रायपुर
मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने ज्ञापन सौंपा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 25 सितंबर। छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को ज्ञापन सौंपा है। इसमें अध्यक्ष चंद्रप्रकाश पांडे ने मंत्रालयीन कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू करने की मांग की है। पांडे ने बताया कि यह योजना एपी, एमपी,यूपी राजस्थान, हरियाणा, गुजरात राज्यों में लागू है।
पांडे ने कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 के तहत इलाज उपरांत देयक की चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा दी गई है। इस व्यवस्था के तहत अधिकारियों/कर्मचारियों को पहले अपने इलाज का खर्च स्वयं करना होता है, तत्पश्चात् विभाग के माध्यम से प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर, मेडिकल बोर्ड या स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा निदेशक की अनुमति आवश्यक है। यह मौजूदा प्रतिपूर्ति प्रणाली काफी जटिल है। आपात स्थिति में राज्य के कर्मचारियों को समय पर गुणवत्तपूर्ण ईलाज मिल पाना मुश्किल हो जाता है। परिवार के सदस्य समुचित ईलाज कराने के बजाय राशि की व्यवस्था में लग जाते हैं जिससे कभी-कभी अनहोनी की स्थिति भी निर्मित हो जाती है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्याओं को दूर किया जाना प्रासंगिक हो गया है।
पांडे ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न कार्यालय में पदस्थ अल्पवेतन भोगी कर्मचारियों को शासन द्वारा मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सालयों में ईलाज हेतु एडमिशन के समय कम से कम 10 से 20 प्रतिशत राशि तत्काल जमा करना पड़ता है। तदुपरांत ही निजी चिकित्सालयों द्वारा ईलाज प्रारंभ किया जाता है।
प्राय: देखने में आया है कि कई कर्मचारी प्रारंभिक राशि जमा करने में असमर्थ होते हैं। जिसके कारण उन्हें उचित ईलाज नहीं मिल पाता। अल्पवेतन भोगी कर्मचारियों को ईलाज के लिए बैंको से लोन या कर्ज लेना पड़ता है। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति चरमरा जाती है। जिसका प्रभाव उनके परिवारों पर पड़ता है। यह योजना चिकित्सकीय आपात स्थिति में वित्तीय बोझ एवं अस्पतालों की जटिल प्रक्रियाओं को समाप्त कर, सरकारी कर्मियों को एवं उनके परिवारों को एक सुरक्षा प्रदान करेगी। जिससे राज्य के कर्मचारियों का शासकीय कार्य के प्रति मनोबल बढ़ेगा यदि छत्तीसगढ़ राज्य में कैशलेस चिकित्सा योजना लागू की जाती है तो ईलाज हेतु अस्पताल में भर्ती होने पर कर्मचारियों को स्वर्य कोई भुगतान नहीं करना पड़ेगा।


