि वे सभी , उन्हें आबंटित ऑफिस के सामने धरना दे रहे हैं। रेलवे के किसी भी काम में बाधा नहीं पहुंचा रहे।
कुलियों का कहना है कि लंबे समय से वे नौकरी की सुरक्षा, पहचान पत्र और बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन द्वारा अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया है। धरने की वजह से स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों को सामान ढोने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्री खुद ही भारी-भरकम बैग और लगेज खींचने को मजबूर हैं। वहीं, रेलवे प्रबंधन की ओर से अभी तक आंदोलन को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कुलियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन कर रहे कुलियों का कहना है कि रेलवे में आधुनिकीकरण और निजीकरण के कारण उनकी आजीविका पर भीषण संकट मंडरा रहा है। महंगाई के दौर में उनकी सीमित आमदनी से परिवार का पालन-पोषण करना लगभग असंभव हो गया है. रेलवे ने कुलियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई आदेश जारी किए थे, जैसे उनके बच्चों को रेलवे विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा, परिवार के सदस्यों के लिए नि:शुल्क चिकित्सा व्यवस्था, प्रतिवर्ष चार वर्दी प्रदान करना और आधुनिक सुविधाओं से युक्त विश्रामालय उपलब्ध कराना। ये सभी प्रावधान अभी तक जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाए हैं।विशेष रूप से रायपुर मंडल में कुलियों की उपस्थितिऔर स्टेशनों पर बैटरी चालित वाहनों की नि:शुल्क सेवा उपलब्ध होने के बावजूद सामान ढोने का ठेकेदारी कार्य एक निजी कंपनी को सौंप दिया है—प्रति यात्री 50 रुपये तथा प्रति लगेज 30 रुपये की दर से। यह कुलियों की आजीविका का हनन है।


